दिव्यांग पति ने अपने जीजा से सुहागरात में चुदवाया जानिए मेरी कहानी

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First Night Sex Story, Jija ji Chudai, Suhagrat Sex, Desi Sex, Sex Story : मेरा नाम राखी है मैं उन्नीस साल की हूँ। दोस्तों आप सुन्दर हो तो अच्छे बॉयफ्रेंड मिल सकता है। लोग आपको झांसे में लेने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। आप को चोदने की इच्छा रखेंगे। पर शादी की बात जैसे होगी आपको अपनी औकात के अनुसार ही मिलेगा अगर मैं गरीब हूँ तो गरीब के घर ही जाउंगी। और अगर परिवार सही नहीं रहा और बिखरा हुआ रहा तो आपकी ज़िंदगी भी बिखरी हुई रहेगी। आज मैं अपनी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सुनाने जा रही हूँ। कैसे मेरे घर वाले ने एक दिव्यांग के साथ मेरी शादी कर दी।

मेरे पापा पहले ही गुजर गए थे। घर में मैं और मेरी दो छोटी बहन। हमेशा रोटियों के लाले पड़े रहते थे क्यों की माँ एक छोटा सा दूकान चला कर किसी तरह हम लोगों को बड़ा किया। अब बड़ा होने के बाद शादी के बारे सोचने लगी। फिर शादी के लिए खर्चे नहीं हमलोगों का कोई स्टेटस नहीं कोई मदद करने वाला नहीं। दुखी हो गई थी ज़िंदगी से बस दिन रात यही चर्चा की मेरी शादी मेरी शादी कब होगी।

किसी जानकार ने एक लड़के के बारे में मेरी मम्मी से बताई की घर बहुत अच्छा है। किसी चीज की कमी नहीं है बहुत पैसे वाला है। गाड़ियां है अपना व्यापार है इज्जतदार लोग है। पर लड़का दिव्यांग है पोलिओ का शिकार है। मम्मी को सब कुछ पसंद आ गया। वो सोची की कभी मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी। पर मेरी बहन और मेरे कुछ दोस्त बोलने लगे की लड़का ही सब कुछ होता है। धन दौलत का क्या करोगी। पर मेरे लिए कोई रास्ता नहीं था। मुझे भी लगा की मेरे से दो मेरी छोटी बहन है अगर मैं मजबूत रहूंगी तो इन लोगों को भी मदद कर सकुंगी और माँ जो अकेली हो जाएगी उसका भी सहारा बन पाऊँगी। और सिर्फ लड़का देख कर शादी कर ली तो खुद ही वो डींगे मारने में लगा रहेगा होगा कुछ भी नहीं बड़ा बनने की बात करता रहेगा। मुझे ऐसा लड़का भी नहीं चाहिए जो गरीब हो या स्ट्रगल कर रहा हो।

मैं अपने मम्मी को हां कर दी शादी के लिए। और फिर मेरी शादी 2 जनवरी को 2020 को हो गई। दोस्तों शादी बहोत धूमधाम से हुआ वो सब मिला जो मैंने सपने में भी नहीं सोची। बीस तोले सोने महंगी साड़ियां। वो सब जो मेरे पहुच से हमेशा ही दूर थे वो सब चीज। मैं बहुत ही खुश थी मेरी माँ भी और मेरी बहनें भी। मेरे ससुराल वाले ने मेरी माँ को भी अच्छे खासे पैसे दिए शादी के लिए क्यों की उनलोगों को पता था इनके पास कमी है। वो अपनी शादी अच्छे से करना चाहते थे इसलिए कोई कमी नहीं रहे दोनों साइड से इसलिए दिल खोल कर खर्चे किया।

