दर्द के मारे चूत फटा जा रहा था और अंकल जोर से घुसा रहे थे

वर्जिन सेक्स स्टोरी

मेरा प्यारे दोस्तों आप सभी को सीमा का नमस्कार !!! मैं अठारह साल की लड़की हूँ। आज मैं भी अपनी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर आपको सुनाने जा रही हूँ। ये मेरी पहली कहानी है और ये मेरी पहली चुदाई है। और ये कहानी ज्यादा पुरानी नहीं बल्कि आज दोपहर की है इसलिए आज ही इस कहानी को पोस्ट कर रही हूँ। क्यों की मैं भी चाहती हूँ मेरी कहानी आप तक पहुंचे। इसका बस एक कारण है। क्यों की मैं भी आपकी कहानियां रोजाना नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ती हु। इस वेबसाइट की सभी कहानियां बहुत ही ज्यादा हॉट और सेक्सी है। और जो भी कहानी पोस्ट होती है उसके सबसे ज्यादा महिलाओं के द्वारा भेजी गई होती है। तो आज मेरी बारी है ताकि आपका लौड़ा खड़ा कर सकूँ और महिलाएं पढ़ रही है तो उनकी चूत गीली हो जाये।

अब मैं सीधे कहानी पर आती हूँ। मैं जयपुर की रहने वाली हूँ वैशाली नगर में रहती हूँ। मैं कॉलेज में पढ़ती हूँ। मेरे घर में मेरी माँ और मेरी छोटी बहन रहती है। मैं पढाई के साथ साथ कंप्यूटर का कोर्स कर रही हूँ और ये कोर्स पापा के दोस्त अंकल जी जिनको कहते हैं हम दोनों बहन वही सीखा रहे हैं। मैं रोजाना उनके यहाँ जाती हूँ। उनके घर में उनकी पत्नी है और एक बच्चे है। दोस्तों अंकल बहुत ही अच्छे है मैं उनको बहुत पसंद करती हूँ। और पसंद करने का कारन यह है की मेरे माँ और पापा दोनों पुराने खयालात के हैं।

वो मुझे घर से बाहर बहुत कम निकलने देते हैं। ना तो फ़ोन देते हैं ना इंटरनेट चलाने देते हैं। तो मैं खुद ढूंढती हूँ। जब कोई लड़का नहीं मिलेगा कोई बॉयफ्रैंड नहीं मिलेगा तब तो किसी से भी काम चलाना पडेगा। यही हालात मेरे साथ भी है। मैं अंकल को दिल से ही चाहने लगी हूँ। मैं उनकी याद में हमेशा खोने लगी हूँ। भले वो मेरे से 25 साल बड़े हैं पर करूँ भी तो क्या। शुरुआत में तो अंकल मेरे ऊपर ध्यान नहीं दिया पर धीरे धीरे वो मेरे तरफ आकर्षित होने लगे।

और एक दिन वो मुझे अपनी बाहों में भर लिए जब ऑन्टी घर में नहीं थी। वो मुझे चूमने लगे और मुझे अपनी बाहों में समेटने लगे। ये मेरा पहला एहसास था किस पुरुष के साथ। वो मेरी चूचियों को भी पकड़ कर मसले थे। वो फिर मेरी पेंटी में हाथ घुसाने लगे पर मुझे अच्छा नहीं लगा और मैं अलग हो गई बोली फिर कभी। दोस्तों उसके बाद उस दिन घर चली गई और फिर दूसरे दिन आई पर दूसरे दिन ऑन्टी घर में थी इस वजह से ज्यादा कुछ नहीं हुआ था। पर आज सुबह जैसे ही उनके घर पर गई पता चला ऑन्टी नहीं हैं। वो अजमेर गई हैं। तो घर में वो अकेले थे उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया।

और फिर शुरू हो गया चूमना चाटना, मैं मदहोश हो गई थी क्यों की वो मुझे गरम कर चुके थे। वो मेरी चूचियों को पि रहे थे दबा रहे थे अपना लिप लॉक कर रहे थे मेरी गांड सहला रहे थे और धीरे धीरे करके मेरे सारे कपडे उतार दिए। मैं नंगी हो गई उनकी साँसे तो तेज हो ही गई थी मेरी भी साँसे जोर जोर से चलने लगी थी। मेरे होठ सुख रहे थे मैं बार बार अंगड़ाइयां ले रही थी। मैं खुद को संभाल नहीं पा रही थी मैं बेड पर पैर फैला दी।

उन्होंने मेरे चूच को पीने लगे। मेरे चूत को सहलाने लगे। मेरी चूत पर छोटी छोटी बाल था उसके वो अपने ऊँगली से सहला रहे थे और बिच बिच में चूत पर ऊँगली लगा कर फिर वो अपने मुँह में ले रहे थे। और मजे ले रहे थे। फिर उन्होंने मेरे पैरों को अलग अलग किया और चूत पर अपनी जीभ रखी दोस्तों उनके जीभ रहने से ही मैं बैचेन हो गई ऐसा लगा मेरे पुरे शरीर में करंट दौड़ गया। मैं छटक गई और अब ऐसा लग रहा था जब वो जीभ लगाएंगे वैसे ही मुझे करेंट लगेगा। उन्होंने अब मुझे जोर से पकड़ लिया। और मेरे दोनों पैरों को दबा लिया कस के और जो फिर से चूत पर जीभ रख दिया इस बार मैं कुछ नहीं कर पाई और मैं अपने आप को सौंप दी उनको पांच मिनट में ही शांति हो गई।

अब मजे से चटवाने लगी मेरी सिसकारियां निकल रही थी। मैं अपने होठ को अपने दांतों से दबा रही थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे की मैं जन्नत में हों। दोस्तों उन्होंने मेरे पुरे बदन में अपना जीभ और हाथ फेरे उन्होंने मुझे कामुक बना दिया। मेरी चूत धधक रही थी और पानी छोड़ रही थी। मेरी चूत काफी गीली हो गई थी।

अब उन्होंने अपना मोटा लौड़ा निकाला और मेरी चूत पर लगाया। पर मेरी चूत वर्जिन थी छेद नहीं था। उन्होंने पहले अच्छे से मेरी चूत को देखा और फिर थूक लगाया चूत में भी और लैंड पर भी। और फिर सेट किया चूत के छेद पर, दोस्तों मैं पागल हो रही थी ऐसा लगा रहा था वो बर्णन नहीं कर सक रही हूँ। उन्होंने धीरे से अंदर किया पर गया नहीं उनका लौड़ा मूड रहा थे। वो कोशिस फिर से किये दो तीन बार असफल रहने के बाद। उन्होंने मेरी तंग चूत में पूरा लौड़ा घुसा दिया।

पर दर्द से कराह उठी छटपटा उठी। मैं रोने लगी दर्द के मारे। उन्होंने मेरी चूचियों को सहलाने लगे। और फिर धीरे धीरे से अंदर बाहर करने लगे। मैं दर्द से कराह रही थी क्यों की काफी दर्द हो रहा था। पर अंकल धीरे धीरे करके जोर जोर से घुसाने लगे। अब तो तेज हो गए और जल्दी जल्दी अंदर बाहर। मेरा पूरा बदन हिल रहा था। और वो धक्के पर धक्के दे रहे थे।

पर पांच मिनट बाद ही मैं जोश में आ गई। मैं अब खुल गई थी और अब उनको पकड़ कर चूमने लगी उनके सीने को सहलाने लगी और खुद गांड को गोल गोल घुमा घुमा कर लेने लगी। अब असली मजा आने लगा था। चुदाई का, अब मस्त होकर चुदवाने लगी। वो मुझे दो तीन तरीके से चोदे और मैं भी खूब चुदी और फिर वो झड़ गए मैं तो पहले ही बस हो गई थी।

फिर मैं कपडे पहनी पानी पि और घर आ गई। आकर सो गई थी उठी तो आपको ये कहानियां सूना रही हूँ। चुत में अभी भी दर्द है पर मजे का दर्द है। ये एहसास मैं कभी नहीं भूलूंगी और मैं आपसे अनुरोध करती हूँ आप रोजाना इस वेबसाइट पर आइये और मजे लिए। नॉनवेज स्टोरी से बढ़िया कोई भी वेबसाइट नहीं। जब मैं खुद पढ़ती हु तो आप क्यों नहीं? जल्द ही दूसरी कहानी लेकर आउंगी तब तक बने रहिये रोजाना।

मेरी पहली चुदाई ट्यूशन में सर मुझे कैसे पटाये और चोदे जानिए

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हेलो दोस्तों,  मेरा नाम सिमरन है मैं 18 साल की लड़की हूं . आज मैं आपको अपनी सेक्स कहानी लिखने जा रही हूं  मेरा संबंध एक अंकल से है वह मुझे बहुत पसंद करते हैं और मैं भी उनको बहुत पसंद करती हूं 1 दिन ऐसा हुआ कि मेरा उनसे सेक्स संबंध हो गया तब से आज तक मैं उनसे सप्ताह में एक बार जरूर मिलती हूं और चुदवाती हूं।  आज मैं आपको नॉनवेज story.com पर अपनी पूरी कहानी लिखने जा रही हूं कभी मुझे लगता है कि मेरा की रिश्ता गलत है तो कभी मुझे लगता है कि यह रिश्ता सही है। अगर मैं किसी लड़के से रिश्ता रखती हूं तो हो सकता है वह अपने दोस्तों को बता दे आज ना कल मेरी बात को मेरे रिश्ते को  दूसरों को भी बता दे। पर मुझे लगता है कि अगर अंकल से मैं हमेशा ऐसे ही संबंध बनाकर रखूं तो किसी को भी पता नहीं चलेगा। 

 यह सब कैसे हुआ अब मैं बताने जा रही हूं मैं ओपन स्कूल से  12थ में पढ़ रही हूं मैंने कॉमर्स ले रखा है पर मुझे कुछ ज्यादा समझ नहीं आता है तो 1 दिन मैं और मेरी मम्मी दोनों ही अंकल के घर गए थे और उनसे बात की मेरी मां बोली कि भाई साहब आप मेरी बेटी को मदद कीजिए ताकि वह किसी तरह से 12वीं पास कर जाए आजकल शादी भी करने जाएंगे किसी को बोलेंगे तो कम से कम 12 वि होना जरूरी है। आप ही मदद कर सकते हैं आपको तो पता है मेरे पति को इसके पढ़ाई को लेकर कुछ भी लेना देना नहीं है इसका बड़ा भाई काम में बिजी रहता है और मैं नहीं चाहती कि यह घर से बाहर जाकर ट्यूशन  पढ़ें क्योंकि आजकल जमाना खराब है आजकल तो लड़कियों के पीछे लोग लगे रहते हैं उम्र का भी लिहाज नहीं करते क्या लड़का क्या आदमी जिसको देखो वही औरतों को लड़कियों को घूरते रहते हैं तुम्हें समझती हूं घर से बाहर इसे ना भेजूं।

 जब मेरी मम्मी अंकल से बात कर रही थी तब अंकल का ध्यान मेरे होठों पर मेरे गाल पर और मेरे  बूब्स पर था। मुझे थोड़ा ठीक नहीं लगा इसलिए मैंने अपना दुपट्टा सही करके अपने बूब्स को ढकने लगे तो अंकल ने इशारे में कहा देखो सिमरन कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है अगर तुम चाहती हैं कि मैं पढ़ लिख जाऊं तो कुछ खोना पड़ेगा उस समय उनका ध्यान मेरे दोनों चूचियों पर था।  मैं समझ गई वह क्या कहना चाह रहे थे फिर उन्होंने बात घुमाया और उसी बात को मेरे मम्मी को समझाया कि देखिए भाभी जी इसको मेहनत करनी पड़ेगी घूमना फिरना बंद करना पड़ेगा मोबाइल टीवी से थोड़ा दूर रहना पड़ेगा इसीलिए मैंने कहा कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। मम्मी कुछ समझी मम्मी को लगा अंकल बड़े अच्छे बात बोल रहे हैं और मुझे पता था वह क्या खोने की बात कर रहे थे उनकी निगाहें मेरी तरफ थी.

