रिश्तेदारों ने मिल कर चोदा मेरी नाजुक चूत को

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सभी लंड वाले मर्दों के मोटे लंड पर किस करते हुए और सभी खूबसूरत जवान चूत वाली रानियों की चूत को चाटते हुए सभी का मैं स्वागत करती हूँ। अपनी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी मित्रो तक भेज रही हूँ। ये मेरी पहली स्टोरी है। इसे पढकर आप लोगो को मजा जरुर आएगा, ये गांरटी से कहूंगी।

मेरा नाम राजश्री है। मै बहुत ही लाजबाब माल लगती हूँ। मेरे को देखने के लिए बहुत से लोगो की लाइन लगी रहती है। मैं किसी तरह से अपने आप को लोगो की नजर से बचा पाती हूँ। लेकिन जवानी भी भला कोई छिपने वाली चीज है। मेरे को एक मोटे तगड़े लंड की जरूरत बनी रहती है। मै भी चुदने को हमेशा ही तैयार रहती हूँ। मेरे को अच्छे पर्सनालिटी के लोग बहुत ही पसंद है। चेहरा थोड़ा कम भी अच्छा हो तो चलेगा लेकिन मेरे को मोटे लंड वाले लड़को से व्यवहार रखना बहुत ही अच्छा लगता है। जब भी मै किसी हैंडसम लड़के को देखती हूँ तो मेरी चूत में खुजली होने लगती है। मै बहुत लोगो से अपनी चूत को फड़वा चुकी हूँ। लेकिन मुझे आज भी चुदाई का वह बहुत ही यादगार दिन याद आता है जब मैं अपने रिश्ते में एक शादी अटेंड करने गयी थी। उस रात जो मेरे साथ हुआ उसका तो मेरे को कभी अंदाजा ही नहीं था। वो कामुक रात मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी रात थी। उस रात का मजा आज भी लेने को करता है।

उस दिन को याद करते ही मेरी चूत में अजीब सी हलचल मचती है। मेरे बदन में एक उमंग सी उठती है। तो फ्रेंड्स आपका समय नष्ट न करके आपको उस रात की कहानीं बताने जा रही हूँ। ये बात अभी एक साल पहले 2017 की है मेरी उम्र 29 साल थी। अब मैं 30 साल की हूँ। दो साल पहले मेरी मेरी शादी हुई थी। मायके में कई मर्दो के लंड को खाकर हर रोज नया लंड खाने का मन हुआ करता था। लेकिन अब ससुराल में मै एक ही लंड खाने के लिए परमिट थी। मेरे को अपने हसबैंड के अलावा दूसरे किसी के लंड को देखना भी नसीब नहीं हो रहा था। जनवरी का महीना था। मेरी ननद की लड़के की शादी थी। मेरे को भी उनके यहां शादी में जाना पड़ा। मेरे को क्या पता था कि मेरी किस्मत वहां खुलने वाली है। मै वहां गयी तो बिना मन के ही थी लेकिन वहाँ जाकर जबरदस्त मर्दो को देखकर मेरा मन अच्छे से लगने लगा।

जिसे देखो वो मेरे ही बारे में पूछता रहता। मेरी खूबसूरती को ताड़ने के लिए तो कई मर्द बेकरार थे। मैंने उस दिन साडी और ब्लाउज पहना हुआ था। मै उस दिन नीले रंग की साड़ी में बहुत ही हॉट लग रही थी। जिसे देखो वही मेरे मम्मे को देखकर अपना जीभ लपलपा रहा था। कई सारी औरते तो मेरी सुंदरता को देखकर जल रही थी। मेरे को ऐसा उनके देखने से आभाष हो रहा था। मजा लेने के लिए मैं भी उन सबका साथ दे रही थी। मै भी अपनी कटीली नजरो से देख लेती थी। मेरे हसबैंड को ये सब नहीं पता चल रहा था। मै भी अपनी जवानी का भरपूर ममजा उठा रही थी। शाम को जब बारात जाने वाली थी तो सबने मेरा डांस देखा। काफी तारीफे भी हुई। मेरे को बहुत मजा आया।

सबसे ज्यादा मजा तो तब आया जब मैं बारातियों के साथ बारात जाने वाली थी। मेरे हसबैंड को कही और भी काम था। वो पहले ही चले गए थे। मेरे को बारात जाना था। लेकिन सारी गाडी फुल हो चुकी थीं। लास्ट में एक गाड़ी बची थी। जिसने मेरे नंदोई के कुछ दोस्त उस गाडी से जाने वाले थे। वो सब मेरे हसबैंड के भी अच्छे दोस्त थे। दोनों लोगो की हाइट कलर लगभग बराबर ही थी। एक का नाम अक्षय और एक का नाम पीयूष था।