मेरी डोली ससुराल आ गई। पूरा घर भरा हुआ था मेहमानो से मुझेः ढेर सारी अंगूठियां पैसे जेवर मिले मुँह दिखाई में। शाम हो गई मेरी दोनों ननद ने सुहागरात के लिए कमरे तैयार किये। और मुझे भी सजा कर कमरे में ले गई। मैं गुलाब की पंखुड़ियां पर अपने बेड पर बैठी रही अपने पिया की वाट जोह रही थी। वो करीब दस बजे आये। वो शराब के नशे में थे। जैसे ही अंदर आये उनकी भाभी कमरे का दरवाजा बंद कर दी वो बैठ गए। वो मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिए। और करीब आ गए मेरे माथे को चूमा।

मैं नजरे निचे किये बैठी थी उन्होंने मेरा घूँघट हटा दिए उन्होंने साडी का पिन खोल दिया और मैं बैठी थी ब्लाउज के ऊपर से चूचियां दिख रही थी वो वही देख रहे थे अचानक उनका हाथ मेरी ब्लाउज पर पड़ा और हलके साथ से वो मेरी चूचियों को सहलाने लगे। धीरे धीरे मैं लेट गई वो मुझसे चुम्मा मांगनें लगे। मैं हलके से एक किस उनके गाल पर दे दी। उन्होंने अपनी बैसाखी अलग रख दी क्यों की वो बैसाखी के सहारे से ही चलते हैं।

उन्होंने मेरी ब्लाउज को खोला और ब्रा का हुक खोला मेरी गदराई हुई बदन पर दो बड़ी बड़ी चूचियां बाहर निकल गई। वो देखकर हैरान हो गए वो मेरी तारीफ करने लगे तुम कितनी सुन्दर हो। वो मेरे होठ को चूमने लगे। वो मुझे बाहों में भरने लगे। मैं भी उनको अपनी बाहों में ले ली और चूमने लगी उन्होंने पेटीकोट का नाडा खोल दिया और मेरी पेंटी भी निकाल दी। वो कभी ऊपर कभी निचे कभी ऊपर कभी निचे। कभी चूचियां दबाते कभी मुँह में लेते कभी चूत सहलाते कभी चूत चाटते। करीब एक घंटे तक ऐसे ही करते रहे मैं तब तब बिना चुदे ही तीन बार झड़ चुकी थी।

मैं क्या क्या कहती अपने मुँह से की चोदो। मैं इशारा भी की अब शुरू करते है पर वो शुरू नहीं किये और लेट गए मेरे बगल में। मैं बोली क्या हुआ तो वो बोले बस हो गया। मैं बोली अभी तो कुछ हुआ भी नहीं और आप कह रहे हैं हो गया। तो वो कहने लगे। मैं इससे ज्यादा तुम्हे कुछ नहीं कर सकता। जैसे मेरे पैर सूखे हैं वैसे ही मेरा लंड भी सूखा था। मेरा लंड खड़ा नहीं होता है। माफ़ करना मुझे। पर मैं तुम्हे एक अच्छी ज़िंदगी दूंगा। और मैं तुम्हे ऐसी ज़िंदगी दूंगा जिसमे कोई रोक टोक नहीं होगा तुम अपने हिसाब से जीना यहाँ तक की तुम चाहो तो सेक्स सम्बन्ध भी किसी से बना सकती हो।

पर मैं तुम्हारी भावना को समझ सकता हूँ चाहे तो आज भी अपनी ज़िंदगी जी सकती हो। मेरे जीजा जी तुम्हारी मदद करेंगे। मैं उनसे पहले ही बात कर चुका हूँ। दोस्तों ये बात उनके मुँह से सुनकर थोड़ा हैरानी हुई पर परेशानी नहीं हुई मेरे पास और कोई चारा नहीं था इसके अलावा। पूरी ज़िंदगी सुहागरात के अपने देखती आई और आज ऐसे ही निकल जाये तो पूरी ज़िंदगी सोचते ही रहूंगी। की कुछ भी नहीं हुआ उस दिन।

