पार्क में मिली आंटी की चुदाई

हैलो दोस्तो कैसे हो आप मुझे भूले तो नहीं न फिर से आप के सामने एक नई दास्तान लेकर हाजिर हूं। दोस्तो ये कहानी ज्यादा पुरानी तो नहीं है मगर नई भी नहीं है। दोस्तो मैने नए साल पर एक संकल्प लिया कि रोज सुबह मॉर्निंग वॉक करने पास ही पार्क में जाने लगा ऐसे ही कुछ दिन बाद 37 साल की एक आंटी को पार्क में टहलते हुए देखा उसका फिगर 34-36-36 का था और थोड़ी मोटी थी। मगर उसके बूब्स और गांड अपने सही आकार में थे।

वह आंटी का गोरा रंग और सेक्सी थी मैने रोज उसके आने जाने का टाइम नोट किया और जब वो आती तो में भी उसी टाइम पार्क में आने लगा और उसका पीछा करता एक दिन जॉगिंग करते हुए उसे पानी की प्यास लगी में हमेशा जॉगिंग करते समय अपने पास पानी कि बाटल रखता हूं उसे पानी देने के बहाने मैने उससे बातचीत शुरू की और उससे पूछा वह कहा रहती है। पहले तो कभी आप को देखा नहीं यहां उसने कहा वह पास ही कालोनी में रहती है। अभी ही जॉगिंग शुरू किया है फिर वो मुझे थैंक्स बोलकर चली गई हम जब भी पार्क में आते थोड़ी देर एक दूसरे से बात करते थोड़े ही दिनों में हम दोस्त बन गए एक दूसरे का मोबाइल नंबर भी ले लिया में अब उससे whatapp पर चेट करता मुझे पता चला कि उसका पति एक कंपनी में मार्केटिंग करता था।

जो अपने काम के कारण अधिकतर समय  दूसरे शहर में रहता था। उसने मुझे बताया कि वह आमतौर पर यहां अकेली ही रहती थी। उस एक अच्छे दोस्त की जरूरत थी वह दोस्त उस मुझ में दिखा वह मेरे साथ बहुत सहज महसूस करती थी एक दिन में अपने किसी दोस्त को नॉनवेज जोक्स भेज रहा था कि गलती से वो जोक्स मैने उसको भी सेंड कर दिया उसका कॉल आया क्या लिखा तुमने मैने हिम्मत करके कहा वो तो गलती से आप को सेंड हो गया वो तो में अपने दोस्त को भेज रहा था मेरी ये बोलते हुए डर भी लग रहा था कि कहीं वो मुझ से दोस्ती न दौर ले मगर वो फोन पर हसी तब मेरी जान में जान आई बस फिर क्या था अब हम सेक्स के ऊपर भी बात करने लगे हम दोनों ही चुदाई की आग में जल रहे थे।

एक दूसरे में समा जाना चाहते थे और लंबा इंतजार नहीं कर सकते थे। एक दिन रविवार को मॉर्निंग वॉक करते हुए उसने मुझे बताया कि उसका पति 3दिन के लिए बहार जा रहा है वह घर में अकेली होगी उसका ये इशारा समझ कर मैने कहा ये 3दिन आप को में जी भर के प्यार करुगा मैने उससे कहा सुबह 9बजे आप के घर आउगा अगले दिन में 8:55 पर उसके घर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया उसने दरवाजा खोला और में उसकी सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गया वह स्लीव्स ब्लैक बलौज के साथ उसने पारदर्शी लाल साड़ी पहनी थी बाकी क्या खूबसूरत लग रही थी वो उसकी पतली कमर फिर उसने मेरा वेलकम किया हम दोनों सोफे पर बैठ गए मैने आंटी को अपनी और खींच कर अपनी गोदी में बैठा लिया और उसके होठों पर किस्स करने लगा आंटी ने मुझसे कहा शाम को हमारे पास 8 बजे तक का ही समय है मैने पूछा क्यों तुम तो कह रही थी कि तुम्हारा पति 3दिन के लिए बहार जा रहा है।

