तीन कमसिन लड़कियों को एक साथ चोदा

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दोस्तों आज मैं आपको अपनी एक सेक्सी कहानी सुनाने जा रहा हूँ। पहले मैं अपने बारे में बता हूँ मेरा नाम रवि है, मुझे चुदाई करना बहुत पसंद है। स्कूल में मैंने कई लड़कियों को चोदा अपने टीचर को चोदा, ट्यूशन वाली दीदी को चोदा अपनी चचेरी बहन को चोदा, आप समझ गए होंगे मैं चुदाई में कितना बढ़िया था और पटाने में माहिर था। पर अब उम्र 25 की हो गई है तो लोकल में जुगाड़ नहीं बन रहा था। 16 से 21 उम्र तब खूब मजे किया पर बाद में तीन साल से सुखाड़ आ गया था मेरी ज़िंदगी में। इसलिए मैंने प्लान बनाया और निकल गया बैंकाक सिर्फ चुदाई करने। लोगो से बहुत सूना था बैंकाक के बारे में वह चुदाई के बारे में लड़कियां कसी हुई माल होती है खूब चुदवाती है।

दिन में एक बजे दिल्ली से फ्लाइट था, देर शाम पहुंच गया। वीजा अराइभल लिए और पहुंच गया बायको होटल, रात में खाना खाने बाहर गया और थोड़ा घुमा फिरा नाईट मार्किट देखा। उस दिन मैंने चुदाई के बारे में नहीं सोचा था थका हुआ था तो सोचा आज आराम करते हैं।

दोस्तों दूसरे दिन दिन के दो बजे होटल से निकला, घुमा फिरा, एक खूबसूरत लड़की से अपना मसाज करवाया एकदम फ्रेश हो गया और शाम को निकल गया एक मार्किट जहा पर चकाचौध था, रोड के दोनों साइड बार था, उस मार्किट में हजारों लड़कियां थी, सभी बार के बारह और बार के अंदर। कही पोल डांसिंग हो रह था तो कही लड़कियां अपने कस्टमर को बुला रही थी।

मैं एक बार में गया जहा पर करीब 100 लड़कियां थी. बियर ली, पिने लगा दो बोतल फिनिश करते करते मैंने 3 लड़की को सेलेक्ट किया। साथ बैठ कर मजे लिए, फिर मैंने बार ओनर को तीनो के बदले पेमेंट दिए क्यों की अगर आप किसी बार से लड़की लेते हो तो पेमेंट करना होता है। फिर मैंने तीनो से रेट फाइनल कर तीनो को लेकर कार से बायको होटल पहुंच गया।

दोस्तों तीनो लड़कियां कमसिन थी, एक लम्बी थी वजन भी सही था, एक छोटी सी थी, एक मिडिल हाइट की. मैं तीनो कद और नैन नक्श और शरीर को अच्छे से चोदना चाहता था ताकि एक बार में ही तीनो तरह के शरीर का मजा ले सकते जैसे आप कभी किसी को चोदते है तब आपको लगता है अगर मोटी होती तो कैसा लगता, पतली होती तो कैसा लगता। जिनको आप चोदते हैं वो अगर मोटी है तो आप दूसरी लड़की पतली हो ऐसा आप सोचेंगे और अगर पतली लड़की से आप सम्बन्ध बना रहे हैं तो आपको लगेगा की काश कोई मोटी लम्बी चौड़ी औरत को चोदता। ऐसा इंसान की फितरत होती है जो होता है पास उससे अलग चाहते हैं. आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

दोस्तों तीनो साइज की लड़कियों के कपडे उतार दिए। पहले तो टीवी चलकर जमकर डांस किया। मैं भी नंगा वो तीनो भी नंगी लंड हिला हिला कर डांस करता था, वो तीनो चूचियां हिला हिला कर डांस करती थी। मैं उन तीनो की भाषा समझता नहीं था और अंग्रेजी टूटी फूटी आती है वो बस इंडियन को समझने के लिए है। उफ्फ्फ्फ़ समझ गए मैं क्या कहना चाह रहा हूँ।