जब इनके जीजा जी मुझे देखने आये थे शादी के पहले तो मैं फ़िदा थी उनपर क्यों की बात चित का तरीका इज्जत देना पढ़े लिखे सुलझे हुए इंसान और गोरा सुन्दर चेहरा। कोई भी पति के रूप में स्वीकार कर लेगी ऐसी है उनकी पर्सनालिटी। सच पूछिए तो मैं यही सोच रही थी खास मुझे ऐसा लड़का मिलता। पर मेरी पहुंच यहाँ तक नहीं थी तो सोच भी नहीं सकती थी। पर आज मुझे ऐसा लगा की मान लेती हु शादी उनसे ही हुई है। अब मैं खुश थी चलो पति सक्षम नहीं है पर जीजा जी इनके तो सक्षम है और जब मेरा पति ही बोल रहा था तो ऐसे में क्या सोचना।

दोस्तों जीजा जी बगल बाले कमरे में ही थे और उस कमरे का दरवाजा मेरे कमरे से भी था यानी को मेरे कमरे से बगल के कमरे में बिच के दरवाजे से जाया जा सकता है। तभी मेरे पति दे उनको व्हाट्सप्प पर मेसेज भेजा वो बिच के कमरे से अंदर आ गए। और पति देव उस कमरे में चले गए और दरवाजा उन्होंने बंद कर दिया। अब मैं और जीजाजी जिनको कुमार जी सबलोग कहते हैं। कुमार जी बेड पर बैठ गए और मैं भी वही पहले से ही बैठी थी कपडे अस्त व्यस्त थे क्यों की पहले उन्होंने खोल दिया था। पर किसी तरह पहन कर बैठी थी। वो आकर बोले अगर आप कहेंगे तभी आपसे रिश्ते बनाएंगे। और मैं तो कहता हूँ ज़िंदगी को जिओ और आप भी मजे करो। इतनी धन दौलत है पर एक चीज नहीं है वो मैं आपको दे दूंगा।

मैं बोली अब तो कोई चारा भी नहीं है। मेरे पास मैं वापस थोड़े ना जा सकती हूँ अपने घर। आप जैसा समझें ठीक वो करें। वो मेरे होठ को ऊँगली से छुए और बोले खुश रहिये और अपने पति को खुश रखिये। उनको आपका प्यार चाहिए शरीर नहीं। तभी मैं रो दी और उनके गले लग गई वो मुझे सहलाते रहे और मैं जैसे चुप हुई वो मेरे होठ पर किस कर लिए मैं अपनी आँखे बंद कर ली। वो चूमते रहे और मेरे कपडे खोलते रहे। मैं लेट गई उन्हों सारे कपडे उतार दिए।

उन्होंने अपने सारे कपडे उतार दिए और मुझे अपनी बाहों में ले लिए मेरी सिंदूर मेरी काजल फ़ैल चुका था। वो मेरे जिस्म से खेल रहे थे। मैं भी उनके उँगलियों की छुअन से काँप रही थी होठ दबा रही थी मेरी चुत गीली हो चुकी थी।मैं चुदना चाह रही थी क्यों की एक रात में दो बार गरम हो चुकी थी। पहले तो प्यासी ही रह गई थी पर इस बार मुझे जम कर लौड़ा चाहिए थे। मैं उनके लौड़े को पकड़ ली और अपने चूत में रगड़ दी। बोली वो पहले ही छेड़ कर चले गए हैं। अब आप मेरी आग बुझा दीजिये जो आग उन्होंने मेरे जिस्म में लगाई है।

वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे पी रहे थे निप्पल को मसल रहे थे। और मेरी चुत में ऊँगली कर रहे थे मैं सिसक रही थी सिसकारियां निकल रही थी। पागल हो रही थी खुद ही अपनी चूचियां दबाती तो कभी चुत में ऊँगली करती। दोस्तों अब वो अपना लौड़ा मेरी चुत पर लगाए और मुझे कस के पकड़ा और जोर से घुसा दिए। इसी वक्त का इंतज़ार था मुझे वर्षों में लाल साडी में रहूं सिंदूर और काजल बिखरा हुआ हो मेरा पति मुझे जम कर चोदे। पर पति नहीं बल्कि और कोई चोद रहा था।