 दोस्तों मैं भी कम नहीं हूं मैं भी स्वभाव से काफी ज्यादा सेक्सी हूं मैंने कई सारे टिक टॉक वीडियो भी बनाए हैं जिसमें अपने दोनों बड़ी बड़ी चूचियों को दिखाई  पर थोड़ी देर में ही टिक टॉक वाली मेरी वीडियो को डिलीट कर देते हैं मुझे अच्छा लगता है लोगों को अपना शरीर दिखाना अपना प्राइवेट पार्ट दिखाना क्योंकि मेरी है भरपूर जवानी चल रही है मुझे भी चाहिए मेरी पांच दोस्त है पांचों ने अपनी सील तुड़वा चुकी है।  अपनी वर्जिनिटी खो चुकी है मुझे लगा कि अपनी वर्जिनिटी खोने का यह सेफ जगह है। बात फाइनल हो गया उन्होंने सेटरडे और संडे को अपने पास बुलाया। सेटरडे संडे को अंकल जी की पत्नी जिनको मैं आंटी कहती हूं वह नहीं रहती है वह एनजीओ के लिए काम करते हैं इसलिए वह सेटरडे संडे को वही जाती हैं।

मैं सेटरडे को उनके यहां पहुंच गई।  उस दिन मैंने खुले गले का टॉप्स पहने ताकि मेरी दोनों चूचियां  दिखाई दे क्योंकि औरत के पास एक यही कहना होता है जिसको दिखाकर किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है और मनचाहा काम करा सकती है।  मम्मी मुझे गेट पर ही छोड़ कर चली गई। मैं अंदर आ गई अंकल जी ने दरवाजा बंद कर लिया मैं उनके बेडरूम में गई और बेड पर बैठकर ही अपने सारे बुक पहले उनको दिखाने लगी.  उन्होंने बोला मैं पास कराने की गारंटी लेता हूं। मैं तुम्हें पास करवा दूंगा और तुमसे कोई पैसे भी नहीं लूंगा पर कुछ तो चाहिए मुझे तुम्हें सर झुका कर उनको बोल दी जरूर दूंगी अगर आप मुझे 12वीं पास करा देंगे तो मेरा भी इज्जत बन जाएगा अगर किसी चीज से मेरा इज्जत बन रहा है तो थोड़ा सा इज्जत आपको देने में मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी।

 अंकल जी बोले शाबाश तुम समझ गई।  तो फिर अंकल जी बोले फिर कहां से शुरू करें पहले कौन सा काम करें तो मैं बोली फिर भी आप मुझे नहीं पढ़ा पाएंगे जब तक आप मुझे पा नहीं लेते और मैं उनके तरफ देखने लगी वह मेरे करीब आ गए और बोले देखो यह बातें हम दोनों के बीच में रहने चाहिए किसी को भी मत बताना। मैं बोली मैं क्यों बोलूंगी कोई लड़कियां कभी भी किसी को कुछ नहीं बोलती है और खासकर जब अपने से बड़े इंसान से कोई सेक्स संबंध बनाता है तो वह कभी भी किसी से शेयर नहीं करता मैं भी नहीं करूंगी इतना कह कर वो मेरे करीब आ गए मेरे हाथ को पकड़े मेरे तरफ देखने लगे मेरे होंठ  काँप रहे थे। मुझे डर भी लग रहा था कि पता नहीं क्या होगा पर मुझे यह भी पता था किसी एक्सपीरियंस इंसान से पहली बार अगर सेक्स किया जाए तो कोई दिक्कत नहीं आती है.
मैं भी उनको देखने लगी वह भी मुझे देखने लगे और धीरे-धीरे हम दोनों कब करीब आ गए पता ही नहीं चला वह मेरे होंठ को चूसने लगे मैं भी उनके होंठ को चूसने लगी धीरे-धीरे वह मेरी गाल को सहलाने लगे धीरे-धीरे अपना हाथ वह मेरे पीठ पर रखे धीरे-धीरे जांग पर अपना हाथ फेरने लगे।  मेरे पूरे शरीर में करंट आ रहा था ऐसा लग रहा था कि मैं पागल हो जाऊंगी मेरे होंठ सूखने लगे थे और उनकी भी सांसे तेज तेज चलने लगी थी मुझे लिटा दिए मेरे टॉप को उन्होंने खोल दिया ब्रा को हटा दिया जब उन्होंने दोनों बड़े-बड़े गोल-गोल सॉलिड बूब्स को देखा तो उनसे रहा नहीं गया।  वह तुरंत ही मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों से मसलने लगे मुझे थोड़ा थोड़ा दर्द भी हो रहा था और अच्छा भी लग रहा था पर जो भी हो रहा था बहुत अच्छा हो रहा था।

 दोस्तों उसके बाद उन्होंने मेरे गर्दन पर किस करना शुरू किया मेरे बूब्स पर किस करना शुरू किया मेरे निप्पल को दोनों उंगलियों से रगड़ने लगे दबाने लगे आह निकल रही थी मेरे सिसकारियां निकल रही थी मैं परेशान हो रही थी।  मेरी चुत गीली हो गई थी। अब वह मेरे को भी खोल दिए थे मैं पिंक कलर की पहनी थी उसके ऊपर से वह सहलाने लगे मैं बोलने से क्या होगा अंदर जाकर उन्होंने तुरंत ही उतार दे।

 एक दिन पहले ही अपने बाल हटाए थी  गोरा बदन देखकर वो आहें भरने लगे वह बोले कमाल के है तू आज मुझे जन्नत मिलने वाला है कब से तुम्हें सोच कर रात को मुठ मारता हूं।  तो मैं बोली अब आपको यह सब करने की जरूरत नहीं है अब मैं आपको मिल गई हूं सेटरडे संडे इसके लिए हम दोनों एक घंटा रखेंगे पढ़ाई भी जरूरी है और चुदाई भी जरुरी है।  वह बोले ठीक है मैं तुम्हारा समय भी बर्बाद नहीं करूंगा मुझे तुम्हें पास भी कराना है और तुम्हें खुश भी रखना है। सबसे अच्छी बात तो हम दोनों के बीच में यही थी कि हम दोनों एक दूसरे का केयर कर रहे थे एक दूसरे की भावनाओं को समझ रहे थे एक दूसरे को हेल्प पर भी कर रहे थे अगर 1 घंटे सेक्स में ही जाता है और 5 घंटे पढ़ाई में जाती है तो कोई दिक्कत नहीं है।

 उसके बाद उन्होंने मेरे दोनों जांघों के बीच में बैठ गए अपने हाथों से टटोलकर मेरी चूत  को बाहर से देखा फिर फाड़कर अंदर देखा उन्होंने बोला अरे यार तेरा तो सील भी नहीं टूटा हुआ है।  ऐसा नसीब किसी को नहीं होता है जिस उम्र में मैं हूं उस उम्र में किसी लड़की को पहली बार चोदने का मौका मिल जाए तो इससे बड़ी बात कोई नहीं हो सकती है।  उन्होंने तुरंत हीमेरी चूत को चाटने लगे मैं धीरे-धीरे पानी छोड़ने लगी मैं पूरी तरह से गर्म हो गई थी मेरी वासना भड़क गई थी। मैं एक अलग ही एहसास में गोते लगा रही थी मेरे रूम रूम खेल रहे थे होठ मेरा सूख रहा था पर मेरी चुत  गीली हो रही थी।

 उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए मेरे दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखा अपने लंड को मेरी चूत  पर सेट किया और घुसाने लगे। मैं दर्द से तड़पने लगी उन्होंने अपने हाथ को मेरी दोनों बूब्स पर रखकर पहला कर बोला थोड़ा दर्द करेगा फिर मजा आएगा और दर्द भी आज ही रहेगा उसके बाद कोई दर्द नहीं करेगा क्योंकि फिर तेरी सील टूट जाएगी तेरी वर्जिनिटी खत्म हो जाएगी उसके बाद तुम चाहो तो अपनी जिंदगी के मजे लो।  ठीक है ऐसा ही हुआ दोस्तों करीब 5 मिनट तक उन्होंने ट्राई किया उसके बाद अपना पूरा लौड़ा जो करीब ७ इंच कथा मेरी चूत मैं डाल दिया। पहले तो खूब दर्द करने लगा पर चार-पांच झटके के बाद मैं नॉर्मल हो गई अब मुझे मजा आने लगा अब वह मेरे ऊपर लेट गए मैंने अपने दोनों पैर उनके चारों तरफ लपेट ली। और वह धक्के देने शुरू कर दिए मेरे मुंह से आह आह आह आउच  उफ उफ धीरे धीरे धीरे धीरे प्लीज धीरे धीरे दर्द हो रहा है ज्यादा जोर से नहीं आराम आराम से प्लीज कहने लगे पर वह मेरी एक नहीं मान रहे थे वह जोर-जोर से मुझे चोदे जा रहे थे मैं मजे लेने लगे अब मेरे दर्द खत्म हो गए थे।

 दोस्तों उन्होंने एक भूखी शेरनी को जगा दिया था अब मैं उनको नीचे करके उनके ऊपर मैं चल गई उसके बाद फिर उनके जो हाल के उनको ही पता है मैं उनके पूरे जिस्म के साथ खेलने लगी। उनके लौड़े की पकड़कर अपने चूत  मैं ले ली उसके बाद जोर जोर से उछलने लगी अब सटासट उनका लौड़ा मेरी चूत में घुस रहा था। क्यों की मेरी चूत गीली हो गई थी रास्ता साफ़ हो गया था। उसके बाद तो हमने अलग अलग तरीके से जितने भी मैंने तरीके देखे थे कामसूत्र में वह सारे आत्मा डालें पर वह भी ठरकी था।  उसने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी शायद मुझे एक जवान लड़के से यह सब नहीं मिल पाता जो मुझे उस अंकल से मिला। हम दोनों पसीने पसीने हो गए थे और एक साथ ही दोनों ठंडे पानी दोनों करीब आधे घंटे तक लेते रहे फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और फिर बैठ कर बातें करने लगे दोस्तों पिछले शनिवार को तो कोई पढ़ाई नहीं हुई संडे को किसी काम से मुझे बाहर जाना पड़ा तो मैं पढ़ने नहीं गई अब देखें इस सैटरडे को क्या होता है।

मुझे तो चुदाई का चस्का लग गया है। अब मैं रोजाना चुदना चाहती हूँ।  मैं जल्द ही आपको अपनी दूसरी कहानी नॉनवेज story.com पर सुनाने आ रहे हो इसलिए आप रोजाना इस वेबसाइट को विजिट करिए मैं जल्द ही अपने एक और कहानी सुन आऊंगी तब तक के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Student Teacher Story : इंग्लिश की मैडम की चुदाई स्कूल में ही कर दी

Student Teacher Story : सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार। नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी को अपनी स्टोरी सुना रहा हूँ। मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी और कामुक स्टोरी पढकर सभी लड़को के लंड खड़े हो जाएगे और सभी चूतवालियों की गुलाबी चूत अपना रस जरुर छोड़ देगी।

मेरा नाम अपूर्व चौहान है। मैं अभी क्लास 12th में पढ़ता हूँ पर 12 से भी अधिक लड़कियों का मैंने काम लगाया है। मेरे क्लास की बरखा, नूरी, अनन्या और सोनिया जैसी खूबसूरत लड़कियों को मैं चोद चूका हूँ। मेरा कद 6 फुट है और मेरा बदन काफी चुस्त और फिट है। इस वजह से मेरा लंड भी कम तन्दुरुस्त नही है।

आपको बता दूँ की मेरे लंड की लम्बाई 6.5” से भी अधिक है और 2” चौड़ा है। इस वजह से जिस लड़की के साथ मैं चुदाई करता हूँ उसे बहुत मजा आता है। फ्रेंड्स मैंने क्लास की लड़कियों को हमेशा चुदाई वाली नजर से देखा था पर कभी सोचा नही था की अपनी टीचर की चुदाई कर दूंगा। मेरी पुरानी इंग्लिश टीचर मीना मैडम रिसाइन देकर चली गयी थी। उनकी शादी हो गयी थी। इसलिए अब एक नई जिया मैडम पढाने आने लगी थी।

वो शादी शुदा औरत थी और क्लास में साड़ी पहनकर आती थी। वो जादातर क्रीम या गुलाबी कलर की साड़ी पहनती थी। पहली नजर में मैं उनको अपना दिल दे बैठा था। उनका फिगर आलिया भट्ट से कम नही था। वो साड़ी में भी किसी नई लड़की से कम नही लगती थी। उसकी आवाज तो कोयल जैसी थी। मेरी क्लास के सभी लड़के उनकी जवानी पर लट्टू थे। जिया मैडम का फिगर 34 28 30 का था। उनके दूध काफी कसे थे और हमेशा ही स्लीवलेस ब्लाउस पहनती थी जो पीछे से लगभग खुला ही होता था।

साड़ी को कमर पर टाईट बाधती थी जिस वजह से उनके मस्त मस्त मटकते कुल्हे दिख जाते थे। फिर मैं रोज ही जिया मैडम को देखने लगा। उनके यादकर टॉयलेट में जाकर मुठ मारता था। एक दिन जब छुट्टी हुई तो मैं उनके पास कुछ क्वेश्चन पूछने गया। वो टीचर रूम में बैठकर मुझे बताने लगी। तभी उनके साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया और उनके डीप नेक ब्लाउस से उनके खरगोश जैसे सॉफ्ट सॉफ्ट दूध दिखने लगे। उन्होंने आज ब्लैक साड़ी पहन रखी थी। वो मुझे देख ली।

“इस तरफ क्या देख रहे हो??” वो कहने लगी

“कुछ नही मैडम!! कुछ नही” मैंने कहा

कुछ देर बाद मैं उनके बूब्स की तरफ फिर से देखने लगा। अब वो चालू हो गयी। टेबल के नीचे से मेरे पैर पर पैर लगाने लगी। मैं उपर देखने लगा। वो अपने पैर को मेरे पैर से टकराती रही। फिर हम दोनों ही एक दूसरे को ताड़ने लगे। मैंने उनके हाथ को पकड़ लिया और सहलाने लगा। वो मुझे देखे जा रही थी। मुझे चुदास चढ़ गयी। मैंने दरवाजा हल्का सा बंद किया और जाकर उनको पकड़ लिया। होठ पर होठ रखकर किस करने लगा।

“ओह अपूर्व!! “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा सी सी सी”

वो करने लगी

मैंने उनके ब्लैक ब्लाउस के उपर से उनके दूध दबाना चालू कर दिया। मेरा अंदाजा सही था। जिया मैडम के मम्मे 34” से बड़े ही होंगे। वो आराम आराम से दबवाती रही।

“अपूर्व! क्या तुम मुझे हमेशा ही उस नजर से देखते हो??” वो कहने लगी

“हाँ!! मैंने कहा

उसके बाद मैंने कुछ देर उनके दूध दबा दबाकर उनके लिप्स को चूसा। जिया मैडम ने कॉपर कलर लिपस्टिक लगा रखी थी। मैंने चूस डाला।

“रुको अपूर्व!! यहाँ पर सेफ नही है। कही और चलो” वो कहने लगी

“मैडम बगल वाला क्लासरूम खाली है। छुट्टी हो ही चुकी है। उधर कोई नही आयेगा। उधर ही चलते है” मैंने कहा

“सही कह रहे हो” वो कहने लगी

हम दोनों बगल वाले कमरे में चले गये।

“दूध पिलाइये मैडम” मैंने कहा

वो ब्लैक साड़ी में सेक्सी आयटम लग रही थी। साड़ी हटा दी। फिर अपना ब्लैक ब्लाउस खोल डाली। उन्होंने ब्लैक ब्रा को धीरे से जैसे ही उचकाया तनी तनी दोनों सफ़ेद चूचियां बाहर निकल आई।