नाचते नाचते कभी किसी के गांड में थप्पड़ मारता तो कभी किसी की निप्पल को मसल देता। कभी किसी की चूत को सहला देता तो कभी किसी को पकड़ पर अपना लौड़ा रगड़ देता। तो तीनो भी खूब मजे ले रही थी और मैं भी खूब मजे ले रहा था. गजब का माजरा था मुझे तब हसी आ रही है। अगर ये वीडियो बना होता था वायरल हो जाता।

फिर क्या था दोस्तों मेरा लौड़ा काबू में नहीं था. मैं एक को उतरकर बेड पर ले गया और दोनों टांगो को ऊपर कर लौड़ा घुसा दिया चूत में और दे दना दन, तभी एक पीछे से आई और मेरे गांड को चाटने लगी और और वही चुदने वाली की चूचियां सहला रही थी। मैं भी बारी बार से सब की चूचियां मसलता किश करता और एक एक कर के तीनों को चोदता ऐसा लग रहा था ग्रुप सेक्स हिट वाला। मादरचोद अंग्रेजी फिल्म को भी फ्लॉप कर दिया था मेरा चुदाई का सिन.

दोस्तों जब खलास होने लगे तब लौड़ा चूत से निकाल लेता और किसी और चीज में बारे में सोचने लगता और ऐसी बात सोचता था की लौड़ा एकदम से डाउन हो जाता था। वो तीनो भी हैरान थी की साले का वीर्य भी नहीं निकला और सिकुड़ गया और बस तुरंत बाद ही फिर से तन जाता था और फिर चोदने लगता था। ऐसा ही चला पूरी रात थोड़े थोड़े देर के अंतराल सुबह करीब तीन बजे मैं बोल गया। अब मेरे में हिम्मत नहीं था। नशा भी उतर गया था और वीर्य भी तीन बार।

हम चारो मिलकर नहाये उन तीनो को गले गया चूचियां मसला और फिर बिदा किया। दोस्तों मेरा ये ट्रिप ज़िंदगी भर नहीं भूलने बाला ट्रिप था। आज भी सोचता हु तो हँसता हु और फिर मूठ मारता है बहुत ही प्यारी खट्टी मीठी यादें है इस चुदाई की। आपको अगर ये कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट करें।

चूत चाटने की मस्ती तीन सहेलियों की कहानी

मेरा नाम कविता है और मैं 25 साल की चुदासी हाउसवाइफ हूँ. मैने अपनी इसी वेबसाइट पे एक और चुदाई स्टोरी ‘मेरी पहली चुदाई की दास्तान’ मे बताया की मैं और मेरी बेस्ट फ्रेंड रेखा बहूत पहले से एक दूसरे की चूत चाटते हैं और मैने 18 की उमर मे पहली बार किसी लड़के से अपनी चूत चुदवाई थी. मेरी शादी को अब एक साल हो चुका है और मेरे पति अभी भी मुझे दिन रात चोदते हैं. आज मैं आपको अपनी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे सुनाते है.

पिछले महीने मेरी और मेरी बेस्ट फ्रेंड रेखा (उसकी भी अब शादी हो चुकी है) हमारी एक और सहेली कशिश की शादी के लिए मुंबई से पुणे आए थे 5 दीनो के लिए. कशिश बहूत ही सीधी लड़की थी और उसे कभी कोई बाय्फ्रेंड भी नहीं था. वो आज तक कभी नहीं चुदी थी और सेक्स के बारे मे ज्यादा जानती भी नहीं थी.

रोज़ कोई ना कोई फंक्शन हो रा था शादी का. दूसरे दिन संगीत था और लड़के वाले आने वाले थे. मैं और रेखा ज्यादा किसी को जानते नहीं थे वहाँ तो हम दोनो अलग बैठ के बातें करने लगे.