उसने मुझसे कहा हम पूरे दिन मजे करे इसलिए नौकरानी को रात में बोला काम पर आने को फिर उसने कहा मेरे लिए कुछ खास बनाया है वह रसोई में गई हाथ में चाकलेट आइस्क्रीम से भरा कटोरा लाई और मुझे खाने को बोला मैने एक चम्मच में आइस्क्रीम ली और खाई तो उसने पूछा कैसी लगी मैने फिर से एक चम्मच आइस्क्रीम मुंह में रखी और उसे अपने पास खीज कर किस्स करने लगा हम दोनों 10मिनिट एक दूसरे को किस्स करने लगे चाकलेट की खुशबू एक अलग ही एहसास करा रही थी उसके बाद आंटी मुझे बेडरूम में ले गई और बिस्तर पर बिठा दिया और कहा मुझे आज ऐसा चोदो की में अपने पति की चुदाई को भी भूल जाऊ बस इतना सुनते ही मैंने आंटी को अपनी ओर खींच लिया और उसके लबों को चूमने लगा। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और मेरा साथ देने लगी। हम दोनों लगभग दस मिनट तक एक-दूसरे को चूमते रहे, फिर मैंने अपने हाथों को उसके पूरे शरीर पर घुमाना शुरू कर दिया।

पहले तो मैंने उसके 34 साइज़ के मम्मों को अपने हाथो में लिया और उनसे खेलने लगा। वो और ज़ोर से मुझे चूमने लगी। फिर मैं अपना हाथ उसकी बलौज के अन्दर डाल कर उसकी पीठ को सहलाने लगा। वो भी मेरी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी। मैं अपने हाथ को उसकी बलौज़ में आगे करके ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को मसलने लगा। इतनी देर में वो बहुत गरमा गई और कहने लगी- आज तू मुझे अपनी बना ले, आज मैं तुम्हारे अन्दर समा जाना चाहती हूँ। मैंने आंटी साड़ी खोली अब वो काली ब्रा में मेरे पास बैठी थी और मेरे शरीर से चिपक रही थी।

आंटी मुझे बार-बार बोल रही थी- मुझे किसी मर्द का टच मिले कितना समय हो गया है, आज मैं तुम्हें छोड़ने वाली नहीं हूँ फिर मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया और खुद उसके पैरों के पास बैठ गया। फिर मैं धीरे-धीरे आंटी के पैरों और जाँघों को सहलाने और चूमने लगा। वो पागलों की तरह बस ‘उम्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह.. उम्म..’ ही कर रही थी। मैं धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ते हुए आंटी की पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। वो मदहोशी में बस ‘उफ्फ़ आहह..’ ही कर रही थी। मैं आंटी के पेट को चूमने लगा और वहाँ पर भी बहुत सारे किस किए। अब ऊपर की ओर बढ़ते हुए मैं आंटी मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा। आंटी कामुक सिसकारियाँ ले रही थी और मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा रही थी।