दोस्तों अब मैं निचे से धक्के देने लगी। मैं उनके छाती को सहलाने लगी। वो मेरे होठ को चूसने लगे। चूत में लंड डालने लगे। मैं अपनी पैरों से उनको बाँध ली वो बिच में मेरे पैरों से बंधे थे और जोर जोर से धक्के दे रहे थे। मेरी तो सिसकारियां निकल रही थी। चुदाई हो रहा था अंगडाइयाँ ले रही थी। मेरे जिस्म के सारे पुर्जे खुल गए थे वासना की आग भड़क गई थी। मुँह खुला का खुला ही रह रहा था कंठ सुख रहे थे होठ लाल हो गए थे। आँखे बंद हो रही थी पुरे शरीर में झांझझानाहट हो रही थी। मैं जोर से पकड़ कर गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी।

करीब एक घंटे तक हम दोनों भी सेक्स की नशे में थे और अचानक मेरे शरीर में आंधी आई और मैं उनको दबोच ली वो भी आ आ आ आ करने लगे और एक दम से दोनों शांत हो गए। मेरी चुत में वीर्य भर चुका था। दोनों शांत हो गए थे। अब हिला भी नहीं जा रहा था। हम दोनों ही अलग अलग हो कर सो गए थे आँखे बंद कर के। करीब आधे घंटे बाद दोनों उठे अपने अपने कपडे पहने वो फिर दूसरे कमरे में चले गए मैं अपने पति का इंतज़ार करने लगी।

दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी है। मैं दूसरी कहानी भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखने वाली हूँ आप जरूर पढियेगा।

पाल पोसकर जवान किया फिर 2 जनवरी को पहली बार चुदवाई

देवर भाभी सेक्स

मैं 31 साल की हूँ मेरा नाम सुमन है, विधवा हूँ, दुश्मनो ने मेरे पुरे खानदान को ख़तम कर दिया था। बस मैं बची और मेरा एक देवर जो की सिर्फ 10 साल का था उस समय, घर से बहुत धनी हूँ। पर इससे भोगने वाला कोई नहीं है। मेरा कोई बच्चा नहीं है। मैंने अपने देवर को पालपोस कर बड़ा की। १ जनवरी को वो 21 साल का हुआ। उसने मुझे १ जनवरी को बोला की अब हमलोग नए साल से एक नई ज़िंदगी जियेंगे। हमारे ज़िंदगी में इतनी मुश्किलें आई पर अब नहीं चाहते हैं की आगे मुश्किल आये मैं भी अब्ब २१ साल का हो गया है ज़िंदगी को नए सिरे से जीना चाहता हूँ।

मैं बोली शादी के 15 दिन बाद ही मेरी ज़िंदगी उजड़ गया था पर आपके सहारे ही मैं ज़िंदगी को जीने के लिए सोची। यहाँ तक की मेरे घरवाले भी मुझे दूसरी शादी के लिए कहा पर मैं सोची की मैं दूसरी शादी नहीं करुँगी। और आपके बड़े होने का इंतज़ार करने लगी। मैं अपने घर और धन दोनों को बचा कर रखी अगर मैं गलत होती तो मैं आज यहाँ नहीं होती सारा साम्राज्य बेच कर और और गुलछर्रे उड़ा रही होती। पर मैं आपके लिए ही यहाँ थी।

तो देवर जी ने कहा की मुझे भी पता है आपको कोई भी खुशियां नहीं मिली। पर इस नए साल से मैं आपको पूरी खुशियां दूंगा जो आपको नहीं मिला। दोस्तों 1 जनवरी को मैं बहुत खुश हुई क्यों की मैं अब से सोच ली थी एक अच्छी ज़िंदगी जिऊंगी। अपने देवर के साथ लखनऊ घूमी खाना खाई। सिनेमा देखि और रात में घर आकर नए साल का खूब जश्न मनाई।