जब रेखा की निगाह कशिश के होने वाले पति पे पड़ी तो वो बोली,”कविता ज़रा इसे देख तो. इसकी तो शकल से ही कमीणपान तपाक रहा है. बेचारी कशिश को पहली रात से चोद चोद के पागल कर देगा.”

मैं बोली,”हन कशिश की तो चूत अभी कुँवारी है. ये जानवर तो सुहागरात पे उसकी चूत फाड़ देगा.”

इतना कहके मैं और रेखा हँसने लगे और फिर संगीत का फंक्शन एंजाय करने लगे. देर रात जब फंक्शन ख़तम हो गया तब सब अपने अपने कमरों मे चले गये और मैं, रेखा और आँचल एक कमरे मे थे. हम तीनो ने कपड़े चेंज किए और फिर बातें करने लगे.

मैने कशिश से कहा,”बस 3 दिन और फिर तेरी सुहागरात है. कैसा लग रहा है तुझे?”

कशिश बोली,”दर लग रहा है यार. तुम दोनो को तो पता है की मैं ये तक नहीं जानती की सुहागरात पे क्या क्या होता है.”

रेखा बोली,”अरे पगली दर मत. सुहागरात पे तो जन्नत नसीब होती है. तेरा पति पहले तुझे नंगा करेगा, फिर खुद नंगा होगा और फिर तुझे रात भर चोदेगा.”

कशिश सहें के बोली,”इसी बात से तो दर लग रहा है. मुझे तो नंगी होने मे ही शरम आएगी और पहली चुदाई मे तो दर्द भी होगा ना?”

रेखा बोली,”शरमाने की क्या बात है. जिसके सामने सारी ज़िंदगी नंगा होना है उससे क्या शरम? और उस दर्द के बाद ही तो है असली मज़ा. अपनी कविता से पूछ ज़रा..ये मेडम तो 16 की उमर से चद्वारही हैं.”

रेखा हँसने लगी और कशिश ने हैरान होके पूछी,”कविता क्या ये सच है?”

मैने हँसते हुए कहा,”हन तो उसमे क्या बड़ी बात है? और ये रेखा भी कोई कूम नहीं है. इसने भी तो पहली बार तभी चुडवाया था. और मेरी चूत को लड़कों की लंड के लिए तैयार तो रेखा ने ही किया था.”

मैं और रेखा हँसने लगे और कशिश शॉक होके पूछने लगी,”मतलब तुम दोनो एक दूसरे के साथ भी??”

मैने बोला,”और नहीं तो क्या पगली.. हम दोनो तो 15-16 की उमर से ही एक दूसरे की चूत की आग शांत कर रहे हैं.”

कशिश तो बिल्कुल हैरान रह गई थी हम दोनो की बातों से और कहने लगी,”तुम दोनो कितनी बिगड़ी हुई हो.”

तो रेखा ने कहा,”इसमे बुराई ही क्या है पगली? अपनी सहेली से चूत चाटने की बात ही कुछ और है.”

मैने रेखा की नाईटी के उपर से उसकी चुचि नोचते हुए कहा,”अब कहाँ तुझे मेरी याद आती है? तेरा देवर जो आ गया है.”

कशिश ने पूछी,”इसका देवर आ गया है मतलब?”

तो मैने हँसते हुए उसे बताया,”रेखा का पति इसे रोज़ रोज़ नहीं चोदता है. पर इस रांडी को रोज़ रोज़ छुदास लगती है तो रात मे जब इसका पति सो जाता है तब इसका देवर इसे छत पे ले जाके इसकी चूत बजता है.”

तो रेखा बोली,”हन यार देवर जी पूरी रात ऐसे चोदते हैं की सुबह खड़े भी होते नहीं बनता.”

कशिश बोली,”तुझे शर्म नहीं आती पराए मर्दों के साथ ये सब करने मे?”