मैंने अपना शॉर्ट और टी-शर्ट भी उतार फेंकी और सिर्फ़ अपनी अंडरवियर में था.. जो कि अब तक तो टेंट बन चुका था। मेरा लंड बाहर आने को बेकरार हो रहा था। फिर मैंने आंटी भी ब्रा और पेंटी को उसके खूबसूरत बदन से अलग कर दिया। अह.. मैं तो आंटी के नंगे मम्मों को देख कर जैसे पागल सा हो गया। उसके चूचुक एकदम कड़क हो गए थे। मैंने उसके एक चूचे को अपने मुँह में लिया और दूसरे को अपने हाथों से मसलने लगा।
इससे वो भी पागल हुए जा रही थी और बस ‘उम्म.. उम्म.. आहह आहह..’ की मादक आवाजें निकाल कर मेरा लंड और कड़क किए जा रही थी, साथ ही मुझे और भी पागल कर रही थी। वो बार-बार कह रही थी- अब आगे भी बढ़ो.. आज सारी हदों को मिटा दो, मुझे अपना बना लो.. मुझे प्यार करो। पर मैंने जल्दबाज़ी करना ठीक नहीं समझा। मैंने अपना एक हाथ से चुत को सहलाने लगा। वो हद से ज्यादा उत्तेजना में पागल हुए जा रही थी.. पर मैं आज उसे पूरा मजा देना चाहता था। फिर आंटी अपने हाथों से मेरी अंडरवियर भी उतार फेंकी। थोड़ी देर मेरे लंड से खेलने के बाद अपने दोनों पैर फैला कर आंटी लेट गई और मुझसे कहने लगी- यार अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, प्लीज़ कुछ करो.. वरना मैं मर जाऊँगी।
मैं भी देर ना करते हुए जल्दी से उसकी दोनों टाँगों के बीच में बैठ गया और अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। कसम से दोस्तो क्या बताऊँ.. एकदम मस्त और रसीली चुत थी उसकी.. एकदम मस्त गुलाब की पंखुड़ियों की तरह हल्की सी गुलाबी और एकदम साफ, मेरा मन तो कर रहा था कि उसका पानी पी जाऊँ, पर अब मैं उसको और अधिक तड़पाना नहीं चाहता था।
जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चुत के मुँह पर रख कर रगड़ना शुरू किया.. वो उत्तेजना में तेज-तेज सिसकारियाँ भरने लगी। वो ‘उम्म्म.. ह्म्म्म्म .. उफफफ्फ़.. हाँ पेल दो..’ कहने लगी, मुझसे रिक्वेस्ट करने लगी- प्लीज़ जानू अब और मत तड़पाओ.. जल्दी से मेरी चूत की प्यास मिटा दो.. अह.. मैं बहुत प्यासी हूँ.. अब अपना लंबा मूसल मेरी बुर में घुसा दो और मुझे जन्नत की सैर करा दो.. अह..! मैंने भी देर ना करते हुए उसकी चूत के मुँह पर लंड रखा और हल्का सा धक्का दिया.. जिससे मेरा लंड का टोपा उसकी चूत में फँस गया।
फिर मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख के उसको ठीक से सैट किया और एक जोरदार झटका मारा.. जिससे मेरा आधा लंड उसकी चूत की गहराइयों में उतर गया।
हालाँकि वो लंड का स्वाद कई बार ले चुकी थी, तब भी वो कई महीनों से चुदी नहीं थी तो उसकी चूत बहुत कसी हुई थी।
वो लौड़े के दर्द के मारे जरा कराहने लगी। उसका दर्द देख कर मैं थोड़ी देर रुक गया.. फिर एक जोरदार धक्का लगाया और इस बार लंड उसकी चूत की गहराइयों में जा पहुँचा। उसकी आखों में आँसू आ गए.. जिसे देख कर मैंने अपना लंड बाहर निकालना चाहा.. पर उसने मुझे रोका और कहा- मैं ठीक हूँ.. मेरी चिंता मत करो और अपना काम चालू रखो। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। जब उसका दर्द कुछ कम हुआ.. तो वो भी अपनी कमर उचकाते हुए मेरा पूरा साथ देने लगी। न जाने वो कितने महीनों से प्यासी थी.. तो उसने अपना पानी जल्दी छोड़ दिया। पर मैं तो इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था।
मैंने उसको पेट के बल लिटा कर पीछे से चोदना चालू किया। उसने एक बार पानी छोड़ दिया था.. फिर भी उसका जोश इतना भी कम नहीं हुआ था। मैं अपने लंड से उसकी धपाधप चुदाई किए जा रहा था और पूरा कमरा हमारी सिसकारियों और ‘फ़चक फ़चक’ की आवाजों से गूँज रहा था। थोड़ी देर बाद उसने फिर से अपना पानी छोड़ दिया। अबकी बार वो सामने से डॉगी स्टाइल में आ गई और मुझसे बोली- लास्ट टाइम मेरी पसंदीदा पोज़िशन में भी करो।
मैंने पीछे से उसकी चुत में अपना लंड पिरोया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।
हमें चुदाई करते काफी देर हो चुकी थी और अब मेरा भी काम होने ही वाला था, मैंने उससे पूछा- कहाँ निकालूँ?
उसने कहा- कई महीनों से बहुत प्यासी है मेरी चूत.. तो अन्दर ही डालो। इसके बाद कुछ तेज धक्कों के बाद मेरा काम हो गया और मैंने एक जोरदार पिचकारी उसकी चूत में मार दी। मेरे वीर्य की गर्मी से वो भी स्खलित होने लगी और उसने मुझे कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया। मैंने भी उसे किस किया और कहा- तुमने जो मुझे आज मजा दिया.. वो मैं कभी नहीं भूलूंगा। फिर मैं उसे अपनी बांहों में लेकर सो गया। इतनी चुदाई के बाद पता नहीं कब मेरी आंख लग गई। दो घंटे के बाद जब मेरी आंख खुली.. तो आंटी भी अभी उठी ही थी।
हम दोनों एक-दूसरे की ओर देखने लगे और फिर बिना वक़्त गंवाए हम वापस किस करने लगे। एक बार फिर वो दौर चला, एक बार फिर वही तूफान आया और एक बार फिर वही मस्ती की बौछार हुई.. जिसमें हम दोनों पूरी तरह से भीग गए ये खेल 4 बार चला और फिर 3दिन तक हम दोनों यही करते रहे। उसके बाद हम हर रोज़ उसके  घर पर मिलते और प्यार का वो खेल खेलते। मगर कुछ दिन बाद उसका पति दूसरे शहर में नोकरी करने लगा और उसे अपने साथ ही लेगया तो दोस्तो
आपको मेरी ये सेक्सी कहानी कैसी लगी.. ज़रूर
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