२ जनवरी की बात है। शाम को हम दोनों खाना खाकर छत पर टहलने गए , देवर जी जिनका नाम रवि है। उन्होंने पूछा भाभी आप एक बात बताओ क्या आपको ज़िंदगी में किसी चीज की कमी महसूस नहीं हुई ? मैं पूछी कैसी कमी तो वो बोला भैया का देहांत शादी के पंद्रह दिन बाद ही हो गया था। आप नई नवेली दुल्हन थी। लोग शादी इसलिए करते हैं ताकि उसको शारीरिक और मानसिक शांति मिल सके। पर आपको तो दोनों ही नहीं मिला आज आप 31 साल की हैं। आपको कभी नहीं लगा की इंसान की शारीरिक जरूरत पूरी करने चाहिए ? आप हमेशा अलग कमरे में सोये और मुझे अलग कमरे में सुलाय। आखिर क्या कारन है मैं जानना चाहता हूँ।

तो मैं बोली मैं आपके 21 साल होने का इंतज़ार कर रही थी। ताकि मैं आपके साथ ज़िंदगी जी सकूँ। मैंने प्रण की थी की मैं कभी भी २१ साल के पहले हाथ नहीं लगाउंगी और मुझे आपके भैया छुए थे और जब आप बड़े और जवान हो जायेंगे तो मुझपर अधिकार होगा। हम दोनों हवेली की छत पर ही ये सब बाते कर रहे थे। ये सब बात सुनकर देवर ही बोले तो मैं कल ही 21 का हो गया है आ २ जनवरी है तो आपने क्या सोचा? तो मैं बोली सेज सजा ली हूँ। गुलाब की पंखुड़ी पलंग पर है। आज से नई ज़िंदगी जीना चाहती हूँ आज अपना सारे ख्वाइश पूरी करना चाहती हूँ। अब मैं माँ बनना चाहती और आपको पति बनाना चाहती हूँ।

ये सुनकर वो मेरे आँखों में आँख डालकर खड़े हो गए मेरे गाल पकड़ लिए पर मैं बोली नहीं अभी नहीं मैं १० साल इंतज़ार की हूँ आज के लिए ऐसे छत पर नहीं। आप जाओ तैयार होकर आओ जैसे की दूल्हा आता है आपके लिए कपडे तैयार कर दी। कमला बाई आपका कपड़ा आलमारी में रख कर गई है। आप कमरे में बैठना मैं तैयार होकर आती हूँ।

और दोस्तों मैं करीब एक घंटे बाद वही सब कपडे जो मेरे शादी के दिन के थे वही पहन कर तैयार हुई सिंदूर लगाई। और कमरे में आ गई दूध का गिलास लेकर। मेरा देवर जो अब मेरा पति बन गया है। पाल पोस कर बड़ा की ताकि मैं पति बना सकूँ। दूध दी दूध पीया वो भी चकम रहे थे सिल्क के कुर्ते में। पलंग पर लेट गई पुरे कमरे में गुलाब की खुशबु आ रही थी।

उन्होंने मेरे ब्लाउज की डोरी पीछे से खोला। ब्रा का हुक खोला और पीठ पर किस किया मैं मचल गई। क्यों की मैं दस साल बाद रिश्ते बनाने जा रही थी। मैं गोद में लिटा लिए और अपनी चूचियां रवि के मुँह में दे दी। वो मेरी चूचियों को पीने लगा और मैं बाल सहलाने लगी वो हौले हौले दबा भी रहा था। मेरे मुँह से सिसकारिआं निकल रही थी। मैं पानी पानी हो गई थी। मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी मेरे पुरे शरीर में हलचल हो रही थी। मैं लेट गई और वो मेरे ऊपर चढ़ गया।

दोस्तों मैं अपने साडी को उतार दी पेटीकोट का नाडा ढीला कर दी। उसने खुद ही पेटीकोट खोला निकाला मेरे कमर से लाल लाल वस्त्र थे सारे। वो मेरी चूत को चाटने लगा। मैं उसके बाल पकड़ कर चटवाने लगी। मैं वासना की आग में धधक रही थी। अब मेरे से रहा नहीं जा रहा था। मैं बोली अब मेरी प्यास बजा दो और उसने अपना लौड़ा निकाला और मेरे चूत पर रख कर घुसा दिया। दोस्तों जिसको मैं बड़ा की आज उसी से जिस्म की गर्मी पूरी कर रही थी। जैसे आप बकरे पालते हैं और एक दिन काट कर खाते हैं। मैं भी आज वही कर रही थी।