मेरे हसबैंड ने इन दोनों के साथ में आने को कहा। मैं उनके साथ गाडी में बैठ कर बारात की यात्रा तय करने लगी। अक्षय गाडी चला रहा था और पियूष आगे ही बैठा था। दोनों ने अपना परिचय कराया। उसके बाद मेरे से बात करने लगे।  पहले तो कुछ देर तक तो वो आपस में ही बड़ी रोमांटिक बाते कर रहे थे। फिर मेरे से भी वही बाते शेयर कर रहे थे। मै भी मजे लेने के लिए उसी में हाँ में हाँ मिला रही थी। बातों ही बातों में बहुत मै उन सब की अच्छी फ्रेंड बन गयी। वो लोग मेरे से रोमांटिक बाते करते करते सेक्सी बातें करने लगे।

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“राजश्री जी आप की बॉडी फिगर बहुत ही अच्छी है। आपके बड़े ही चर्चे सुने हैं मैंने!” अक्षय ने कहा

“किस तरह के चर्चे सुने हो तुम लोग” मैने कहा

“अरे भाई…. जिसे देखो उसके मुह पर तुम्हारा ही नाम था” पियूष ने कहा

मै शरमाते हुए उनकी तरफ देखने लगी।

“अब इतनी भी तारीफ़े न करो! तुम मर्दो की तो बस ये पुरानी आदत होती है औरतों की तारीफे करना” मैंने कहा

तभी अक्षय ने गाड़ी रोकी और बाहर निकलने लगे। दोनों पास में ही खड़े होकर अपना अपना औजार निकाल कर पेशाब करने लगे। मेरी तरफ उन दोनों का पिछवाड़ा था। मेरे को उनके लंड का दर्शन ही नहीं करने को मिल पा रहा था। दोनो आपस में पता नहीं क्या बात कर रहे थे।  दोनों ने अपना लंड अंदर किया और गाडी में आकर बैठ गए। अब ड्राइविंग पियूष कर रहा था। अक्षय आगे बैठने के बजाय पीछे की शीट पर मेरे बगल में आ गया।

“यार राजश्री तुम अकेले ही बैठी ही अच्छा नहीं लग रहा था। बात करने में कोई तकलीफ ना ही इसीलिए मैं पीछे ही आ गया” अक्षय ने कहा

इतना कहकर उसने मेरा हाथ पकड़ा। मैंने भी कोई विरोध नहीं किया।

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“क्या बात है तुम्हारे तो विचार कुछ बदलते हुए नजर आ रहे है” मैंने कहा

“तेरे को देखकर किसी का भी विचार बदल सकता है। वैसे भी किसी के साथ कुछ कर लेने से कुछ चला थोड़ी न जाता है” अक्षय ने कहा

“तुम कहना क्या चाह रहे हो” मैंने बहुत ही प्यार से पूछा

“बस इतना की कोई औरत किसी भी मर्द को एक बार अपनी गुप्तांग से खेलने का मौका दे देती है तो उसमें क्या हर्ज है! मजा तो उसे भी आता है” पियूष ने गाडीचलाते चलाते ये जबाब दिया

“हां मेरे को ये बात समझ में आती है” मैंने कहा

“ठीक है देखता हूँ तुम्हे समझ में आती है तो एक बार अपने हसीन चेहरे के साथ साथ गुप्तांग का भी दर्शन करा दो” मेरे कंधे पर अक्षय ने हाथ रखकर कहा

मैंने उसकी तरफ अपना मुह करके उसे चुदने की डील करने लगी। अपनी कई शर्तो को उसके सामने रख दी। दोनों मेरी शर्ते मान गए। रास्ते में एक होटल पड़ा और हम  लोग वही रुक गए। होटल उन दोनो के जान पहचान का ही था। जिससे आसानी से कमरा मिल गया। मै उन दोनों के साथ कमरे में गयी। अक्षय ने दरवाजा बंद किया। दोंनो सांड की तरह मेरी तरह लपकने लगे।

“अरे अब तुम लोग कंट्रोल करो इतनी भी क्या जल्दी है” मैंने कहा

“क्या करूँ मै अब तेरे को सामने देख कर रहा नहीं जा रहा। तू अपनी चूत देकर हम लोगों पर बहुत बड़ा एहसान कर रही हो” पियूष ने मेरे से चिपकते हुए बोला

“इसमें एहसान कैसा??? हवस को मिटाने की चीज है तो दे रही हूँ! इसके बदले में मेरे को भी तो तुम लोगो का लंड खाने को मिल रहा है!” मैंने कहा