“ओह्ह गॉड!! क्या चूचे है आपके मैडम” मैंने कहा और दौड़कर पकड़ लिया और हाथ से लेकर मसलने लगा। वो  “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” करने लगी। चिकने दूध मेरे हाथो से फिसल फिसल जा रहे थे। मैं जीभ लगाकर उनकी निपल्स को चाटने लगा। उनके दूध पर काले काले घेरे चमकते हुए कितनी शोभा दे रहे थे। मैं मुंह में लेकर चूसने लगा। जिया मैडम बेच पर लेट गयी थी। वो कामुक आवाजे निकाल रही थी। मैं दोनों दूध को लेकर बारी बारी से चूस रहा था।

“अपूर्व!! तुम अच्छा चूसते हो” वो कहने लगी

मैं हाथ से उनकी निपल्स को दबाने लगा। फिर और चूसा।

“मुझे नंगा मत करना। ऐसे ही कर लो” वो बोली और अपनी ब्लैक साड़ी को नीचे से पकड़ी पेटीकोट के साथ उपर उठा दी। खुद ही अपनी पेंटी उतारी।

“पहली मेरी बुर को मुंह में लेकर पीना। उसके बाद चोदना अपूर्व” वो बताई

“ऐसा ही करूंगा मैडम” मैंने कहा

मेरी नजरे उनकी चूत को तलाशने लगी। जिया मैडम अपने दूधियाँ पैरो को खोल दी। मुझे उनकी गदराई बुर के दर्शन हो गये। हाय!! कितनी सेक्सी बुर थी दोस्तों। मैंने अभी तक कई लड़कियों चोदी थी पर चुदी चुदाई औरत को नही पेला था। मैडम की चूत लाल लाल थी। मैं नाक लगाकर खुसबू लेने लगा। फिर चूसना चालू कर दिया। जीभ लगाकर चाटने लगा। जिया मैडम “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” करने लगी। मैं चाट चाट कर उनको भी मजा देने लगा।

“और चूसो मेरी चूत को!! और…” वो कहने लगी

मैं अच्छे से उनकी योनी को अंदर तक चूसता रहा। खूब मजा लिया। उनकी चूत का दाना भी कम कामुक नही था। मैं उसे भी चूस डाला। उनके पैर और जांघ भी बेहद सेक्सी और सफ़ेद थे। मैं हाथ से सहला सहलाकर किस किया। फिर जिया मैडम की गांड का सेक्सी छेद दिख गया। उसे भी जीभ देकर चूस लिया। वो अब चुदने को तैयार थी।

“अपूर्व!! अब लंड अंदर डाल दो” मैडम बोली

मैं अपनी पेंट खोला। नीचे किया। अंडरवियर को नीचे किया। मेरा नागराज पूरी से मैडम की चूत मारने को तैयार था। तना हुआ था पूरी तरह से। मैं उसे पकड़ा और मुठ देने लगा। फिर जिया मैडम की चूत पर लंड का टोपा रगड़ने लगा। मेरे लंड भी कोई कम खूबसूरत नही था। मैं लंड का सुपाड़ा उनकी चूत पर रखकर जल्दी जल्दी घिसता रहा। वो “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा…..” करती रही।

“क्या सता रहे हो अपूर्व। अब चूत में लंड घुसा दो और प्लीस चोदो मुझे” जिया मैडम कहने लगी

मुझे उनकी बाते बड़ी सेक्सी लगी। मैं उनके पास आया और फिर से उनके होठ पर होठ रखकर चूसने लगा। फिर से उनकी चूची 2 मिनट और मुंह में लेकर चूसा। फिर लंड चूत के छेद पर रखकर हल्का प्यार भरा धक्का मारा और लंड सटाक से अंदर पहुच गया। उसकी बुर बड़ी मांसल थी। मैं धक्का पर धक्का देने लगा। जिया मैडम अपनी दोनों टांग हवा में तान दी। हर लड़की ऐसा करती है। मैं उनकी चूत की तरफ देख देखकर ठोकने लगा। वो “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” बोलकर मस्ती करने लगी।

मैं लंड को अंदर बाहर करके चोदने लगा। वो सब कुछ आराम से करवाती रही। जिस क्लास में हम दोनों चुदाई कर रहे थे वो पूरी तरह से खाली थी। मैं अंदर तक धक्का देने लगा। मेरा 6” मजबूत मोटा लंड अच्छी तरह से उनको ले रहा था। वो खुद को मेरे हवाले कर दी।

मैं जल्दी जल्दी अपनी गांड को हिला हिलाकर उनको ठेलने लगा। मैडम मुंह खोलकर सेक्सी आवाज निकाल रही थी। उनकी आँखे किसी नशेड़ी औरत की तरह दिख रही थी। कभी उनकी आँखे खुलती तो कभी बंद हो जाती थी। मैं चिपककर उनका काम लगाये हुए था।

“जल्दी जल्दी करो और तेज अपूर्व!!” वो हाथ से अपनी सेक्सी बुर को उपर से मलते हुए बोली

“बहनचोद!! साली कुतिया!! और पैर खोल और अच्छे से चुदवा” मैंने कहा

जिया मैडम और पैर खोल दी। मैं फटाक फटाक तेज गति से उनको ठोकता रहा। मेरा लंड उनकी चूत पर तेजी से चोट करने लगा जैसे कोई लोहार अपने हथौड़े से लोहे पर चोट करता है। मैं अपने मन को कंट्रोल करके चोद रहा था। मैं झड़ना नही चाहता था। मैं जिया मैडम को फुल क्लाइमेक्स पर लेकर जाना चाहता था। चोदते चोदते मुझे लगा की झड़ जाऊँगा। मैंने लंड उनकी बुर से बाहर खींच लिया।

“क्या हुआ अपूर्व?? झड़ गये क्या??” वो अपने सर को उठाकर मेरे लंड की तरफ देखने लगी

“नही!! कुछ सेकंड का ब्रेक लेते है। अगर बिना रुके करता तो झड़ जाता। अब मैडम आप मेरा लंड चूस दो” मैंने कहा और मैं बेंच पर लेट गया

जिया मैडम मेरे 6” लंड को पकड़ ली और हिलाने लगी। उनको लंड काफी मोटा लग रहा था। फिर हिलाते हिलाते उसे चूसने लगी। वो दांत गड़ाकर शरारत के साथ लौड़े को काट भी लेती थी। वो मौसम बनाकर चूस रही थी। “आआआअहह…..ऊऊऊऊओह…..ईईईईई…. माँआआ…” मैं कर रहा था बेंच पर लेटकर। वो मेरे अंडकोष को पकड़कर दबा दबाकर चूस रही थी, किस कर रही थी। मेरे मोटे जूसी लंड को मुठ दे देकर चूस डाली। फिर अपनी दोनों 34” की कामुक चिकनी चूचियों के बीच लौड़ा रखी और चूची के बीच में मेरे लंड महाराज को दबा ली और बूब्स को चुदवाने लगी। दोनों चूची को पकड़कर उपर नीचे करके मजा देती थी। मुझे उनकी इस हरकत से बहुत अच्छा लग रहा था। उनके दूध का अहसास बहुत ही कोमल था। काफी देर तक वो अपने मस्त मस्त बूब्स से मेरे लंड से पकड़कर उपर नीचे करती रही।

“लेट जाइये मैडम” मैंने कहा

वो फिर से लेट गयी। वो पैर खोल दी। मैंने लंड को पकड़कर चूत के छेद में फिर से घुसा दिया। जल्दी जल्दी फिर से उनकी चुदाई कर डाली। फिर मैडम के मुंह पर लाकर माल झाड़ दिया। फिर हम दोनों जल्दी से कपड़े सही करके स्कूल से बाहर चले आये। अब हर वीक जिया मैडम चुदवा लेती है। स्टोरी कैसी लगी जरुर बताये।

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जवान शिष्या को चोदने की ख्वाहिश आखिर पूरी हुई

सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार। नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी को अपनी स्टोरी सुना रहा हूँ। मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी और कामुक स्टोरी पढकर सभी लड़को के लंड खड़े हो जाएगे और सभी चूतवालियों की गुलाबी चूत अपना रस जरुर छोड़ देगी।

मेरा नाम विपुल झा है। मैं बिहार के पटना शहर में रहता हूँ। मेरा खुद का कोचिंग सेंटर है। मैं स्वभाव से बहुत सेक्सी मर्द हूँ। मेरी शादी हो चुकी है, बच्चे भी है। रोज अपनी बीबी की चूत बजाता हूँ पर इसके बादजूद भी नई और कमसिन लौंडिया के मस्त मस्त मम्मे पीने को सदैव तत्पर रहता हूँ। कोई लड़की हल्का सा लाइन दे तो उसे चोद ही लेता हूँ। मेरी इसी आदत की वजह से मुझे कई बार जेल भी जाना पड़ा है और पुलिस वालो को पैसे देकर छूटा हूँ।

पर मैं अपनी आदत से बाज नही आता हूँ। मेरे अंदर उपर वाले ने पता नही कौन सा सॉफ्टवेयर डाला है की कोई खूबसूरत जवान कन्या मुझे बहन, बेटी बाद में लगती है, पहले तो महबूबा ही दिखती है। फ्रेंड्स, किस्मत भी मेरा पूरा साथ देती है और हर महिना किसी नई चूत का जुगाड़ हो ही जाता है। मेरे कोचिंग सेंटर में अनेक तरह के कोर्स चलते है। कई बार विधवा, तलाकशुदा औरते भी कोर्स करने आती है जो खुद ही मेरे को लाइन देने लग जाती है। ऐसे में तो 4, 5 दिन में ही चूत मिल जाती है। कोचिंग सेंटर में ही उन लेडीस को चोद लेता हूँ।

अभी जल्दी जिस शिष्या को पटाकर मैंने उसकी चूत बजाई है वो स्टोरी आप लोगो को अब सुनाता हूँ। 4 महीने पहले नीरू सिंह ने मेरी कोचिंग में एडमीशन लिया था। वो लड़की 19 साल की थी। रंग ह्लका सा सावला था। कद 5 फुट था। इकहरे बदन की लड़की थी वो। जब पहली बार मैंने उसे देखा तो मुझे कोई ख़ास जबर्दस्त माल नही लगी। मैंने पढ़ाना शुरू कर दिया। पर धीरे धीरे नीरू की तरफ आकर्षित होने लगा। “सर!! ये पॉइंट समझ नही आया!!…. सर ये आंसर कैसे आया?? सर !! मुझे लगता है इसका आंसर ये होना चाहिए” इस तरह से वो धीरे धीरे सवाल पर सवाल पूछने लगी।

अब मैं उसे पहचानने लगा। मुझे पता चल गया की ये लड़की तो एक एक बात का मतलब पूछती है। दूसरे चेले इतना अधिक ध्यान नही देते थे। कुछ चैप्टर के कुछ पॉइंट या कांसेप्ट अगर मुझे सही सही पता नही होता था तो मैं वैसे ही समझा देता था। अंदर गहराई में जाकर नही बताता था। पर अब ऐसा नही चल पा रहा था। अब मुझे रात में खुद भी एक बार पढना होता था जिससे नीरू के सवालों का जवाब दे सकूं। इस तरह रात में जरुर उसके बारे में सोचता था। फ्रेंड्स धीरे धीरे वो मुझे पसंद आने लगी।

अब जब क्लास में होता तो नजर सिर्फ नीरू पर होती। समय के साद उसका हँसना, बात करने का तरीका, उसका नाख़ून चबाना, मेरा उसको टोकना, उसका पेन को मुंह में लेना सब मुझे अच्छा लगने लगा। नीरू कोई बहुत जबर्दस्त माल नही थी जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता हो। मेरे कोचिंग में ऐसी कई लड़कियाँ थी जो मस्त कसी जींस टी शर्ट में आती थी। उनको देखकर तो मेरा लंड क्लास में ही टनक जाता था। चुदाई करने की तीव्र ज्वाला मेरे अंदर बहने लग जाती थी। पर नीरू के साथ ऐसा नही था। उसका फिगर कोई बहुत जादा मस्त नही था। बस देखने में ठीक ठाक और एवरेज लड़की थी वो। पर फ्रेंड्स, जैसे जैसे महीने बीतते गये उससे इश्क सा हो गया। और उसको चोदने खाने की इक्षा बहुत बढ़ गयी। अब मैं आये दिन उसे किसी न किसी बहाने से हाथ लगाने लगा। नीरू समझ गयी की मैं उसे पसंद करता हूँ। फिर हमारी मीटिंग हुई। मैं उसे काफी पर ले गया।

“क्या है सर?? बोलिए आप मुससे अकेले में क्या बात करना चाहते है??” वो बड़ी बड़ी आंखे करके बोली

उस दिन उसने टी शर्ट जींस पहनी हुई थी। मेरी नजर बाद बाद उसके दूध पर जा रही थे। कोई बहुत बड़ी बड़ी पुस्ट रसीली चूचियां नही थी उसके पास। बस फ्रेंड्स समझ लीजिये की छोटे छोटे निम्बू थे। उसके दूध का साइज 30 इंच था जो बाहर से देखने पर ही पता चल जाता था। उसका पूरा फिगर 30 26 32 का था। पर अब वो जैसी भी थी मुझे अच्छी लगन लगी थी।

“नीरू!! मैं ये बात बहुत दिन से बोलना चाहता हूँ। I love you यार!!” मैं बोला

वो काफी नाराज हो गयी।

“आप मुझे चोदना चाहता है ना?? ऐसा ही है??” वो बोली और आँखे तरेरने लगे

गुसैल मूड में मुझे और मस्त माल लग रही थी।

“कैसी बात कर रही हो तुम?? इसमें चोदने पेलने वाले बात कैसे आ गयी। तुमसे मैं प्यार करता हूँ। कोई मजाक नही” मैं भी बोला

