दशहरा Durga Puja के दिन पापा ने माँ समझ कर मुझे चोद दिया

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दोस्तों ये कहानी लिखकर मुझे थोड़ा अटपटा लग रहा है। की मैसे मैं इस बात को आपके साथ शेयर करूँ की मेरे पापा ने मुझे दशहरा के दिन भी चोद देंगे और जब उनका वीर्य गिर जाएगा तो बाद में उनको समझ आएगा की मैं अपनी बीवी के जगह अपनी बेटी को ही चोद दिया। जी हां दोस्तों या बात सच है आज मैं आपके सामने वो सारे वाक्या बताने जा रही हूँ।

बात रात की है। पापा जी मेला देखकर आये और फिर अपने दोस्तों के साथ वो लेट तक ड्रिंक करते रहे और फिर लेट घर पहुंचे। घर माँ मैं और माँ थी। जब वो आये तो मैं सो रही थी। मैं पहले ही मेला देखकर आ गई थी। तो मैं सो गई थी और मैं नाइटी पहन कर सो रही थी और ये पहली बार हुआ था की मैं ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी। माँ पड़ोस में गई थी क्यों की उनके यहाँ कुछ फंक्शन था ये बात पापा को नहीं पता था। और गलती मेरे से ये हुई की मैं मम्मी के कमरे में ही सो गई थी। मुझे लगा की थोड़े देर के लिए आराम करुँगी फिर अपने कमरे में चली जाउंगी। यहाँ तक की माँ भी जाते जाते बोल गई थी की जा अपने कमरे में तुझे नींद आ रही है थक गई इसलिए।

रात में पापा घर आये और सीधे कमरे में आ गए और बोले डार्लिंग आज मुझे चोदने दे तू पांच दिन से मेरे को कह रही है माहवारी आ गई है आज तो ख़तम हो गया ना आज तो मत रोकना देखा उषा (उषा मेरी मम्मी का नाम ) आज मेरा लौड़ा भी मोटा हो रहा है लंबा भी हो गया है और फुल हूँ शराब पि कर आज मत रोकना और हां तेरे लिए मैं आज सेक्स पावर के लिए टेबलेट भी खा कर आया हूँ आज तो तेरी चूत फाड़ूंगा पर आराम से। आज मत रोकना। मैं मना ही करने वाली ठीक की मैं राधिका हूँ मम्मी नहीं हूँ। मैं जैसे ही आवाज निकाली उन्होंने मेरा मुँह बंद कर दिया अपने हाथों से मैं टसमस भी नहीं कर पा रही थी मेरा पापा पहलवान है ऐसे ही वो ताकतवर हैं।

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मैं असहाय थी। कमरे में अन्धेरा था। हलकी हलकी रौशनी खिड़की से आ रही थी। मैं साफ़ साफ़ देख रही थी पर पापा ज्यादा पिए हुए थे ऊपर से सेक्स की टेबलेट खाये थे इसवजह से वो नशे में थे। मेरी नाइटी को ऊपर कर दिया और दोनों टांगो को अलग अलग किया छुड़ाने की कोशिश की पर वो जोर से फिर से दबा दिए और मेरी चूत में अपना मोटा लौड़ा घुसा दिए। मैं कराह उठी थी। मोटा लौड़ा मेरे बर्दाश्त के बाहर था पर अब तो चूत फट चुकी थी।

वो जोर जोर चोदने लगे। मैं कराह रही थी। वो मेरी चूचियां दबा रहे थे। और कह रहे थे क्या बात है उषा तेरी चूत तो काफी टाइट हो गई है। लौड़ा भी ठीक से नहीं जा रहा है। पर अच्छा लग रहा है ऐसा लग रहा है जैसे की मैं किसी अठारह साल की लड़की को चोद रहा हूँ। और जोर जोर से चोद रहे थे।

अब धीरे धीरे मुझे भी अच्छा लगने लगा था मेरी चूत भी पानी पानी हो चुकी थी। मेरी चूचियों में भारीपन आ गया था निप्पल खड़े हो गए थे और पापा मेरे धक्के दिया जा रहे थे हरेक धक्के से मेरे तन बदन में आग लग रही ही। खूब चुद रही थी मैं भी गांड उठा उठा कर मजे लेने लगी सोची जो होगा देखा जाएगा पहले आज चुद तो लूँ शायद ऐसा मौक़ा फिर नहीं आएगा।

मैं अपने चूचियों को दबा रही थी। निचे से धक्के दे रही थी ताकि पापा का लौड़ा मेरे चूत के अंत तक पहुंचे मजे ले रही थी। दोस्तों मैं झड़ गई पर पापा नहीं झड़े टेबलेट की वजह से आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। वो तब भी चोदते रहे। क्या बताऊँ दोस्तों मैं चुदी उसके बाद पापा भी जोर से आवाज निकाले और आह आह आह आह करते करते सारा वीर्य मेरे चूत में ही डाल दिए और लेट गए क्यों की वो पलंग तो माँ का ही था। वो तो गलती से मुझे चोद चुके थे। अब मैं क्या करती वह से उठी और अपने कमरे में चली गई। लाइट जला कर देखा तो मेरी चुत सूज चुकी थी। थोड़े थोड़े खून भी आ रहे थे। दर्द हो रहा था।

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मैं कॉटन निकाल कर अलमारी से साफ़ करने लगी तभी फ़ोन बजा पापा का तीन चार रिंग के बाद वो किसी तरह उठाये और बोले हेलो, रात काफी हो गई थी। फोन माँ का था वो पड़ोस से ही बोल रही थी वो कन्फर्म कर रही थी की पापा आये की नहीं। पापा बोले क्यों आ गए क्या बोल रही है तुम तो अभी मेरे साथ ही थी। तो माँ उधर से बोली मैं कहा थी मैं तो यहाँ पूजा में आई हूँ। मैं इसलिए फ़ोन की थोड़े देर में आ जाउंगी।

शायद ये फ़ोन पर बात करने के बात पापा का होश उड़ गया नींद गायब नशा भी उतर गया। तुरंत मेरे कमरे तरह आये। मुझे देखे मेरा हाथ में रुई थी। वो समझ गए माजरा कुछ और था। वो बोले राधिका तुम भी वहाँ पर तो मैं बोली हां मैं थी। तो वो बोले रोका क्यों नहीं? मैं बोली रोकी तो थी पर आप ने मुझे वश में कर रखा था। और फिर मुझे अपने ताकत से मुझे क्या किया वो तो पता है।

मैं सोची जो हो गया सो हो गया। बात बढ़ने से गलत ही होगा तो पापा को बोली कोई बात नहीं ये बात यही ख़तम हो गई है मैं मम्मी से नहीं कहूँगी और वो मेरे पास आकर बोले थैंक्स ऐसा फिर नहीं होगा।

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