वो मेरी चूचियों को दबा रहा था और मुझे चोद रहा था। मैं चुदवा रही थी। चूचियां मुँह में दे रही थी। हरेक तरफ से खुश कर रही थी। अनाड़ी था पर मैं उसे चोदना सीखा रही थी। और पहली रात को करीब 4 बार हम दोनों ने पति और पत्नी की तरह चुदाई की एक दूसरे को खुश की। दोस्तों आज से मेरी ज़िंदगी में एक नई खुशियां आई है। अब मैं अपने देवर को पति बना ली हूँ। आज इसलिए मैं आप सभी दोस्तों को नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर अपनी कहानी शेयर कर रही हूँ। आप सब मेरे लिए दुआ कीजिये ताकि मेरी ज़िंदगी अब अच्छी चले.

माँ को पत्नी बनाया पहले सुहागरात अब हनीमून पर हूँ

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जी हां दोस्तों मैं सच कह रहा हु, माँ को पत्नी बनाकर चोदा पहले सुहागरात मनाया फिर अब हनीमून पर हूँ  और चुदाई का आनंद ले रहा हु इस बरसात में। ये मेरी कहानी नहीं मेरी ज़िंदगी है आपको लगेगा की साला कितना हरामी है माँ को चोदता है पर हां दोस्तों ये सच है मैं माँ को चोदता हु और पत्नी भी बनाया हु अपने माँ को ये मेरी सच्ची कहानी है।

मेरी माँ चुड़क्कड़ किस्म की औरत है। पापा ने माँ को तलाक दे दिया और पापा दूसरी शादी कर लिए।  माँ अभी हॉट है वो सिर्फ 36 साल की है मैं 18 का हु। आखिर मैंने माँ  अपनी पत्नी कैसे मना और मुझे वो अपना पति कैसे बनाई उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

एक दिन की बात है।  मेरी माँ को दूधवाला लाइन दे रहा था। तो ये सब मुझे अच्छा नहीं लगा। मुझे लगा की अगर  मेरी माँ किसी बाहर बाले से चुद गई तो उसकी ज़िंदगी के साथ साथ मेरी भी ज़िंदगी खराब हो जाएगी।  तो मैं अपनी माँ से बात किया।  मैंने माँ से कहा माँ मैं आपसे कुछ बात करना  हु, मैं चाहता हु की हम दोनों की ज़िंदगी अच्छी चले, कभी कोई दिक्कत ना हो ना तो कभी हम लोगों की  इज्जत खराब हो इसलिए हम दोनों को ही कुछ सोचना होगा, माँ बोली ठीक है बेटा हम दोनों के अलावा और इस दुनियां में कौन है हम दोनों ही  तो हैं जो एक दूसरे का ख्याल रख सकते हैं। मैंने कहा माँ पर  मैं काफी दुखी हूँ  आपको दूधवाला ऐसे देख रहा था और आप भी वही झुक झुक कर दूध ले रही थी। मैं नहीं चाहता की मेरी माँ को कोई अपनी गन्दी निगाहों से देखे।

माँ  बोली बेटा क्या किया जाय पापा पहले ही छोड़कर चले गए और जितनी मेरी उम्र हो रही है उतने में तो कई लड़कियां शादी करती है।  मेरे भी कुछ अरमान है  मैं इतनी बड़ी ज़िंदगी को बिना सम्बन्ध के कैसे काट सकती हु। तो मैं बोला क्यों ना माँ आपको जिस चीज की कमी है उसकी मैं पूरा कर दू मैं भी तो बड़ा हो गया हु, मैं भी  सोच सकता हु क्या अच्छा है क्या बुरा। माँ बोली क्या तुम मेरा पति बनोगे ? मैंने कहा क्यों नहीं बन सकता बन सकता हु। और फिर वही से शुरू हो गई मेरी और  मेरी माँ की प्रेम कहानी।