“नही मैं सब समझती हूँ!! सारे मर्द ऐसे ही होते है। 3 4 बार आप मुझे चोद लोगे जो आपकी हवस पूरी हो जाएगी। फिर आप मुझे पलट कर नही देखोगे” वो बोली और नाक फुफकारने लगी।

मुझे गुस्सा चढ़ गया। मैंने उसी वक्त रोड पर ही उसे पकड़ लिया और उसके मुंह पर मुंह रखकर जबरदस्ती किस करने लगा। लोग रोड से गुजर रहे थे। शाम का वक्त था। बस, मोटर, बाइक वाले चल रहे थे पर मैंने किसी को नही देखा और उससे बोलने ही नही दिया। 2 मिनट रोड पर खड़े खड़े उसके होठ चूस डाले। आह उसकी सांसो को वो सुगन्ध मेरी रुंह में बस गयी। तब जाकर अपना मुंह हटाया उसके मुंह से।

“चल!! मेरे घर चल। अभी ब्लेड से अपना हाथ काट कर तेरा नाम अपनी कलाई पर लिखता हूँ। वरना तुमको कभी विश्वास नही होगा की मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ” मैं बोला और जबरदस्ती उसका हाथ पकड़कर उसे घसीटने लगा। तब जाकर उसे बिलीव हुआ की उससे सच्चा प्यार करता हूँ।

“ओके सर!! मैं मान गयी” वो बोली

फिर घर चली गयी। इस तरह हम लोगो की सेटिंग हो गयी। फिर अपना व्हाट्सअप नम्बर उसने दे दिया। हमारी चैटिंग शुरू हो गयी। कुछ दिनों बाद 26 जनवरी थी और अगले दिन संडे था। इसलिए 2 दिन मेरा कोचिंग सेंटर बंद था।

“जान!! डेट पर चले??” मैंने पूछा

“पर कहाँ चलोगे??” नीरू मीठी आवाज में बोली

“किसी रेस्टोरेंट चलते है…फिर होटल में कमरा ले लेंगे” मैं बोला

नीरू भी समझ गयी की हम दोनों के बीच जो आग लगी है वो कुछ न कुछ काण्ड करवा देगी। अगले दिन शाम को वो मेरे घर के पास वाले बस स्टैंड पर आ गयी। रोज तो जादा मेकप नही करती थी पर आज बिलकुल छमिया बनकर आई थी। गुलाबी सलवार कमीज में देसी माल दिख रही थी। पैरो में उसने पार्टी वियर सैंडल पहनी थी। उसे देखता ही उसके लिप्स चूसने का दिल करने लगा। पर बस स्टैंड पर कैसे चुम्मा लेता। बड़ा कंट्रोल किया खुद को। वो बाइक पर बैठ गयी। जैसे ही हम लोग दूर निकल गये वो मुझसे अच्छे से चिपक गयी। बड़ा मजा आया मुझे।

फिर उसे एक चाईनीज रेसटोरेंट ले गया। डिनर किया। फिर सीधा एक होटल में ले गया और कमरे ले लिया। इस वाले होटल में प्रेमी जोड़ो को आराम से कमरा मिल जाता था। किसी तरह का कोई आई डी नही देना होता था। मैं पैसे चुकाकर कमरे में ले गया। अंदर जाते ही हम दोनों लिपट गये। कुछ कहने समझने की जरूरत नही थी। आज काण्ड होने वाला था। हमारा किस चालू हो गया। नीरू मुझसे कद में काफी छोटी थी। मैं 5.6” का था और वो सिर्फ 5 फुट लम्बी थी, पर आज देसी कपड़े पहने थी। मैंने उसके सीने से गुलाबी दुप्पटे को पकड़कर हटा दिया और अब उसके छोटे छोटे नीबू मुझे दिख रहे थे। उसे बड़े ही जोश से खुद से चिपका लिया।

वो भी पूरा साथ दे रही थी। उसके गाल पर दोनों साईड मैंने पप्पी ली और फिर उसके होठो को चूसने लगा। फिर उसकी सांसो की सुगंध को खूब लिया, खूब सूंघा। नीरू ने लिप्स पर हल्की लिपस्टिक लगा रखी थी। मैंने उसके लिप्स को मुंह में लेकर खूब चूसा। बड़ा गरमा गर्म वाला चुम्बन था वो। उसके बाद हम दोनों का चुदाई का मौसम हो गया। मैं उसे बेड पर ले गया और फिर हम प्यार करने लगे। मैंने ही उसके हाथ को उपर करके उसकी गुलाबी कमीज को उतरवा दिया। छोटे दूध होने के कारण वो ब्रा नही पहने थी। उसे जरूरत ही नही थी।

मैंने समीज के उपर से उसके दोनों निम्बू पर हाथ लगाना शुरू किया। नीरू “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ… आ कितना मजा आ रहा है!!..उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” वो करने लगी। मैंने कुछ देर उपर से उसके निम्बू का रस निकाला। फिर चुदास की आग और जादा भड़क गयी।

“समीज उतारो नीरू!!” मैंने कहा

फिर उसने खुद ही अपना हाथ उपर करके समीज उतारी। मेरी आँखे कबसे उसको अंदर से बिना कपड़ो के देखने को व्याकुल थी। कैसी होगी उसकी इकहरी बदन देह, उसकी नंगी मुलायम चूचियां, उसका पेट, पीठ ,क्या उसके दूध मुलायम होंगे। बिना कपड़ो के वो कैसे दिखती होगी। मेरे दिल में हजारो सवाल थे। जिनका जवाब मिलने वाला था। आखिर नीरू ने अपनी सफ़ेद समीज उतारकर खुद को बेपर्दा किया। अब उसकी नग्न छोटी छोटी चूचियों के दर्शन हुए। छोटे छोटे दूध थे उसके, कोमल और बड़े ही मुलायम। कुछ देर तो मैं देख देखकर मजा लेता रहा। फिर जल्दी से उसपर हाथ रख दिए। दोनों हाथो से दोनों निम्बू को दबाने लगा और नीरू पर अच्छे से लेट गया। जैसे ही निम्बू को मसलना शुरु किया वो “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई…उ उ उ उ उ…” करने लगी। अपना मुंह खोलकर आहे लेने लगी।

“आराम से दबाइए सर!!” वो कहने लगी

मैं कहाँ सब्र लेने वाला था। मैं अपनी वासना की हवस को मिटाने लगा। उसके दोनों 30” की नोकदार निम्बू को दबाने लगा। उसका आहे भरने और दर्द से आँखे बंद करना मुझे बड़ा मजेदार दिख रहा था। फिर उसकी चूची को मुंह में ले लिया और चूसने लगा। नीरू की इकहरी हल्की पर चोदने लायक देह की खुशबू मेरे दोनों नथुनों में समा गयी। मेरा लंड उसकी चूत मारने को मरा जा रहा था। पर सब कुछ आराम से मैं करना चाहता था। उसे धीरे धीरे खाउंगा। जल्दी क्या है। ये सोचकर उसके निम्बू को मुंह में लेकर चूसने लगा। वो फिर से “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई..अई..अई…..अई..मम्मी….” करने लगी। उसके दूध इतने बड़े थे की पूरे के पूरे मेरे मुंह में समा जाते थे। वैसे ही 30” की चूचियां तो बहुत small होती है। मैं मुंह चला चलकर इस फ्रेश अनचुदी माल का शहद चूसने लगा।

“धीरे!! धीरे चूसिए सर.. अई..अई…..” वो दर्द में कराहकर बोली

मैंने उसकी बायीं चूची पूरे 10 मिनट चूसी और दांतों से कुचल दी। मेरी धधकती वासना उसके पीछे काम कर रही थी। आज वो मैं ही था जो प्रथम बार नीरू के गुप्तांगो से खेल रहा था। वो मुझे खेलने दे रही थी। उसे भी इसमें बड़ा आनन्द आ रहा था। फिर मैंने उसकी बायीं चूची को रिहा किया और दाई वाली को मुंह में लेकर चूसने लगा। फिर से वो दोनों आँखे बंदकर सिसकने लगी। उसे भी चूस डाला। फिर नीरू को पकड़कर बेड पर लोटने लगा और वो उपर आ गयी और मैं नीचे। वो मेरे सिने पर थी। हम दोनों फिर से किस करने लगे। मुझे नही पता चल रहा था की वो मेरा लंड चूसेगी की नही। क्यूंकि कोई लड़की जो कुवारी हो और अनचुदी हो, वो शुरू शुरू में लंड चूसने से तुरंत ही इनकार कर देती है।

“जानम!! लंड मुंह में लोगी??” मैंने धीरे से कहा

“नही सर!!” वो हल्की आवाज में बोली

मैंने कोई जोर जबरदस्ती नही की। उसके बाद अपनी शर्ट पेंट मैंने उतारा। फिर अंडरवियर उतार लिया। मेरा लंड 10” का लोहे जैसा दिख रहा था। मासूम नीरू की नजर मेरे लंड पर पड़ी। उसने तुरंत ही नजरे फेर ली। फिर तिरझी नजरो से चुपके चुपके लंड को देखने लगी। शायद ये उसका प्रथम दर्शन होगा किसी मर्द के ताकतवर शक्तिशाली लंड का। उसे फिर से लिटा दिया। अपने हाथो से उसकी सलवार का नारा खोला। हम लोगो के बीच किसी तरह की बात नही हो रही थी। अजीब सा सन्नाटा था। इस सन्नाटे को अब नीरू की चुदने की सिसकरियाँ ही तोड़ेंगी, मैंने मन में सोचा।

सलवार उतार दी। उसकी पेंटी चूत के मधुर मीठे रस से पचपचा गयी थी। मैं चोदने को व्याकुल रो रहा था। उसकी पेंटी को जल्दी ही निकाल दिया। नीरू ने दोनों पैर बंद कर लिए। चूत को हाथ से छुपाने लगी। मैंने कोई जोर जबरदस्ती नही की। उपर से जो बुर दिख रही थी उससे ही काम चलाने लगा। नीरू की चूत का रंग साफ था। हल्की हल्की रोयेदार झांटे थी उसकी बुर पर। सायद कुछ दिन पहले उसने बाल साफ़ थे। मैंने उपर से चूत को चाटना शुरू कर दिया। अपनी जुबान को निकालकर उपर से चूत चाटने लगा। 4, 5 मिनट में वो गर्माने लगी और उसे फिर खुद ही उसे अपने पैर खोलने पड़े।

अब पूरा चूत का प्लेटफोर्म मेरा सामने था। चूत के छेद से रस निकलता दिखा। मैं जीभ लगा लगाकर बुर चटाई करने लगा। नीरू “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..”  बोलते हुए मुझे रोकने का असफल प्रयास करने लगी। मैंने कसके उसकी जांघो को पकड़ लिया जिससे वो दुराबा से बंद न कर सके। और मैंने उसकी चूत पर पूरी तरह से कब्जा बना लिया। फिर आराम से चाटने लगा। उसकी कराहे और आहे मुझे पागल बना रही थी। दोस्तों मैं सम्भोग नही कर रहा था पर उसके बराबर का मजा मुझे मिल रहा था। उसकी गुलाबी चूत को चाट चाटकर मैंने बुरा हाल कर दिया।

वो कुछ नही कर सकी। अपने पैरो को बंद करना चाहती थी पर मैंने उसकी दोनों जांघो को कसके जकड़ रखा था। खूब चाटा चूसा उसकी चुद्दी को। फिर सोचा की लाओ चेक कर लूँ की कुवारी है की नही। उसकी चुद्दी को ऊँगली से खोलकर देखा तो सील बंद माल थी। मेरा अभिमान इससे दोगुना हो गया। उसकी चूत की बंद झिल्ली को चाटा 10 मिनट तक। फिर दोनों पैर को खोलवा दिया। मेरा लंड तो करीब 1 घंटे से बह रहा था।

“जान हल्का दर्द होगा। सह लेना” मैंने कहा

लंड चूत पर रखा और हल्का सा धक्का मारा। सीलबंद झिल्ली फट गयी। खून बहने लगा। लंड 3” अंदर समा गया। फिर कुछ सेंकंड बाद फिर से धक्का मारा। इस बाद मेरा 10” लंड किसी सबमरीन (पनडुब्बी) की तरह उसकी योनी में फक्क की आवाज करके अंदर उतर गया। आखिर मेरा सपना पूरा हुआ। नीरू की माँ चुद गयी। दर्द से उसकी गांड फटी जा रही थी। धीरे धीरे मैं उसको लेने लगा। वो अकड़ी जा रही थी। मैं आराम आराम से लंड को उसकी योनी में दौडाने लगा। शुरू में उसे दर्द हुआ। धीरे धीरे उसकी चूत रवां हो गयी।

अब जल्दी जल्दी उसे पेलने लगा। वो बार बार अपनी कमर उपर उठाने लगी। मुझे बड़ा आनन्द आने लगा ये सब देखकर। “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ….आराम से चोदिये सर!!.. सी सी सी… बहुत दुःख रहा है… ओ हो हो….” वो आँखे बंदकर बोले जा रही थी। मुझे उसकी हालत बड़ी सेक्सी लग रही थी। मैं अब उसकी पतली 26” की कमर को दोनों हाथ से पकड़कर उसे पेलने लगा। जल्दी जल्दी अपने लोहे जैसे औजार को उसकी चुद्दी में दौड़ा रहा था। उसकी बुर के दर्शन करते हुए उसे खा रहा था। फिर उसे भी मजा आने लगा। उसे मैंने पहली बार में 12 13 मिनट चोदा, फिर झड़ गया। उसके बाद काफी देर हम लोग निर्वस्त्र लिपटकर लेटे रहे। दोस्तों इस तरह से मैंने अपनी शिष्या नीरू की चूत का शिकार किया। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।