तो रेखा ने मेरी तरफ इशारा करते हुए बोला,”इसमे क्या शरमाना? ये कविता भी तो अपने पड़ोसी सूरज से अपनी चूत चुड़वति है कभी कभी.”

मैने हँसते हुए बोला,”मुझे तो कभी कभी ही ज़रूरत पड़ती है जब पति तौर पे जाते हैं तब. वरना तो रोज़ रात मेरे पति मुझे जानवरों की तरह चोदते हैं.”

कशिश ने सहें के पूछी,”और कभी तेरा मान ना हो तो?”

तो मैने कहा,”मान हो ना हो उससे उन्हे क्या फराक पड़ता है…अगर मैं कभी माना कर दूं तो गुस्से मे आके चूत-फाड़ चुदाई करते हैं. पर मज़ा इतना आता है की पूछ मत.”

मैं और रेखा चुदाई की बातों से गरम होने लगे थे. मैने कशिश से कहा,”देख तू सीधे अपने पति से चूड़ेगी तो शरम भी आएगा और दर्द भी होगा. उससे अच्छा आज हम दोनो के साथ थोड़ी प्रॅक्टीस कर ले.”

कशिश ने हैरान होके पूछी,”क्या मतलब?”

तो रेखा ने हँसते हुए कहा,”मतलब ये की नंगी होज़ा और बाकी सब हम दोनो पे छ्चोड़ दे.”

कशिश सहें के बोली,”पागल हो क्या तुम दोनो? मैं ऐसा नहीं करूँगी.”

मैने कहा,”ठीक है जैसी तेरी मर्ज़ी”

मैने रेखा की तरफ देख कर आँख मारी और अपनी नाईटी उतार दी. रेखा भी नंगी हो गई और उसमे मेरी ब्रा और पनटी भी उतार दी. कशिश बड़ी घबराई हुई हम दोनो को देखरही थी. रेखा ने मेरी एक चुचि को नोचते हुए दूसरी चुचि को चूसना चालू कर दिया.

मैने कशिश की तरफ देख का कहा,”देख ले टीन दिन बाद तेरा पति भी यही करेगा.”

रेखा मेरी चुचि चूस्ते हुए मेरी चूत सहालने लगी और मे खुशी से ऊओह आआहह करने लगी. अब कशिश भी थोड़ी थोड़ी मूड मे आरही थी और उसके चेहरे पे दिख रहा था की वो एग्ज़ाइट होरही है.

मैं कशिश के पास गई और उसकी टशहिर्त के अंदर हाथ डाल दिया और उकी चुचि नॉक के कहा,”तेरी चुचि भी तो कड़ी होरही हैं. अब नाटक मत कर और होज़ा नंगी.”

मैने और रेखा ने उसे ननगा कर दिया और वो मुस्कुराने लगी. रेखा उसकी चुचि को नोच नोच के चूसने लगी और कशिश तो जैसे पागल ही हो गई.

कशिश चिल्लाते हुए बोली,”कितना मज़ा आ रहा है रेखा…आहह हााहह हाहहः …चुस्ती रह प्ल्ज़… आआहहः अहाहाा …”

मैने बिने कुछ बोले उसकी चीक्की चूत मे उंगली डाल दी और वो चीखी,”ऊऊउककच…ये क्या कररही है कविता?”

मैने हँसते हुए कहा,”अभी उंगली से चुदवाई ले अपनी चूत नहीं तो टीन बाद अपने पति की लंड से चुदके बेहोश हो जाएगी.”

कशिश को अब मज़ा आने लगा था और वो बोली,”ऐसा है कविता तो अपनी उंगली से चोद डाल मेरी चूत को.”