इतने में दोनों ने अपने अपने कोट की बटन को खोलने लगे। मै दोनो को बड़े ही प्यार से देख रही थी। दोनों के पैंट की जिप धीरे धीरे ऊपर होती जा रही थी। उनदोनों लंड फूलकर तंबू बना रहा था। अक्षय ने जल्दी से अपनी शर्ट को निकाल कर मेरे से चिपकने लगा। उस रूम में बिस्तर के अलावा सोफा वगैरह भी था। मैंउसी पर बैठकर मजे लूट रही थी। अक्षय ने भी मजे लूटने के लिए मेरे पास चिपककर मेरे खूबसूरत गोरे बदन को सहला रहा था। मै भी मस्ती में मजे लेने लगी। दोनों भोग विलास के लिए मेरे को गर्म करने के लिए तैयार थे। बार बार हाथो को फेरकर अक्षय ने मेरे को गर्म कर दिया।

“कितना सॉफ्ट बदन है तुम्हारा!! जी करता है काट कर खा जाऊं” अक्षय बोला

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तभी दूसरे किनारे सिर्फ अंडरवियर में ही पियूष भी आकर बैठ गया। दोनों ने मिल कर एक फूल दो माली की तरह हाल बना दिया। दोनों का प्यार करना मेरे पर भारी पड़ रहा था। मै अपने आप को रोक नहीं पा रही थी। प्यार की प्रवाह धारा में मै भी खो गयी। वो दोनों आपस में बात करके कहा रहे थे।

“यार पहली बार इतनी खूबसूरत माल को हाथ लगा रहा हूँ!! काश हम दोनों की बीबियां भी राजश्री की तरह होती” अक्षय बोला

लेकिन प्यार तो दोनों ही जता रहे थे। मै गर्म होकर दोनों को चिपक रही थी। दोनों मेरे कंधे को किस कर रहे थे। दोनों मिलकर एक साथ मेरे जिस्म से खेल रहे थे।मैंने अपना जिस्म एक दूसरे से टच करा के मेरे जिस्म में आग लगा दिया। तभी अक्षय ने मेरे को उठाकर मेरी साड़ी निकाल दी। पियूष ने अपना अंडरवियर निकाल दिया। वो पूरा नंगा हो चुका था। उसके बाद अक्षय ने भी अपना कपड़ा निकाल कर जल्दी से नंगा हो गया।

“जल्दी से तुम लोग अपना काम ख़त्म करो नहीं तो बारात जाने में देर हो जायेगी” मैने कहा

इतना कहते ही पियूष ने मेरे बालो को पकड़ लिया। मेरा मुह ऊपर की तरफ उठा जैसे ही उसने अपने होंठो को पीने लगा। मैंने भी उसका साथ देना शुरू किया। उधर अक्षय ने मेरे चूचे को पीछे से पकड़कर दबाना शुरू किया। मेरे ब्लाउज में वो हाथ डालकर वो निप्पल को दबाने लगा। मेरी तो सिसकारियां निकल गयी। मै चुम्बन कार्यक्रम के साथ “……अई…अई. …अई……अ ई….इसस्स्स्स् … ….उहह्ह्ह्ह …..ओह्ह्ह्हह्ह….”, की सिसकारियां भर रही थी। पियूष मेरे होंठो को पी पी कर काटने लगा। मैंने अपनी बाहों में पियूष को कस के जकड लिया। अक्षय ने मेरे को पीछे की तरफ खीचा। उसके खीच्चते ही मेरे और पियूष के होंठ जुदा हो गए। उसके बाद अक्षय ने मेरे ब्लाउज के एक एक बटन को खोलकर ब्रा सहित उसे निकाल दिया। मेरे को सोफे पर बिठाकर एक एक चूचे को दोनों ने अपने हाथों से पकड़कर काटते हुए पीने लगे।

“भाई कितना मुलायम और रसभरे चूचे है। इसे पीकर भूख ही ख़त्म होने लागु हैं” पियूष कह रहा था

मेरे काले निप्पल को दोनों काट काट कर मेरी चीखें निकलवा रहे थे। मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रही थी। मै “……अई…अई….अई……अई. …इसस्स्स्स्… ….उह ह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारियों के साथ अपने चूचे चुसा रही थी। दोनों खूब जोर जोर से मेरे दूध को काट काट कर पूरा मजा उड़ा रहे थे। मै दोनों को अपने दूध से चिपका कर पिला रही थी। दोनो के रसपान से मेरे दूध का सारा रस ख़त्म हो गया। मेरी निप्पल फूल कर गुब्बारे की तरह हो गयी। पियूष ने खड़ा होकर अपना लंड मेरे होंठो से लगा दिया। दोनो का लंड लगभग बराबर का था। 7 इंच का लंड मेरे मुह में डालकर अपने लंड को चुसाने लगा। मै उसके लंड को अपने मुह में लॉलीपॉप की तरह चूसने में बहुत मस्त हो गयी।