और फिर क्या था  दोस्तों माँ ने मुझे तुरंत ही गले से लगा लिया और चूमने लगी। आज उनके चूमने का तरिका अलग था।  चूमती तो पहले भी थी पर आज  चुम्बन में वासना थी. वो मेरे  होठ को चूसने लगी और मेरे बाल  को सहलाने लगी। फिर मैं भी सहयोग करने लगा और चूमने लगा माँ मुझे  जोर से जकड़ ली और बेड पर ले गई।  और फिर मैंने माँ के कपडे एक एक एक कर के उतार दिए और चूमने लगी। तभी माँ हड़बड़ा  उठ गई और बोली अभी नहीं। आज मैं चाहती हु वही साडी पहनूं जो मैं सुहागरात के दिन पहनी  थी, रात को तुम दूल्हे के तरह  आना और मैं दुल्हन की तरह तुम्हारा इंतज़ार करुँगी।  मुझे भी ये आईडिया  अच्छा लगा। मैं तुरंत माल जाकर अपने  लिए कुर्ता पजामा लाया और  माँ भी ब्यूटी पारलर चली गई।  वो अपने बाल वगैरह साफ़ करवा के आई और  फेसिअल करवाई।  शाम हो गया था।  खाना बाहर  मंगवाकर खाया दोनों फिर वो अलग कमरे में सजने लगी और मैं अलग कमरे  में।  उसके बाद वो रेडी हो  गई।  रात के  करीब १० बज गए थे।  मैं माँ के कमरे  पंहुचा। वो बिच पलंग पर बैठी थी।  मैं जाकर घुघट उठाया और माँ ने मुझे एक ग्लास दूध।

फिर माँ का घूँघट उठाया और फिर होठ पर किश किया और फिर क्या था दोस्तों एक एक करके सारे कपडे उतार दिए और  लगा चूची को दबाने,  मेरी माँ काफी सजी हुई  थी बहुत ही हॉट लग रही मैंने भी अपने कपडे  उतार लिए और माँ के चुत को चाटने लगा।  माँ आह  आह उफ़ उफ़ करने लगी और वो काफी कामुक हो गई थी।  उसने मेरे लौड़े को मुँह में ले लिया और चूसने लगी।  फिर मैं भी जोर जोर से चूचियां दबाने लगा। ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

वो फिर बोली आज से तू मेरा पति भी है और बेटा भी,  अब मुझे चोद दो मन लो सुहागरात। और मैं माँ के चूत में लंड डाल दिया और चोदने लगा। रात भर हम दोनों चुदाई करते रहे रुक रुक कर।  दूसरे दिन हम दोनों मनाली आ गए हम दोनों माँ बेटा का हनीमून चल रहा है।  हम दोनों बहुत खुश हैं।

 

शादी में मिली नई नवेली दुल्हन की कामुक चुदाई

सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार। नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी को अपनी स्टोरी सुना रहा हूँ। मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी और कामुक स्टोरी पढकर सभी लड़को के लंड खड़े हो जाएगे और सभी चूतवालियों की गुलाबी चूत अपना रस जरुर छोड़ देगी।

मेरा नाम रिशांक है। मेरी उम्र अभी 28 साल है। मैं फतेहपुर में रहता हूँ। मै देखने में बहोत ही स्मार्ट और जबरदस्त पर्सनालिटी वाला बन्दा लगता हूँ। मेरी आकर्षक बॉडी को देखकर लड़कियां चुंबक की तरह खीचने लगती हैं। मैं बहोत ही हवसी इंसान हूँ। लड़कियों की चूत को मैं काट खाता हूँ। मेरे को चूत काट कर पीने में बड़ा मजा आता था। लड़कियां मेरे इसी अंदाज़ पर मरती थी। फ्रेंड्स ऐसा ही कुछ मेरे साथ सुहागरात के दिन भी हुआ। यह बात 2 साल पुरानी है। जब मेरी नई-नई शादी हुई थी। उससे पहले मेरे को चूत चोदने का बहुत ही अनुभव प्राप्त हो चुका था। लड़कियों की चूत कैसे मारी जाती है। यह मेरे को अच्छी तरह पता थी। मैंने अब तक कई सारी लड़कियों की चूत को फाड़ कर उसका उस का रस चखा है। लड़कियों को मेरे से चुदवाने में बड़ा मजा आता था। मेरे 7 इंच के लंड से वह खेल कर खूब मजे लेती थी। मेरे को भी होली की बूब्स खेलने में बहुत मजा आता था। दोस्तों मैं अपनी कहानी पर आता हूं।