थोड़ी देर मे कशिश ने झाड़ दिया और फिर वो और रेखा मुझे चूमने लगे. अब कशिश मेरी चुचि चूसरही थी और रेखा मेरी चूत सहलरही थी. मैं दो दिन से नहीं चुदी थी तो इतना मज़ा आरहा था. कशिश मेरी चुचि मज़े से चूसरही थी और अब रेखा ने मेरी चूत चाटना शुरू कर दिया था. आधे घंटे बाद मैने भी झाड़ दिया. अब बारी रेखा की थी. मैने उसकी चुचि छूसी और कशिश ने उसकी चूत कुतिया की तरह चाटना शुरू कर दिया. थोड़ी देर मे उसने भि झाड़ दिया और हम तीनो नंगी ही लेट गयीं.

कशिश ने बोला,”यार कविता ये चुदाई तो बड़ी मस्त चीज़ ही यार.”

मैने कहा,”पागल ये तो कुछ नहीं है. जब पति के लंड से चुदेगी तो देखना कैसे मदहोश होके चुड़वाएगी तू रोज़.”

कशिश हँसते हुए बोली,”पर अभी तो मेरी सुहागरात मे 3 दिन हैं. तब तक रोज़ रात हम तीनो ऐसे ही प्रॅक्टीस करते हैं.”

मैने और रेखा ने हस के कहा,”हन बिल्कुल. हम दोनो को वैसे भी रोज़ रात चुदास लगती है.”

हम तीनो एक दूसरे से चिपक के नंगी ही सो गयीं. और उसकी सुहागरात तक 3 दिन हर रात हम तीनो नंगी होके एक दूसरे की चूत बजाते थे…

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Main aur meri jethani ek dusre ka choot chata aur maza kiya : lesbian Story