देखते ही देखते उसका लंड की मोटाई और भी ज्यादा बढ़ गयी। अक्षय से भी रहा नहीं गया। उसने भी अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया। मैं उसके लंड को मुठियाते हुए उसे भी मजा देने लगी। उसके बाद दोनों ने मेरे मुह को फैलाकर अपने अपने लंड को पेलना शुरू किया। मेरा मुह फटने फटने को होने लगा। मेरी सांस फूलने लगी। मै  “…..ही ही ही……अ अ अ अ उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” की आवाज के साथ दोनों का लंड एक साथ चाट रही थी। उसके बाद अक्षय ने मेरे को सोफे से नीचे उतार कर खड़ा कर दिया। मेरी पेटीकोट का नाडा खोलकर मेरी पैंटी को निकाल दिया।

मेरे को नंगा कर दिया। बारी बारी दोनों मेरी चूत को पीकर उसका भरपूर मजा ले रहे थे। दोनों ने मेरी चूत पर अपनी जीभ रगड़ रगड़ कर लाल लाल कर दिया। उसके बाद मेरी चूत को दोनों काट काट कर पीने लगे। उसके बाद एक एक करके दोनों मेरे ऊपर चढ़ने की तैयारी में लग गए। मेरे को बिस्तर पर लिटाकर पियूष ने पहले मेरे ऊपर चढ़ लिया। तभी अक्षय ने मेरे हाथों से अपने लंड को मालिश कराने लगा। पियूष अपना लंड चूत में रगड़ रगड़ कर मेरे को बहुत गर्म कर दिया। उसके बाद उसने अपने लंड को चूत में धकेल दिया। मेरी चूत ने उसका आधा लंड ही खाया था कि मेरे मुह से “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की चीख के साथ उसका लंड खा रही थी। जैसे ही उसके लंड को मैं अपनी चूत में अंदर लेती वैसे ही मेरी मुह से चीख पुकार की आवाज निकल जाती। उसके कई बार लंड के अंदर बाहर होते ही मेरी चूत की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ गयी। मेरे को उसकी चुदाई करने का तरीका बहुत ही अच्छा लग रहा था।

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“आहहहहह……मेरे लंड के राजा!! ई ई ई…सी सी सी और चोदो….मेरी कमसिन चूत को!!” मै कहकर उससे चुदाई की स्पीड बढ़वा रही थी। पियूष अपनी कमर को जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करके मशीन की तरह चुदाई कर रहा था। कुछ देर तक उसने चुदाई करने के बाद उसकी स्पीड धीमी पड़ गयी। उसके बाद उसने नीचे उतर ली। अक्षय ने मौक़ा पाते ही मेरे ऊपर चढ़ाई कर दी। उसने भी अपना मोटा लंड घुसाकर मेरी चूत को फाडने की कोशिश कर रहा था। मेरी चूत की अंदर के माल को लगाकर पियूष मेरे मुह पर अपना लंड लगा दिया। जब तक वो आराम करता रहा तब तक अपना लंड लगातार मेरी चूत में अपना लंड घुसाकर अंदर बाहर करता रहा।

मेरी जोरदार की चुदाई कर कर के दोनों ने मेरी चूत को फाड़कर उसका भरता बना डाला। बारी बारी दोनों ने मेरी चुदाई करके मेरे को चुदाई का भरपूर मजा दिया। मै भी “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्ह ह..अ ई…अई…अई…..”, की आवाजो के साथ चुद कर सम्भोग का पूरा मजा ले रही थी। मैंने कुछ देर बाद अपनी चूत में उंगलियों से मालिश करके चूत के दर्द को कम कर रही थी। दोनों ने अपना लंड घुसा घुसा कर मेरी पूरी चूत का कचरा कर डाला। उसके बाद उन दोनों ने मेरी गांड की भी चुदाई का पूरा मजा लेने के लिए मेरे को अलग अलग तरीको से चोदा। अक्षय ने मेरे को कुतिया बना दिया। उसके बाद दोनों ने बारी बारी मेरे गांड में अपना अपना लंड डालकर चुदाई की हवस को मिटा रहे थे। अक्षय के लंड ने मेरी गांड की रगड़ को ज्यादा देर तक बर्दाश्त न कर सका। वो मेरे मुह में अपने लंड को ठूस दिया। उसके लंड ने मेरे मुह में ही अपना सारा माल गिरा दिया। पियूष भी मेरी गांड चुदाई में लगा रहा।

लगभग 5 मिनट के बाद अपना माल मेरी गांड में ही गिरा दिया। वो भी झड़ कर बिस्तर पर लेट गया। उसके बाद हम सबने अपने अपने कपड़े पहने और बारात को चल दिए। दोनों ने मेरे मेकअप को बर्बाद कर दिया था। मैंने रास्ते में एक पार्लर में जाकर फिर से सज धज के बारात में आ गयी। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।

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