31 दिसम्बर के दिन अपनी जवान सेक्सी टीचर को चोदा

New Year Sex : हाय फ्रेंड्स, आप लोगो का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में स्वागत है। मैं रोज ही इसकी सेक्सी स्टोरीज पढ़ता हूँ और आनन्द लेता हूँ। आप लोगो को भी यहाँ की सेक्सी और रसीली स्टोरीज पढने को बोलूंगा। आज फर्स्ट टाइम आप लोगो को अपनी कामुक स्टोरी सुना रहा हूँ। कई दिन से मैं लिखने की सोच रहा था। अगर मेरे से कोई गलती हो तो माफ़ कर देना।
मेरा नाम रणविजय मिश्र है। मैं 25 साल का जवान मर्द हूँ और बहुत हैडसम दिखता हूँ। जींस और ब्लैक लेदर जेकेट पहनकर जब काला चश्मा लगाकर मैं अपनी बुलेट पर निकलता हूँ तो कितनी लड़कियाँ मेरी तरफ मुड़ मुड़ कर देखती है। दोस्तों आपको बता दूँ की मेरी जवानी और खूबसूरती की वजह से जवान और सेक्सी लड़कियाँ मुझसे पट जाती है और खुद ही चुदवा लेती है। आपको अपने लौड़े के बारे में बता देता हूँ। मेरा लंड 10” लम्बा है और 2” मोटा है। जिस लड़की की चुदाई कर देता हूँ वो बार बार इस मोटे लंड को मांगती है। अब स्टोरी पर जाता हूँ। मैं अपनी फेमिली के साथ नॉएडा में रहता हूँ। मेरे डैडी मुझे एक डॉक्टर बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने मेरा नाम नॉएडा की एक बड़ी मेडिकल कोचिंग में लिखवा दिया। उस नामी मशहूर कोचिंग में सबसे जादा बच्चे बड़े और अमीर घर के थे। मैं भी एक अमीर बाप की औलाद था। मेरे डैडी कितने भी हजार रूपए मेरी पार्टीज के लिए दे देते थे। हमारी कोचिंग में कुछ दिनों बाद एक नई और सेक्सी टीचर तारा मैडम आ गयी। वो बला की खुबसुरत औरत थी और वो कुवारी थी।
जींस टॉप पहनकर वो क्लास में आती थी और उनके क्या मस्त मस्त दूध थे दोस्तों। चेहरा उनका लम्बा था और क्या सेक्सी हुस्न की मलिका दिखती थी। तारा मैडम को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और उनको चोदने की इक्षा मेरे दिल में बैठ गयी। हमारी क्लास 2 घंटे की होती थी शाम को 5 से 7, उसके बाद क्लास खत्म हो जाती थी। मैंने अब क्लास के बाद अपने प्रश्न पूछना शुरू कर दिया। इसके पीछे मेरा मकसद उनकी चूत बजाना था। जब मुझे सब्जेक्ट में कोई प्रॉब्लम नही होती फिर भी मैं उसके पास चला जाता और झूठ मूठ पर सवाल पूछने लग जाता। कई बार प्रश्न पूछते पूछते तारा मैडम का हाथ मेरे हाथ से टच कर जाता तो कितना मजा आता। वो तो पढ़ाई में लगी रहती पर मैं उनके टॉप और टी शर्ट से उसके मस्त मस्त 34” के दूध देखता तो बड़ा आनन्द आता। एक दिन वो सवाल बता रही थी और मैं उनके संतरे की तरह देख रहा था।
“रणविजय!! कुछ दिन से देख रही हूँ की तुम्हारा ध्यान पढने में नही रहता है। तुम रोज क्लास के बाद मुझसे सवाल पूछने आते हो पर किताब की तरफ नही देखते हो। हो क्या रहा है आजकल???” तारा मैडम पूछने लगी
“मैडम!! मैं तो आपके करीब आना चाहता हूँ। आप मुझे अच्छी लगती हो। मैं आपको पसंद करता हूँ। सब जगह सिर्फ आप ही आप दिखती हो मुझे” मैंने कहा तुरन्त ही मेरा गाल पर एक चांटा जोर का पड़ा।
“तुम सब आमीर बापों की औलादे बिगड़ी होती है। तुम पढाई करने नही आते हो और मुझे ताड़ने आते हो। मैं समझती थी तुम अच्छे लडके होगे पर तुम तो बाकी की तरह अमीर बाप की बिगड़ी औलाद हो!” तारा मैडम बोली और कुर्सी से उठ गयी। अपना पर्स और किताबे लेकर चलती बनी।
उसके कुछ दिन मैं कोचिंग क्लास नही गया। फिर एक दिन मेट्रो ट्रेन में मैडम से मुलाक़ात हो गयी। मैंने उनको हंसकर गुड मोर्निंग बोला। वो क्लास में आने के लिए कहने लगी। मैं उनके पास ही बैठ गया और उन्होंने बताया की वो अभी पूरी तरह से कुवारी है। जब हम दोनों कनाट प्लेस पर उतरने लगे तो एक चोर मैडम का पर्स छीनकर भागने लगा।
“रणविजय!!! वो चोर मेरा पर्स छीनकर भाग रहा है. उसे पकड़ो!!!” तारा मैडम बोली उस दिन भी वो टी शर्ट, जैकेट और जींस में थी और उसकी गांड का साइज 36 था। जींस पर से उनके बड़े बड़े मटकते कुल्हे और चूतड़ मुझे दिख रहे थे। मैं दौड़ा और मैंने उस चोर को दबोच लिया। उसे 2 चांटे मारे और तारा मैडम का पर्स ले आया।
“लीजिये मैडम!! आपका पर्स!!” मैंने देते हुआ कहा
“थैंक्स यू सो मच रणविजय!! इस पर्स में मेरा मोबाइल फोन, चाभियाँ और सभी ID थी। अगर ये खो जाता तो मुझे बहुत दिक्कत होती” तारा मैडम बोली दोस्तों उनके बाल खुले हुए थे और उनमे शैम्पू किया हुआ था। तारा मैडम हमेशा खुले बालो में रहती थी और हवा में उनके बाल उड़ते थे तो कितनी सेक्सी दिखती थी। उस दिन के बाद से मैंने फिर से कोचिंग ज्वाइन कर ली और पढने लगा। मैंने फिर से क्लास के बाद रुककर उनसे सवाल पूछना शुरू कर दिया और हम दोनों की सेटिंग होने लगी।
“क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड नही क्या रणविजय???” एक दिन मैडम अच्छे मूड में होकर बोली
“अगर होती तो आपको लाइन क्यों देता??” मैंने कहा
तारा मैडम ने उसी वक्त मेरा हाथ पकड़ लिया और दूसरे हाथ से सहलाने लगी। मैं अपने काम में कामयाब हो गया था। मैंने भी मैडम के हाथ पर अपना हाथ मलना शुरू कर दिया और काफी देर तक रगड़ता रहा। वो मेरे सामने ही कुर्सी पर बैठी मुझे घूर रही थी। मैं भी इस तरफ कुर्सी पर था और बीच में टेबल थी। मैं आगे बड़ा और बैठे बैठे मैडम के गाल पर चुम्मी ले ली।
उसके बाद वो भी मेरे साथ हो गयी। मैं अपनी कुर्सी से उठ गया और मैडम के पास चला गया। उसके बाद मैंने ही उनके चेहरे को पकड़ लिया और ओंठो पर किस करने लगा। वो बैठी रही और मैं खड़ा होकर उनके लब चूस रहा था। कुछ देर में तारा मैडम को खड़ा होना पड़ा। उसके बाद वो मुझसे आकर चिपक गयी और मुझे दोनों हाथों से पकड़ ली। दोस्तों उस दिन 31 दिसम्बर 2016 था। ये पिछले साल की बात है जो आपको सुना रहा हूँ। मैंने भी उनको पकड़ लिया और जोश से भरके उनके गुलाबी होठो पर अपने होठ रखकर चूसने लगा। तारा मैडम ने किरकिरी वाली लाल लिपस्टिक लगाई थी जिसमे वो काफी सेक्सी दिख रही थी। मैंने कुछ देर उनको चूसा, फिर उनकी टी शर्ट पर उनके मस्त मस्त 34” के दूध पर अपना हाथ रख दिया और दबाने लगा। मैडम “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा सी सी सी ओह्ह” करने लगी। मैने अपनी क्लास का डोर बंद किया और मैडम के दूध को हाथ से टी शर्ट के उपर से मसलना शुरू कर दिया। उनको खूब मजा दिया।
“रणविजय!! ये क्या कर रहा है??” वो पागल होकर बोली
“आपसे प्यार कर रहा हूँ। क्या आपको मजा नही आ रहा है” मैंने उनके संतरे को दबाते हुए पूछा
“हा हा हा सी सी सी ओह्ह मजा तो बहुत आ रहा है पर कोचिंग में ये सब करना सही नही। अगर मेनेजर ने मुझे तेरे साथ ये चुम्मा चाटी करते देख लिया तो नौकरी से निकाल देगा” तारा मैडम बोली
“कोई नही आएगा मैडम!! आप बेकार में डर गयी है। आज मनेजर 4 बजे ही जा चुके है” मैंने कहा
फिर धीरे धीरे उनको क्लास में नंगा कर दिया और अपने कपड़े भी उतार दिए। हमारी क्लास में सिर्फ कुर्सी ही कुर्सी पड़ी हुई थी। कोई लम्बी बेंच नही थी जिस पर चुदाई कर लेता इसलिए मुझे कुछ नये तरीके से आज अपनी टीचर की चुदाई करनी थी। मैंने तारा मैडम को नंगी करके कुर्सी पर बिठा दिया और उनके मस्त मस्त दूध दबाने लगा। ओह्ह गॉड!! वो पूरी तरह से कुवारी माल थी। एक बार भी चुदी नही थी। मैडम के दूध बड़े सॉफ्ट और कोमल दिख रहे थे। 34” की सफ़ेद सफ़ेद चूचियां अत्यंत रसीली दिख रही थी।
मैंने उनके कबूतरों को हाथ से पकड़ लिया और हल्का हल्का दबाने लगा। मैडम “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” करने लगी। उसके बाद मैं कुर्सी पर उनके नजदीक बैठ गया और बैठे बैठे ही झुक गया और अपनी सेक्सी टीचर की चूचियां मुंह में भरके चूसने लगा। ओह्ह हो हो हो कितना आनन्द आया दोस्तों। आखिर मैंने उनको अपने प्रेमजाल में फंसा ही लिया था। मैं हाथ से उनकी दोनों रसीली चूचियों को दबा दबाकर रस निकाल रहा था और मुंह में लेकर चुसे जा रहा था। कुछ ही देर में मैडम के अंजर पंजर ढीले हो गये और उनकी चूत अपना रस छोड़ने लगी।
“मैडम!! पैर तो खोलो!! अपनी मुनिया रानी चूत तो दिखाओ जरा” मैंने कहा लाल रंग की प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठे बैठे तारा मैडम ने अपने पैर खोल दिए। मैं नीचे झुका और उनकी चूत को खोलकर दीदार करने लगा। साफ़ चिकनी चमेली चूत थी मैडम की। अब मुझे उसको चाटना था। मैंने मैडम की कमर पकड़ी और कुर्सी पर आगे की तरफ खींच लिया फिर दोनों पैर खुलवा दिये। लाल लाल गुलाबी सेक्सी उभरी सुंदर चूत मुझे दिख गयी। मैं कामुक होकर ऊँगली से रगड़ने लगा तो वो …..सी सी सी सी करने लगी। फिर मुझे नीचे फर्श पर बैठना पड़ा। मैडम ने पैर खोल दिए और मैं जीभ लगाकर उनकी चिकनी चमेली चूत को चाटने लगा। वाह !!!! कितना मजा आया दोस्तों!! मैं किसी रेगिस्तान में प्यासे आदमी की तरह जल्दी जल्दी उनकी कमसिन चूत को जीभ लगा लगाकर चाटने लगा। अब तारा मैडम “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी
सी…रणविजय!! कितना आनन्द आ रहा है!! ….हा हा हा… करने लगी।
मैं भी बिलकुल ठरकी मर्द बन गया और 15 मिनट तक उनकी सेक्सी बुर को चाट चाटकर साफ़ कर दिया। इस बीच मैडम कुर्सी पर पीछे टेक लगाकर लेटी रही। “ला अपना लौड़ा दे!!” वो बोली और खुद ही मेरे 10” लम्बे और 2” लौड़े को पकड़ लिया और फेटने लगी।
“फेटो मैडम!! इस हरामी लौड़े को आप आज अपने हाथो से फेटो!!” मैंने कहा खुले बालो में तारा मैडम क्या मस्त माल दिख रही थी। अपने सीधे हाथ से मेरे लौड़े को जल्दी जल्दी फेटे जा रही थी और कितनी सेक्सी दिख रही थी। मेरे पेट और नाभि पर उन्होंने किस किया। मेरी पोते की गोलियां लटक रही थी। तारा मैडम झुक गयी और मेरे मोटे से नीग्रो जैसे लंड को हाथ से फेटते हुए मेरी गोलियों को मुंह में लेकर चूसने लगे। मैं “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..”करने लगा। “और चूसो मैडम!! मेरी गोलियों को!!” मैंने बोला
उसके बाद तारा मैडम पूरी तरह से चुदासी औरत हो गयी और मेरी दोनों गोलियों को रसगुल्ले की तरह मुंह में लेकर चूस रही थी। मैंने देखा की उनके ओंठो पर लगी किरकिरी वाली लाल लिपस्टिक छूट रही थी। मेरी गोलियों पर लगी जा रही थी। पर मुझे इस तरह से चुसाकर खूब मजा मिला। अंत में मेरी सेक्सी तारा मैडम से मेरे लंड के चमकते हुए मोटे सुपारे को किस करना शुरू कर दिया।
“रणविजय!! तेरा लौड़ा तो बहुत मोटा है रे!!” मैडम बोली
“हाँ, मैं असली मर्द हूँ। आज आपको पता चल जाएगा” मैंने कहा उसके बाद मैडम हल्की संकोच और शर्म के बाद आखिरकार मेरे सुपारे को मुंह में ले ली और चूसने लगी। उनका मुंह काफी छोटा था इसलिए मेरा सुपारा मुस्किल ने उनके मुंह में जा पाया था। मैंने मैडम के बाल पकड़े और सिर को लंड की तरफ दबा दिया। ऐसा करने से मेरा 10” मजबूत और लम्बा लौड़ा उनके मुंह में गले तक गपाक से घुस गया। फिर तारा मैडम के पास कोई विकल्प नही बचा। अब वो चूसने लगी और हाथ से मेरा लौड़ा फेट रही थी। मैं तो बड़ा प्लेजर लेने लगा। बड़ा आनन्द लिया।
चूसते चूसते मैडम गरमा गयी और अब यौन उत्तेजित हो गयी। अब खुलकर हाथ से फेट फेटकर चूसने लगी। काफी देर मैंने उनके साथ ओरल सेक्स किया। फिर अपने लौड़े को उनके मुंह से बाहर निकाला। मैडम के सेक्सी ओंठो की लिपस्टिक अब पूरी तरह से मेरे लौड़े पर चुपड़ गयी थी। उनके लिप्स पर मेरा माल लगा हुआ था। मैडम अब भी कुर्सी पर बैठी थी और मैं उनके सामने खड़ा था। “रणविजय!!! तुम मुझे कैसे चोदोगे?? यहाँ तो सिर्फ कुर्सियां है” तारा मैडम बोली “मैडम एक काम करो!! आप कुर्सी पर ही अपने पैर खोल दो!! मैं झुक कर आपको चोद लेता हूँ” मैंने कहा
उसके बाद दोस्तों जिस कुर्सी पर वो बैठी थी थोडा और आगे आ गयी और दोनों पैर खोल दिए। मैं हल्का सा झुका और अपने लंड को फेटते फेटते उनके भोसड़े में घुसा दिया। ““उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी…..
ऊँ…ऊँ…ऊँ…. देखो रणविजय!! धीरे धीरे से पेलना!! आज पहली बार चुदा रही हूँ” तारा मैडम बोली
उसके बाद मैंने उसकी पेलाई शुरू कर दी। उनकी चूत में लंड घुसाकर ठुकाई शुरू कर दी। मैडम हां हां ओह्ह ओह करने लगी। मैं धिंचक धिंचक उनको लेने लगा। हम दोनों मजे लूटने लगे। मैडम तेज तेज आवाजे निकालने लगी। रोज मैडम इसी क्लास में हम स्टूडेंट्स को पढ़ाती थी। पर आज संयोग देखो की इसी कमरे में मुझसे चुदा रही थी। मैं भी दबाकर उनकी ठुकाई करने लगा। मेरा लंड बड़े सहज भाव से उनकी चूत की गली गली में टहल रहा था। तारा मैडम जैसे खूबसूरत औरत के साथ सम्भोग करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नही था। मैं हचक हचक कर उनको जल्दी जल्दी तेज और गहरे धक्के चूत में दे रहा था जिससे उनको जादा से जादा सम्भोग और चुदाई का मजा मिल सके।
मैडम भी कुर्सी पर टांग फैलाये “ हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….”
बोल रही थी। मेरे धक्को से कुर्सी चूं चूं चर चर्र बोल रही थी। मैडम मेरे पेट और कमर पर अपना हाथ लगाने लगी और ओह ओह करने लगी।
“क्यों मैडम!! मजा आ रहा है की नही??” मैंने पूछा
पर शायद वो अपनी दुनिया में खोयी रही और कुर्सी पर पड़े पड़े चुदवाती रही। अपना मुंह खोलकर सी सी कर रही थी। मैं जल्दी जल्दी अपना लंड उनकी चूत की गली में दौड़ा रहा था। बड़ा रोमांटिक मौसम बन गया था फ्रेंड्स। काफी देर तक मैंने चोदा अपनी तारा मैडम को। उनकी गद्दीदार चूत काफी सेक्सी दिख रही थी। फिर जब झड़ने को आया तो लौड़ा बाहर खिंच लिया।
“लो मैडम इसे चूसो!!” मैंने कहा
अब तारा मैडम फिर से मेरे लंड हाथ से पकड़कर फेटने लगी। फिर मुंह में लेकर चूसने लगी। मेरी तरह मेरा लंड भी काफी गोरा और सुंदर था। मैडम के होठ फिर से मेरे लंड की खाल पर दौड़ने लगे तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैडम के सिर पकड़कर मैंने अपनी तरह से उनके मुंह में चोदना शुरू कर दिया। बड़ा आनन्द हुआ। फिर लंड उनके मुंह से बाहर निकाला और हाथ से पकड़कर उनके गोरे गालो पर रगड़ने लगा। मेरे लंड से रिसता माल की चाशनी उनके पुरे चेहरे पर चुपड़ गयी।
“करो और करो रनविजय!! अच्छा लगता है” तारा मैडम बोली
अब मैं उनके दूसरे गाल पर लंड को रगड़ने लगा। फिर उनके पुरे चेहरे पर लंड के सुपारे से पेंटिंग करने लगा। उनकी आँखों पर लंड रगड़ दिया। फिर से उनके पैर खुलवा दिए और चूत में फिर से लौड़ा घुसा दिया। 15 मिनट अपनी टीचर को और चोदा फिर जल्दी से मुंह पर अपने माल की पिचकारी छोड़ दी। मैडम के खूबसूरत चेहरे पर सब तरफ मेरा ही मेरा माल था। जिसे उन्होंने अपनी लाल पेंटी से पोछकर साफ़ किया। फिर दोनों कपड़े पहन लिए। तारा मैडम को वाशरूम जाना पड़ा अपना मुंह धोने के लिए। दोस्तों अब तो अक्सर अपनी टीचर से चुदाई हो जाती है।
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टीचर की चूत को रगड़ रगड़ कर चोदा