मेरा नाम रीना शर्मा है। यह कहानी उस वक्त की है जब मेरी शादी हुए छ: महीने हो चुके थे। मैं तो शादी के पहले से ही चुदने को बेकरार रहती थी। मेरी कई सहेलियों की शादी हो चुकी थी और वे अपनी चुदाई के किस्से मुझे सुनाती रहती थीं।
सभी का कहना था कि जब चूत मैं पहली बार लँड घुसता है तो जो मजा आता है, वह मज़ा कोई लड़की बिना लँड लिये नहीं समझ सकती है। उसके बाद फिर चुदाई का आनंद तो इतना आता है कि कहना ही क्या।
उनका कहना था कि रोज रात को टाँगें फैला और उचक उचक कर लँड लेने में जो मजा आता है वो तो दुनिया की किसी चीज में नहीं है। इसके अलावा, आदमी के ऊपर चढ़ कर चोदने में भी बहुत अच्छा लगता है। यह सब सुन कर मेरा मन भी लँड की कल्पना करता रहता था। अक्सर अकेले में मैं अपनी चूत में उंगली डाल कर अँदर-बाहर करती थी और सोचती थी कि कोई मुझे चोद रहा है। इससे मुझे काफी मजा आता था और कई बार मैं झड़ भी जाती थी।
पर शादी के बाद मेरी चुदवाने की इच्छाओं पर पानी फिर गया। दरअसल मेरे पति का लँड पूरी तरह खड़ा ही नहीं हो पाता था। उन्होंने मुझे बताया कि वह तो खुद ही शादी नहीं करना चाहते थे परन्तु घर वालों के दबाव में आकर मजबूरन शादी करनी पड़ गई। वह मुझसे हमेशा कहते कि मुझे माफ कर दो।
मैं क्या कहती, अकेले चुपचाप रोती रहती थी। शादी होने के बावजूद मैं कुंवारी ही रह गई। उन्होंने मुझे कभी छुआ तक नहीं। वे जानते थे कि उनका खड़ा नहीं होता है और कहीं उनके नजदीक आने से मैं गरम हो गई तो उनके लिये मुझे सम्भालना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए वे अलग कमरे में ही सोते थे।
मेरी चूत लँड का स्वाद चखने के लिये तड़पती रहती थी। मुझसे अच्छी किस्मत तो हमारी पालतू कुतिया टिम्मी की थी। जैसे ही घर से बाहर निकलती, गली के सारे कुत्ते उसके पीछे लग जाते थे। जब देखो एक न एक कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा ही रहता था। साली दिनभर ठुकवाकर आती थी और मुझे ऐसे देखती थी जैसे चिढ़ा रही हो। मैं सोचती कि एक कुत्ता ही पाल लूँ और उसके साथ ट्राई करूँ , पर डर लगता था कि कहीं उसका लँड मेरी चूत में फँस गया तो क्या होगा।
कई बार बैंगन, खीरा वगैरह भी प्रयोग किया पर लँड तो लँड ही होता है। वैसे मज़े के लिये मैं पागल सी होने लगी। रास्ते चलते किसी आदमी को देख कर मैं उसके लँड की कल्पना करने लगती थी, कि कैसा होगा। खड़ा हो कर कैसा दिखता होगा। मेरी चूत में जाएगा तो कैसा लगेगा। मेरी चूत में खुजली मचने लगती और चूत रस से गीली हो जाती। मैं घर पहुँचते ही सारे कपड़े उतार कर, मुठ मार के अपनी वासना की प्यास बुझा लेती थी।
मुझे सपने भी अक्सर चुदाई के ही आते हैं। सपने में बड़े और मोटे लँड वाले आदमी दिखते, जो मेरी चूत को रगड़-रगड़ कर चोदते और अपना लँड मेरी गाँड में भी डालते रहते थे। कुल मिला के स्थिति यह हो गई थी कि मुझे तो सेक्स का भूत चढ़ गया था और मैं चुदने के लिये कुछ भी करने को तैयार थी।
तभी मेरी ससुराल में एक हादसा हो गया। मेरे जेठ जो कि आर्मी में थे, एक आतंकवादी हमले में शहीद हो गये। क्रियाकर्म के बाद मेरी जिठानी सीमा हमारे साथ ही रहने चली आई। उसकी शादी मेरी शादी के एक साल पहले हुई थी, और अभी उसके कोई बच्चा नहीं था। मैं तो वैसे भी अलग कमरे में सोती थी और सीमा को अकेलापन न लगे, यह सोच कर मैंने उसके सोने का इंतज़ाम अपने साथ ही कर दिया।
कुछ दिन बाद की बात है। रात को मेरी नींद खुली तो सीमा के सुबकने की आवाज़ आ रही थी। मैं उसे सांत्वना देने लगी तो वह मुझसे लिपट कर बहुत रोई। कुछ मन हल्का होने पर वह शांत हुई, पर हम एक दूसरे से लिपटे हुए थे। उसके बदन की गरमी और खुशबू से मुझे अजीब सी फीलिंग होने लगी थी। मैंने उसे पुचकारने के बहाने अपने होंठ उसके गाल पर लगा दिए और हल्के हल्के चूमने लगी। सीमा कुछ देर चुप रही फिर एक गहरी साँस लेकर उसने अपना मुँह ऐसे घुमाया कि उसके होंठ मेरे होंठों से सट गए। हम एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे।
फिर सीमा ने मुझे अपनी बाहों मे कस लिया और मेरे होंठों को बेतहाशा चूसने में लग गई। मेरे बदन में सेक्स का नशा छाने लगा था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत भी दूसरी औरत को इस तरह मज़ा दे सकती है। अब सीमा का हाथ मेरे ब्लाउज़ पर पहुँच चुका था और उसने एक सैकेंड में सारे हुक खोल डाले और मेरे मम्मों पर अपना हाथ रख दिया। मुझे तो जैसे करेंट लग गया, क्योंकि मुझे आज तक किसी ने ऐसे नहीं छुआ था। सीमा धीरे धीरे मेरे मम्मे सहलाने लगी। मेरे मम्मे काफी बड़े और दूध की तरह गोरे हैं।
सीमा बोली- कैसा लग रहा है?
मैंने कहा- बहुत अच्छा, आगे बढ़ो न
सीमा मेरे निप्पल अपनी उंगली और अँगूठे से मसलने लगी, फिर अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद सीमा ने मेरा निप्पल अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी, साथ ही मेरे दूसरे मम्मे को हाथ से मसलती जा रही थी। अब तो उत्तेजना मेरी चूत तक पहुँचने लगी थी। मेरी चूत गीली होने लगी। फिर सीमा ने अपना कुर्ता और ब्रा भी उतार फैंके। उसके मम्मे भी भरे पूरे थे और चूचियाँ तनी हुईं थीं। उसने अपनी छातियाँ मेरी छातियों से सटा दीं और फिर अपने होंठ मेरे होंठों से सटा दिये। हमारी चूचियाँ आपस मे टकरा रहीं थीं और हम एक दूसरे से चिपक कर बेतहाशा किस करने लगे। मेरा सारा बदन मस्ती में डूबता जा रहा था।
फिर सीमा ने मेरा हाथ अपनी छाती पर रख लिया और बोली- प्लीज़, दबाओ न !
मैं उसके मम्मों को मसलने और दबाने लगी। सीमा भी आँखे बंद करके मिंजवाने का मज़ा लेने लगी। मैंने भी सीमा का निप्पल अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
तभी सीमा ने कहा- तुम मेरे पीछे से झुक कर मेरे मम्मे चूसो जिससे मैं भी साथ में तुम्हारे मम्मे चूस सकूं।
मैंने तुरंत सीमा की बताई पोज़िशन ले ली और पीछे से उसके मुँह पर झुक कर उसके मम्मे चूसने लगी। इससे मेरे मम्मे उसके मुँह के ऊपर आ गए और वह भी नीचे से मेरे मम्मे चूसने लगी। सच बताऊँ, बहुत मज़ा आने लगा था। काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के मम्मे चूसते रहे। मेरे निप्पल तो इतने कड़े हो गए कि उनमें दर्द होने लगा।
कुछ देर बाद मैं सीमा के बगल में आकर लेट गई। सीमा ने तुरंत मेरा पेटिकोट खोल डाला और मेरी पैंटी नीचे कर के मुझे पूरा नंगा कर दिया। मैं थोड़ा शरमा रही थी और मैंने अपने हाथ अपनी टांगों के बीच चूत पर रख लिये।
सीमा बोली- मत शर्माओ, मैं भी अपने कपड़े उतार देती हूँ।
और उसने भी अपनी सलवार पैंटी नीचे करके उतार दी। उसने अपनी चूत शेव कर रखी थी, जो बिलकुल चिकनी दिख रही थी। वैसे मेरी चूत पर भी बहुत कम बाल थे और मेरे गोरेपन के कारण मेरी चूत बहुत सुंदर थी। मेरी चूत की दोनों फाँकें उभरी पर सटी हुई थीं क्योंकि अभी तक उसमें लँड एक बार भी नहीं घुसा था। सीमा हल्के हल्के मेरी चूत को सहलाने लगी और फिर उसने चूत की दोनों फाँकों को हल्के से फैला दिया। अँदर से मेरी चूत बिल्कुल गुलाबी थी।