टीचर सेक्स स्टोरी : दोस्तों, मैं गोविन्द आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर स्वागत करता हूँ. ये मेरी तीसरी कहानी है. मैं सुलतानपुर का रहने वाला हूँ. पिछले साल मैं बी ऐ का पेपर दे रहा था. मेरी इंग्लिश बहुत कमजोर थी. इसलिए मैं पढ़ने के लिए कोई अच्छी कोचिंग ढूढ़ रहा था. ऐसी ही पता करते करते मैं ठाकुर द्वारा की तरह निकल गया. वहां पर बहुत सारी इंग्लिश की कोचिंग है. वहीं प्रियंका कोचिंग इंस्टिट्यूट के बारे में मुझे पता चला. मैं इस २ मंजिला ईमारत में अंदर चला गया. वहां कोई बड़े बड़े कमरे नही थे. उस कोचिंग की हालत तो खुछ खास नही लग रही थी. बहुत ही पुरानी दीवालें थे. छोटे छोटे कमरे थे वहां. स्टूडेंट्स के बैठने के लिए लम्बी लम्बी बेंच पड़ी हुई थी.

कोई है ? कोई है ??’ मैंने आवाज दी.

पर किसी ने जवाब नही दिया. मैं शाम के ७ बजे इस कोचिंग में पंहुचा था. मैंने सोचा की सायद सब स्टूडेट्स की छुट्टी हो गयी हो. पर फिर भी मैं इस कोचिंग के मालिक से मिलना चाहता था. मैं कुछ देर तक उनके ओफिस में बैठके इंतजार करता रहा. पर कोई नही आया. मैं बहुत हैरान था की यहाँ कोई क्यूँ नही है. मुझे थोड़ी देर भी हो रही थी. एक पर्दा लगा था अंदर वाले कमरे में. मैंने पर्दा हटाया तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी. मैं तुरंत उस लडकी को पहचान गया. कोई ३० ३२ साल की लडकी थी. लडकी क्या औरत समझिये. मुझे समझने में देर नही लगी की वही प्रियंका श्रीवास्तव है जो ये इंग्लिश कोचिंग चलाती है. उनके साथ में एक ३५ साल के मर्द थे जो रौन्डिंग चेयर पर बैठे हुए थे. वो भी सायद यहाँ टीचर थे. प्रियंका श्रीवास्तव उनकी गोद में बैठी हुई थी. वो उनके मस्त मस्त बड़ी बड़ी रसीली छातियाँ दबा रहे थे. दोस्तों, ये सब देख के तो मेरा दिमाग ही ख़राब हो गया था.

मुझे समझते देर न लगी की प्रियंका श्रीवास्तव जिनकी ये इंग्लिश कोचिंग है अपने साथी टीचर से फंसी हुई है. मैं तुरंत जान गया की वहां चुदाई लीला चल रही है. प्रियंका श्रीवास्तव चुदने वाली है. मैं वही एक किनारे छिप गया और सब कुछ चुपके से देखने लगा. कुछ देर तक उनके वो दोस्त उनकी मस्त मस्त गोल गोल ३४ या करूँ ३६ साइज़ के मम्मे दबाता रहा. फिर उसने अपनी पैंट उतार के अपना मोटा सा नीग्रो जैसा लौड़ा मैडम के मुंह में डाल दिया. मेरे देखते ही देखते मैडम लौड़ा चूसने लगी और उससे खेलने लगी. कुछ देर बाद उनके साथी टीचर दोस्त ने उनको कुतिया बना दिया. पीछे से अपना मोटा नीग्रो जैसा साइज़ वाला लौड़ा उनके भोसड़े में घुसा दिया और उनको चोदने लगा. ये सब देखे के मेरी गांड फट गयी. मैं मजे से प्रियंका श्रीवास्तव की चूतड़ मार चुदाई देखता रहा. कुछ देर बाद वो पूरी तरह से चुद गयी. उनके दोस्त ने अपना लौड़ा जल्दी से निकाला और उनके मुँह पर सारा माल पिच पिच करके डाल दिया. ये सारा चुदाई लीला देखकर मैं तृप्त हो गया. मैं उस दिन वहां से चुपके से निकल आया और घर आ गया.

घर आकर मुझे सिर्फ प्रियंका श्रीवास्तव ही याद आ रही थी. मैं किस काम से गया था और क्या मुझे देखने को मिल गया. दोस्तों, अब मैं कश्मकश में था की क्या करूँ. कोई और कोचिंग तलाश करू या इसी मस्त मस्त चुदाई लीला वाली कोचिंग में नाम लिखा लूँ. २ दिन बाद मैंने प्रियंका श्रीवास्तव इंग्लिश इंस्टिट्यूट में नाम लिखा लिया. आज जब नाम लिखवाने आज आया तो मस्त मस्त गदराये बदन वाली चुदासी प्रियंका श्रीवास्तव अपनी घुमने वाली चेयर पर बैठी थी.

नमस्ते मैडम! मैंने कहा. आज तो साडी में थी. लाल रंग की साड़ी पहने थी. आगे से ब्लौस खूब गहरा था. छोड़े छोड़े मम्मे भी दिख रहे थे. मेरी नजर कुछ पल के मैडम के क्लीवेज (दोनों छातियों के बिच के गहरा गड्ढा) पर कुछ सेकंड्स के लिए ठहर गयी.

नमस्ते जी!! क्या नाम है आपका?? मैडम ने हंसकर बड़े प्यार से पूछा

गोविन्द चौबे मैडम मैंने जवाब दिया.

प्रियंका श्रीवास्तव बड़ी खुश मिजाज निकली. मेरे बारे में सब मालूम किया. मैं कितना पढ़ा हूँ. कहाँ घर है वगेरह वगेरह. इस तरह मैं शाम को रोज ७ बजे आकर उसने इंग्लिश पढ़ने लगा. मैडम को जरा भी पता नही होगा की मैं उनको चुदते हुए देख लिया है. आधे घंटे बीते तो मैडम बोली ‘गोविन्द ! तुम ये एक्सरसाइज लगाओ! मैं बगल वाले कमरे में हूँ. कोई क्वेश्चन समझ न आये तो आवाज लगा देना! बोलकर वो बदल वाले कमरे में चली गयी. मैं तुरंत समझ गया की हो न हो वो अपने यार से मिलने गयी है. कुछ देर तक मैं शांत बना रहा. फिर मैंने पर्दा हटाकर देखा. मैं सही था वो अपने यार से मजा मर रही थी. आज फिर वो घुमने वाली कुर्सी पर अपने यार की गोद में बैठी थी. उसने उनके ब्लौस की उपर की बटन्स खोल रखी थी. वो उनकी बेहद गोरी गोरी छातियों को हाथ में लिए था और मींज रहा था. प्रियंका श्रीवास्तव छातियों को वो आदमी दबा रहा था. फिर वो उनकी छातियाँ पीने लगा. मेरी टीचर इतनी मस्त माल है. मुझे आज पता चल गया दोस्तों. मेरा ध्यान पढाई से हट गया. मैंने बेंच पर बैठा हुआ था. मेरा इतना चुदासा हो गया की मेरा हाथ मेरी पैंट पर मेरे लौड़े पर चला गया. मेरा लौड़ा अब प्रियंका श्रीवास्तव की चूत मांग रहा था. ये सब देखकर अब शान्ति से बैठके पढना तो नामुकिन हो गया था. मैंने अपनी जींस की बेल्ट खोल दी. अपने बड़े से लौड़े को हाथ में ले लिया और मैं लौड़ा फेटने लगा. सफ़ेद रंग क पर्दे से छिप छिप कर मैं अपनी टीचर की चुदाई लीला देख रहा था और अपना लौड़ा फेट रहा था. बहुत मजा आ रहा था दोस्तों. ऐसा दृश्य कभी कभी ही देखने को मिलता है. कुछ देर बाद मैंने अंदर देखा तो मेरा होश उड़ गया. प्रियंका मैडम के यार ने उनका पूरा ब्लौस ही उतार लिया था. उनको चिकनी मक्खन जैसी पीठ में वो काट रहा था. अपने दांत गडा रहा और उनके दूध पी रहा था.