ऊपर चूत का दाना और नीचे टाइट छेद देख कर सीमा बोली- हाय, क्या माल है रे !
सीमा ने मेरी चूत को चूम लिया फिर धीरे से अपनी जीभ से चूत के दाने को चाटने लगी। मुझे तो करेंट जैसा लगा और इतना आनंद आने लगा कि क्या बताऊँ। मैं आँखें बंद करके चूत में हो रही सिहरनों का आनन्द लेने लगी। कुछ देर बाद सीमा ने अपनी जीभ से चूत के छेद को चाटने के बाद जीभ को छेद के थोड़ा अँदर घुसा दिया और जीभ अँदर-बाहर करने लगी। साथ ही साथ वह मेरे मम्मे भी मसल रही थी और चूचियों को सहलाते मसलते सीमा ने मुझे पागल कर दिया।
कुछ देर बाद सीमा ने मेरी चूत में अपनी उंगली डाल दी और धीरे धीरे अँदर-बाहर करने लगी। मैंने भी अपनी टाँगें फैला लीं और चूत में हो रही फीलिंग का मज़ा लेने लगी। अब सीमा मेरे होठों को चूसने लगी और साथ ही अपनी दो उँगलियाँ मेरी चूत में घुसेड़ कर तेजी से उंगल-चुदाई करने लगी।
मैंने भी अपने चूतड़ उठा उठा कर उसके हाथ को धक्का मारना शुरू कर दिया। मेरी चूत झनझनाने लगी और पूरे बदन में आनंद की लहरें दौड़ने लगीं। मेरे मुँह से आहें निकलने लगीं और मैं बोलने लगी- आsह, आsह सीsssमाsss, ऐसे ही चोद डालो मुझे।
मुझे लगने लगा कि सीमा औरत नहीं बल्कि कोई मर्द है जो अपने लँड से मुझे चोद रहा है।
सीमा बोली- ले रंडी, चुदवा ले मुझ से, आज तो मैं तेरी चूत फाड़ दूंगी। सीमा की ऐसी गंदी बातें सुन कर मैं वासना के रस में डूब गई। काफी देर इस तरह उंगल-चोदी के बाद मैं चरम सीमा पर पहुँच गई और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मैं चिल्लाई- आऽऽऽह, मम्मीऽऽऽ, मर गईऽऽऽ । सीऽऽऽमाऽऽऽ, फाड़ दे मेरी चूत को।
सीमा गचागच अपनी उँगलियाँ मेरी चूत में अँदर बाहर करती जा रही थी। अब तो मेरे आनंद की सीमा आसमान तक पहुँच चुकी थी। मैंने अपने चूतड़ जोरों से ऊपर किए और अपनी चूत का पानी छोड़ कर हिचकोले मारते हुए झड़ने लगी।
सीमा बोली- शाबास रंडी, झड़ जा जोर से !
मुझे इतना आनंद जीवन में पहले कभी नहीं मिला था। मेरा पूरा बदन पसीने से गीला हो चुका था और इतना जोरदार झड़ने के बाद मैं निढाल हो रही थी। पर सीमा मुझे कहाँ बख्शने वाली थी। उसने अपनी चूत मेरे मुँह से सटा दी और बोली- रीना, मेरी जान, अब मेरी बारी है।
मैं उसकी चूत को चाटने लगी और थोड़ी देर बाद अपनी उंगली भी उसकी चूत में डाल कर सीमा को वही मज़ा देने लगी जो उसने मुझे दिया था। सीमा तो पहले से ही गरम हो चुकी थी और मेरी उंगली की रगड़ से कुछ ही देर बाद वह भी झड़ गई। हम दोनों थक कर चूर हो चुके थे और आराम से नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए। इसके बाद तो यह सिलसिला चल पड़ा और हम दोनों अक्सर आपस में ही अपनी प्यास बुझा लेते थे। सीमा के पास एक बैट्री से चलने वाला वाइब्रेटर भी था जिससे हमने काफी मज़े किए (आगे और पीछे- दोनों तरफ से)
मेरे पति को हमारी इन हरकतों की भनक लग चुकी थी पर लगा कि वे इस बात से खुश ही थे कि मेरा काम घर पर ही चल जा रहा है और कम से कम मैं बाहरी मर्दों से चुदवाने नहीं जाती हूँ और मेरे पेट में किसी गैर का बच्चा आने का डर भी नहीं था। इस तरह कुछ दिनों के लिए तो मेरे सिर से लँड लेने का भूत उतर गया।………

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