कुछ देर बाद उनके यार से उनको पूरा नंगा कर दिया. वहीँ अंदर कमरे मी बच्चों के बैठने वाली लम्बी बेच पर लिटा दिया उनकी दोनों टाँगें फैलाकर मेरी मस्त मस्त जवानी से लबरेज मैडम को वो चोदने लगा. ये सब देख के मैं बिलकुल पागल हो गया. मेरे हाथ में मेरा ८ इंच का मोटा लौड़ा था. मैं जल्दी जल्दी अपना लौड़ा फेटने लगा. उधर अंदर में मेरी प्रियंका नंगी होकर मजे से चुदवा रही थी. अपने यार का लौड़ा खा रही थी. मैं इधर मुठ मार रहा था. अपनी चुदासी मैडम को चुदते हुए देखकर तो दोस्तों मुझे स्वर्ग मिल रहा था. प्रियंका मैडम मजे से चुदाती रही मैं इधर मुठ मारता रहा. कुछ अनमोल मिनट के बाद उनका यार उधर मैडम के भोसड़े में झड गया मैंने इधर एक बेंच के पीछे अपना माल गिरा दिया. जल्दी से मैंने अपनी जींस चढ़ा ली और बेल्ट बाँध ली. मैं ठीक से आज्ञाकारी चेले की तरह शांत होकर बैठ गया. कुछ देर बाद मैडम आयी. मेरे सामने पड़ी घूमने वाली कुर्सी पर वो बैठ गयी. अभी भी वो हांफ रही थी. मैं चोर नजर से देखा को उनके गहरे गले से उनकी बड़ी बड़ी छातियाँ अभी अभी उपर नीचे हो रही थी.

चुदवाने में मैडम की बड़ी ताकत खर्च हो गयी थी. सायद तभी अभी भी उनकी सांसें चल रही थी, वो हांफ रही थी. प्रियंका मैडम को मैंने अपना रजिस्टर चेक करने को दिया. वो मेरी कॉपी चेक करने लगी. मैं चोर नजरो से बार बार उपर अंदर और बाहर जाती उनकी रसीली छातियों को देखने लगा. दोस्तों, मैंने इस कोचिंग में नाम लिखाकर सायद अपनी जिन्दगी का सबसे अच्छा काम किया था. हफ्ते में ३ ४ बार तो मैडम अपने यार से चुदवाती थी और मुझे मजे से ब्लू फिल्म देखने को मिलती थी. इस तरह दोस्तों, मेरे दिन बड़े मजे से निकलने लगे. हर दिन मैडम की ठुकाई देखता और क्लास में ही मुठ भी मारता. इस तरह मेरे दिन मजे से कटने लगे. एक महीना अब पूरा हो गया तो था. इस पुरे महीने मैंने बस एक ही ख्वाब देखा था की प्रिंयका मैडम की चूत मारना. मैडम ने अगले महीने की फीस मांगी. मैं अगले दिन १००० रुपये लेकर गया और मैडम के हाथ में रख दी.

प्रियंका मैडम जरा हैरान हो गयी. इससे पहले की मैडम अपने लाल लाल होंठों से कुछ कह पाती मैंने मैडम का हाथ पकड़ लिया. ‘मैडम ! मुझे भी अपनी चूत दे दो!! कबसे आपको देख के मैं अपना लौड़ा फेट रहा हूँ! मैंने कह दिया. अचानक से वो बड़ी लाल पिली होने लगी. बड़ी गर्म हो गयी. मेरे गाल पर एक जोर का थप्पड़ भी उन्होंने रसीद कर दिया.

गोविन्द! तुम्हारा दिमाग तो खराब नही हो गया है??’ वो आँखें दिखाकर बोली.

मैडम! मैं आप से तभी पढूंगा जब आपकी अब चूत मारूंगा. रोज आपको उस बगल वाले कमरे में संदीप सर से चुद्वाते हुए देखता हूँ. अब मेरे सामने जादा नाटक मत करो. चूत देना तो तो बताओ. वरना मेरे १००० वापिस करो. मैं और किसी कोचिंग में नाम लिखवा लूँगा. पर अब यहाँ पढूंगा तो आपकी चूत मारें बिना दिल गंवारा नही होगा! मैंने मैडम से आँख में आँख डालते हुए कहा. उनके पसीने छूट गये. उनकी गाड़ के छेद से धुँआ निकल गया. वो हक्की बक्की रग गयी. मैं उनको संदीप सर से चुदवाते देखा है ये जान के तो मैडम का फ्यूज ही उड़ गया. वो कुछ पल के लिए मूर्ति बन गयी.

लाओ मेरे पैसे वापिस करो मैडम! मैं चलता हूँ ! मैंने कहा और हाथ फैला दिया. मैडम तुरंत पलटी मार गयी. ‘ओके गोविन्द! चलो तुम मेरे ख़ास चेले हो. मैं तुमको तुम्हारी मनपसंद चीज दे दूंगी! प्रियंका मैडम हंसकर बोली और मेरे ५०० के २ हरे हरे नोट उन्होंने अपने पर्श में रख लिए. मैं मन ही मन बहुत खुश था. १ घंटा जब पूरा हो गया तो मैंने मैडम को आँख से इशारा किया और इशारे में ही पूछा की चूत वूत दोगी की या बस पढाई लिखाई की बातें ही पेलोगी. दोस्तों, आज उनके पुराने यार संदीप सर नही आये थे. मैडम ने मुझे उसी फेवरेट कमरे में चलने को कहा. मैं अंदर चला गया. सीधे मैंने अपनी शर्ट पैंट निकाल दी. मेरा ८ इंच का लौड़ा बहुत मोटा था. प्रियंका मैडम की बुर मारने को वो १ महीना से बेचैन था. जैसे ही मैडम अंदर आई, मैंने उनको पकड़ लिया. मैंने उनको तुरंत बाहों में भर लिया. सीधा उनके मस्त मस्त लाल लिपस्टिक लगे होंठों को मैं पीने लगा. फिर मेरे हाथ उनके बड़े बड़े साइज़ के बूब्स पर चले गये.

मैं प्रियंका मैडम के मम्मे दाबने लगा. वो भी मस्ताने लगी. अपनी चुच्ची दबवाने में उनको भी पूरा आनंद आ रहा था. उफ्फ्फ, मैडम ने आज पीले रंग का ब्लौस पहन रखा था. छातियाँ इतनी बड़ी थी की मेरे हाथ में नही समा रही थी. पर फिर मैं उनको अपने हथेली में भरने की कोशिश कर रहा था. मैडम की छातियों को अब जोर जोर से दबाने लगा. उफ़ दोस्तों, मैडम के क्या मस्त मस्त आम थे. खूब दबाया मैंने उनके आमों को फिर. मैडम को मैंने संदीप सर की घुमने वाली कुर्सी पर बैठा दिया. उनके ब्लौस के हुक्स खोल दिए. जैसे ही आम मुझे दिखे मैंने लपक के उनको अपने मुँह में भर लिया और पीने लगा. प्रियंका मैडम गर्म सासें छोड़ने लगी. उनको भी पूरा मजा मिल रहा था. मैं उसके दोनों आमों को आधे घंटे से जादा चूसा. फिर मैंने उनकी साडी भी निकाल दी. मैडम को कुर्सी पर ही बिठाकर उनके गोरे गोरे मस्त पैर खोल दिए. मैडम की बुर बहुत सुंदर थी दोस्तों. बड़ी लाल लाल उभरी फूली फूली चूत थी उनकी. उनकी बुर देख के तो मैं ललचा गया. मैंने अपने होठ प्रियंका मैडम के भोसड़े पर रख दिए और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था दोस्तों. दांत से काट काटकर मैं उनकी बुर पी रहा था. रोज तो उनके आशिक संदीप सर मैडम का भोसडा पीते पर आज ये सौभाग्य मुझे मिला था. मैंने उनकी लाल लाल बुर बड़ी देर तक पीता रहा. फिर उनको मैंने चोदा खाया. वो आह आह करने लगी. मैंने उनको कुर्सी पर बिठाके पेलता खाता रहा फिर झड गया. अब मैं उनको हर महीना १००० रूपए देता हूँ और खूब पेलता खाता हूँ. सच में दोस्तों, इस कोचिंग में नाम लिखाकर मेरी जिन्दगी ही सेट हो गयी है. ये कहानी आप nonvegstory.com पर पढ़ रहे है.

खूबसूरत प्रज्ञा मैडम की क्लास में ही चुदाई की

हेल्लो दोस्तों मैं आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करता हूँ। मैं पिछले कई सालों से इसका नियमित पाठक रहा हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ता हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी जिन्दगी की सच्ची घटना है।मेरा नाम सुधीर है। मै दिल्ली में रहता हूँ। मै अभी 18 साल का हूँ। लेकिन मैं देखने में 24 साल तक का लगता हूँ। मेरा कद 6 फ़ीट है। मेरी बॉडी फिट है। ना ही ज्यादा मोटी और ना ही पतली।

मेरे क्लास की सारी लकड़किया मरती हैं मुझपे। लेकिन मैं किसी का लाइन एक्सेप्ट करता। पहले मैं एक लड़की पर मरता था। मैंने उसे पटाया और अंत तक उसकी चुदाई करके छोड़ दिया। उसके बाद मुझे कोई लड़की पसंद ही नहीं है। पसंद भी कोई आया तो वो थी मेरी प्रज्ञा मैडम। प्रज्ञा मैडम मेरी क्लास में पढ़ाती थी। उनका बहुत ही बॉम्ब फिगर था। पहली बार जब वो मेरी क्लास में आयी। तब मैं 11th में था। मैडम को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैडम के उछलते चुच्चो को देखकर मेरे लंड पर प्रेशर बढ़ता जा रहा था। मैडम को मैं पहले दिन ही देख कर पसंद करने लगा। मेरे कॉलेज के कई लड़के भी मैडम पर मरते है। दोस्तों मै आपका समय बरबाद ना करके। मै अपनी कहानी पर आता हूँ।
दोस्तों ये मेरी जीवन की सच्ची घटना है। मै एक मीडियम घर का लड़का हूँ। मैं घर में अकेला लड़का हूँ। न मेरा कोई भाई है और न ही कोई बहन। मेरे पिताजी मोहल्ले के डॉ है। उसी से हमारा खर्चा चलता है। गांव में भी जमीन है। लेकिन मैं अभी अपने गांव नहीं गया हूँ। पापा ने बताया था। दोस्तों मै दिल्ली में AIMS स्कूल में पढता था। क्लास में प्रज्ञा मैडम का पहला दिन था। मै मैडम को देखते ही फ़िदा हो गया। कोई भी लड़का मैडम के बारे में बुरा बोलता। तो मैं उससे लड़ जाता था। मैडम के सामने कई बार ये बात आई। मैडम कुछ न बोलती। बाद में मुझे समझाती। जो भी मुझे कुछ कहे कहने दिया करो। किसी के कहने से कुछ नहीं होता। मैडम का फिगर बहुत ही जबरदस्त था। मैडम अभी 28 साल की थी। उनकी जवानी की लहरें हिलोरे मार रही थी। एक दिन मैं टिफिन नही लाया था। मैडम ने मुझसे पूंछा- “नीलेश आज तुम टिफिन नही लाये’। मैं-“मैडम जी वो मैं जल्दी जल्दी में भूल आया’।

प्रज्ञा मैडम- अच्छा ” तुम मेरे साथ आओ’। मै प्रज्ञा मैडम की पीछे पीछे चलने लगा। प्रज्ञा मैडम मुझे अपने केबिन में ले गई। मैडम- “तुम मेरे साथ मेरे में टिफिन कर लो’। मै- “नहीं मैडम मुझे भूख नहीं है’। प्रज्ञा मैडम मुझे ज़बरदस्ती खाना खिलाई। फिर हम दोनो एक दूसरे से अच्छी तरह से परिचित हो गए। मैडम भी अब पूरे क्लास में ज़्यादा मुझे ही देखती थी। मैं मैडम का सबसे प्यारा स्टूडेंट बन गया। मैडम भी मुझे बहुत मानती थी। सारे लड़के मेरा खूब मजा लेते थे। एक दिन मैं स्कूल जल्दी आ गया। अपने क्लास में बैठा था। खूब तेज बादल थे। पानी बरसने वाला था। प्रज्ञा मैडम भी आ गई थी। एक दो बच्चे हमारे क्लास के और आये। लेकिन उस दिन छुट्टी हो गई थी। मैं अकेला ही क्लास में बैठा था। प्रज्ञा मैडम उधर से जा रही थी। मेरे पास आयी और बोली- ” तुम अभी तक घर क्यूँ नही गये’। मैंने कुछ नहीं बोला। प्रज्ञा मैडम मेरे पास आकर बैठ गई। प्रज्ञा मैडम-” गर्लफ्रेंड का इंतजार कर रहे हों’। मैने कहा नहीं मैडम ” मेरी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं है’। मैडम ने पूंछा- ” फिर तुम यहाँ बैठ कर क्या कर रहे थे’। मैंने सोचा आज बेटा मौक़ा है। बोल डाल अपने दिल की बात। मैंने मैडम से बड़ी हिम्मत करके कहा-“मैडम मै आपका इंतजार कर रहा था’। प्रज्ञा मैडम चौंक गई। बोली- क्या??? मैंने कहा हाँ मैडम जी।

मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो। मैडम ने कुछ नहीं बोला। लेकिन कही ना कही मैडम जी भी मुझे पसंद कर रही थी। मैं मैडम के और ज्यादा पास जाकर। मैंने मैडम को ” आई लव यू’ बोल डाला। मैडम को बहुत बड़ा सदमा लग रहा था। मैडम कुछ देर तक खामोश रही। फिर मैडम ने भी “लव यू टू’बोल दिया। प्रज्ञा मैडम ने बताया कि मै भी उनको बहुत पसंद हूँ। मैंने मैडम से कहा। अभी तक बताया क्यूँ नहीं की तुम भी मुझसे प्यार करती हो। मैडम ने कहा- “हम दोनों की न तो उम्र बराबर है। न जी हम लोगों के बीच संबंध ही कुछ ऐसा हो सकता था। तुम मेरे स्टूडेंट हो” इसीलिए मैंने तुमसे ऐसा नहीं बोला। मैंने कहा- प्यार के लिए “उम्र और सम्बन्ध कोई मायने नहीं रखते’। प्रज्ञा मैडम कहने लगी-“बड़ा नॉलेज है प्यार के बारे में’। मैंने कहा हाँ है। प्रज्ञा मैडम उस दिन साडी पहन कर आयी थी। प्रज्ञा मैडम का गाल लाल लाल लग रहा था। मैडम उस दिन कुछ ज्यादा ही ब्लश करके आयी थी। मैडम ने खूब जबरदस्त काजल लगाया था। मैडम की आँखे बहुत ही अच्छी थी। तिरछी नजर से वो हमें देख रही थीं। मै मैडम के आँखों में देख रहा था।

मैडम ने अपने होंठो को खूब अच्छी तरह से सजाया था। दोनों होंठ गुलाब की पंखुडियों जैसे लग रहे थे। मै मैडम को ऊपर से लेकर नीचे तक ताड़ रहा था। मैडम भी मुझे बडी कातिलाना नजरो से देख रही थी। मैंने मैडम की दोनो चुच्चो की तरफ देख रहा था। धीऱे धीऱे मैडम के करीब चला गया। मैडम भी कुछ मेरी तरफ खिसक रही थी। मैं और प्रज्ञा मैडम सबसे ऊपर के रूम में थे। कोई भी नहीं आ रहा था। पानी बहुत तेज बरस रहा था। सारे कैमरे ऑफ थे। मैंने मैडम के ऊपर हाथ रख् दी। मैडम से बात करने लगा। कुछ ही देर में मैडम को मैंने अपनी बाहों में जकड लिया। मैडम ने भी मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया। मैंने मैडम की होंठो की तरफ अपनी होंठ कर रहा था। मैडम जी ने धीऱे धीऱे अपनी आँखे बंद कर ली। मैंने मैडम जी की बंद आंखो बाकी तरफ देख कर मैंने मैडम की होंठ पर अपनी होंठ लगा दिया। मैडम की होंठ को चूमने लगा। मैडम चुप थी। मैं मैडम की होंठों को आराम आराम से मजे ले ले कर चूस रहा था। मैडम भी अपनी अपनी होंठ को धीऱे धीऱे चलाने लगी। मैंने मैडम के होठ पर कपनी होंठ जोर जोर से चलाकर चूमने लगा। मैडम की होंठ बहुत ही नाजुक थी।

बिल्कुल गुलाब की तरह होंठ। मैंने मैडम के होंठो की सारी लिपस्टिक छुडा दी। मैडम की लिपस्टिक मेरे होंठ में लगे थे। मैडम ने अपनी आँखे खोली और मेरा होंठ देखी तो हँसने लगी। मैंने पूंछा तो मैडम ने बताया किं हमारे होंठो की सारी लिपस्टिक तुम्हारी होंठ पर लगी है। मैडम ने भी मेरी होंठो को चूसने लगी। मैंने भी मैडम के होंठो की जबरदस्त चुसाई करने लगा। मैडम भी चकरा गई। इतनी कामुकता से मैडम की होंठ चूस रहा था। मैडम की होंठ को चूस चूस कर लाल कर दिया। मैडम भी मेरी होंठ जोर जोर से चूस रही थी। मैंने मैडम के मुँह में अपनी होंठ डालकर मैडम की जीभ को चूसने लगा। मैडम के होंठो से लगी मेरे होंठ की लिपस्टिक मैंने मैडम की जीभ में लगाईं। मैडम भी अपनी जीभ निकाल कर चुसवा रही थी। मैंने मैडम की चुच्चो पर अपना एक हाथ बड़ी हिम्मत करके रख दिया। मैडम ने काले रंग की ब्लाउज पहन रखी थी। मैंने मैडम के ब्लाउज के ऊपर से ही मैडम की चुच्चो को मसलने लगा।

मैडम गई ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने मैडम होंठो को चूसना बन्द कर दिया। अब मेरा ध्यान सिर्फ मैडम के चुच्चो पर था। प्रज्ञा मैडम अब भी मेरे होंठो को चूस रही थी। मैं मैडम की चूंचियों को ब्लाउज के अंदर तक हाथ डाल कर दबा रहा था। मैडम जी साँसे धीमी तेज कर रही थी। मैडम की साँसे बहुत ही अच्छी लग रही थी। मैडम अपनी साँसे ठीक मेरे नाक के सामने छोड़ रही थी। मैंने मैडम के बूब्स को ब्लाउज के नीचे और ब्रा के ऊपर से ही दबा रहा था। मैडम ने बहुत ही टाइट ब्रा पहन रखी थी। प्रज्ञा मैडम की ब्रा में मेरा हाथ ही नहीं घुस रहा था। मैंने मैडम की ब्लाउज की हुक खोल दी। मैडम ने कहा पहले दरवाजा बंद कर दो। मैंने आगे का दरवाजा बंद कर दिया। कैमरे के ऊपर अपनी शर्ट बाँध दी। मैंने मैडम की हुक को खोलकर उनकी ब्लाउज को निकाल दिया। मैडम ने कुछ नही कहा। मैडम भी चुदाई की प्यासी लग रही थी। मैंने प्रज्ञा मैडम की ब्रा के ऊपर से ही मैडम के मम्मो से खेलने लगा। मैडम की ब्रा सहित मैं उनकी चूंचियो को काट रहा था। मैडम ने मुझे अपनी चूंचियो से चिपका लिया। मैने मैडम की ब्रा को निकाल दिया। मैडम के चुच्चो को देखकर मैं हैरान हो गया। मैडम ने मुझे अपनी बाहों से जकड कर दबा रखा था। मैंने मैडम के निप्पल को अपने मुँह में रख कर पीने लगा।

मैडम का दूध मै निचोड़ कर पी रहा था। मैडम की सिसकारियां निकल गई। मैडम उफ्फ्फ…. उफ़्फ़…… सी….सी…सी…सी….ई…ई..इस्स्स …इस्स्स!!! कह रही थी। मैंने मैडम की चुच्चो को खूब दबा दबा कर पिया। मैडम को भी अपनी चूंचियों को पिलाना बहुत अच्छा लग रहा था। मैडम का दूध मै बच्चो की तरह पी रहा था। मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने मैडम को खड़ा किया। मैडम ने खुद ही अपनी साडी उतार दी। मैडम जी पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी। मैडम को मैं ताड़ रहा था। मैडम ने मेरे पैंट का हुक खोला और अंडरवियर सहित मेरे पैंट को निकाल दिया। मैडम भी मेरे लौड़े को देखकर चौक गई। मैडम ने कहा-” उफ्फ्फ!!!! नीलेश तेरा लौड़ा तो बहुत बड़ा है। लग रहा की किसी जवान मर्द का लौड़ा है”।

मुझे अपने गोर लंड पर मैडम की अंगुलियां बहुत ही अच्छी लग रही थी। मैडम ने कई अंगुलियों में अंगूठी पहनी थी। मैडम की नाखूनों पर लगा नेल पॉलिश बहुत ही रोमांचक लग रहा था। मैडम ने मेरे लंड को बड़े अजीब ढंग से पकड़ रखा था। मेरे लंड को मैडम आगे पीछे कर रही थी। मैडम ने मेरे लंड को आगे पीछे करके अपने मुँह में मेरा लौड़ा रख़ लिया। मेरे लंड को चूसने लगी। मै मैडम के मुँह में ही झड़ गया। मैंने मैडम की मुह से अपना लंड निकाला। मैडम को खड़ी करके मैंने मैडम की पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। मैडम का नाड़ा खुलते ही पेटीकोट नीचे सरक गया। मैंने मैडम को टेबल पर बैठाया। मैडम की दोनों टांगो को खोलकर मैडम की चूत के दर्शन किया। मैडम की चूत के दर्शन कार्ये हुए। मैंने अपना मुँह मैडम की चूत में लगा दिया। मैडम की चूत को मै अच्छे से चाट रहा था। मैडम की चूत के दाने को काटते ही मैडम की चीख निकल जाती थी। मैडम ”….अई… अई…. .अई…..अई….. इसस्स्स्स्स्स्स्स्…..उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह!! की चीख निकल गई।

मैडम की चूत के अंदर अपनी जीभ डाल डाल कर उनकी चूत साफ़ कर दिया। मैडम की चूत अंदर तक गीली थी। मैंने मैडम के चूत का सारा पानी चाट कर। मैंने मैडम की चूत को गीले से सूखा कर दिया। मैडम अब बहुत ही गरम हो चुकी थी। मैडम की चूत एक दम लाल लाल टमाटर की तरह दिख रही थी। मैडम जी की चूत अपना गर्म गर्म उबला पानी भी छोड़ रही थी। मैंने मैडम की चूत से अपनी जीभ निकाली और अपना लंड मैडम की चूत के दोनो टुकड़ो के बीच रगड़ने लगा। मैडम जी अब चुदवाने को तड़प रही थी। मैं मैडम को खूब तड़पा रहा था। मैडम की चूत में आखिर कर अपना लुल्ला साल दिया। मेरे लौड़े का टोपा ही मैडम की चूत में घुसा था की मैडम की चीख निकल गई। मैडम ने जोर से “…मम्मी…-मम्मी…..सी सी सी सी… हा हा हा …..ऊ ऊ ऊ ….-ऊँ…ऊँ…ऊँ..उन हूँ उन हूँ…” की आवाजें निकालने लगी। मैंने चूत में फिर एक बार धक्का मारा। मेरा पूरा लंड मैडम की चूत में घुस गया। मैडम और जोर जोर से चिल्लाने लगी। मैडम की आवांजो को दबाने के लिए। मैंने अपना होंठ मैडम की होंठ पीकर रख दिया। मैडम के ऊपर लेट कर मैं मैडम की चुदाई कर रहा था। मैडम की आवाज अब बहुत धीऱे धीऱे निकल रही थी। मैडम की चूत में अपना लंड पेल रहा था। मै अपनी कमर उठा उठा कर मैडम की चूत में अपना लौंडा डाल रहा था। मैं मैडम के ऊपर से उठा मैडम की थोड़ी तेज आवाज बाहर निकल रही थी। मैडम “आऊ…आऊ….ह म म मम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी…हा हा हा..!! की आवाज निकाल रही थी।

मैंने मैडम की चूत में अपना लंड डाले रहा। मैडम अपनी कमर उठा उठा कर चुदवाने लगी। मैंने मैडम को नींचे उतार कर झुका दिया। मैडम नीचे झुकी हुई थी। उनकी दोनों चूंचियां भी लटक रही थी। मैंने पीछे से मैडम की चूत में अपना लौड़ा दाल दिया। मैडम की कमर को पकड़ कर अपना लौडा मैडम की चूत में लपा लप डाल रहा था। मैडम की चूत में जल्दी जल्दी अपना लंड अंदर बाहर अंदर बाहर कर रहा था। मैडम की चूत चूत की जान निकल रही थी। मैडम जोर जोर से “आई
…आई….आई……अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी…हा हा हा…” चिल्ला रही थी। मैं मैडम की चूत में अपना लंड लगातार पेलता रहा। मैडम की दोनों टांगो को उठाकर मैंने अपने कमर में फंसाकर मैडम को चोदने लगा। मैडम की चूत को मैं आगे पीछे होकर चोद रहा था मैडम को मैंने नीचे किया। मै कुर्सी पर अपना लंड खड़ा करके बैठ गया। मैडम भी अपनी चूत मेरे लंड से लगा कर बैठ गई। मैडम की चूत को मैं मैडम को उठा उठा कर चोद रहा था। मैडम बहुत ही गर्म हो चुकी थी।

मैडम खुद ही चिल्लाते हुए ऊपर नीचे होकर चुदवाने लगी। मैडम की चूत का हलुआ बन गया। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया। मैडम को मैंने अपने लंड पर गांड रख कर बैठने को कहा। मैडम मेरे लंड पर अपनी गांड का छेड़ सटाकर बैठ गई। धीऱे धीऱे बैठ कर मेरा पूरा लंड अपनी गांड में घुसा ली। मैडम की गांड बहुत तेज तेज से दर्द होने लगी। मैडम ने मेरा लंड अपनी गांड से निकालना चाहा। मैंने को धीऱे धीऱे ऊपर नीचे होने को कहा। मैडम धीऱे धीऱे ऊपर नीचे होने लगी। कुछ देर बाद मैडम की गांड का दर्द आराम हुआ। मैडम धीऱे धीऱे से चिल्लती रही। “….अई. …अई…अई…. अई….उहह्ह्ह्ह….-ओह्ह्ह्हह्ह..” की आवांजो के साथ जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगी।

मै झड़ने वाला हो गया। मैंने मैडम को बताया मैडम मै झड़ने वाला हूँ। मैडम ने अपनी गांड से मेरा लंड निकाला। मैडम नींचे बैठ गई। मेरा लंड अपने मुँह में लेकर जोर जोर से मुठ मारने लगी। मै मैडम की मुँह में झड़ गया। मैडम ने मेरा लंड चाट कर साफ कर दिया। हम दोनो ने एक दूसरे को साफ किया। मैडम ने अपना कपड़ा पहना और मुस्कुराती हुई चली गई। अब जब भी मौका मिलता है। मैडम को जरूर चोदता हूँ। मैडम को हर रोज किस करके उनकी चूंचियां दबा देता हूँ। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।

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