जनवरी का महीना था। उस समय काफी ठंडी हो रही थी। 28 जनवरी के दिन मेरी शादी हुई थी। और 29 जनवरी को मेरी बारात विदा होकर घर आ गई थी। दिनभर मैंने खूब सोया था। क्योंकि मैं दो तीन 3 दिन का जगा हुआ था। रात की लगभग 8:00 बज गए थे मैं फिर भी बिस्तर पर पड़ा हुआ था। तभी मेरी बुआ मेरे को जगाने आई।

बुआ: रिशांक बेटा उठ जा तेरे कमरे में तेरा कोई इंतजार कर रहा है

मै: सोने दो बुआ मुझे कहीं नहीं जाना

बुआ: जाओ इतनी रात हो गई जो भी करना है वो अपने कमरे में जाकर करो

बुआ ने मेरे को जबरदस्ती उठाकर मेरे कमरे में धकेल कर बाहर से दरवाजा लॉक कर लिया। आज थकान की वजह से मेरा मौसम ही नहीं बन रहा था। मेरे को आज चुदाई करने का मन भी नहीं कर रहा था। मैंने अपना सिर बिस्तर की तरफ घुमाया मेरी बीवी पुष्पा बेड पर सजी-धजी बैठी हुई थी। पूरा बेड स्वर्ग की तरह सजा हुआ था। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियां बिखरी हुई पड़ी थी। जिन्हें देखकर मूवी में होने वाले सीन की याद आने लगी मैंने अपने आप को चुटकी काटी कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा लेकिन नहीं यह तो हकीकत था।

बिस्तर के चारों तरफ धागे से गुंथे हुए फूल रस्सियों की तरह बिस्तर के चारों तरफ लटक रहे थे। मेरी बीवी पुष्पा स्वर्ग की अप्सरा लग रही थी। शादी के लाल रंग के जोड़े में वो कमाल की दिख रही थी। उसने लहंगा चोली पहना हुआ था। उसका पूरा पेट खुला हुआ साफ साफ दिखाई दे रहा था। उसकी नाभि को देखते ही मेरा मौसम बनने लगा चूत की तरह उसकी नाभि की गहराई कुछ ज्यादा ही लग रही थी। मेरा मूड बनने लगा। पहली बार मैंने किसी की इतनी अच्छी नाभि देखी थी। मेरा मन से काट खाने को करने लगा। मैं उस के पास बिस्तर पर बैठ गया। मैंने उसके पेट पर अपना हाथ फेरते हुए उसे प्यार करने लगा।

वह धीरे-धीरे गर्म होने लगी। मैंने अपना सिर नीचे झुकाकर उसके पेट के बीच की गहरी नाभि को चाटने के लिए लगा दिया। अपनी जीभ को उसकी नाभि में घुसा कर चाटने लगा। वो बहुत जोर से सिसकारियां भरने लगी। मै उसकी नाभि की गहराई अपनी जीभ डाल कर नाप रहा था। नाभि को चाटने में बहोत ही मजा आ रहा था। वो अपना पेट सिकोड़ कर मेरे को अपने पेट में दबा रही थी। मैंने उसकी नाभि तो चूस डाली लेकिन अभी तक उसका चेहरा अच्ची तरीके से नहीं देखा था। नेट वाली चुन्नी में उसका चेहरा थोड़ा बहोत ही दिख पा रहा था। उसके चेहरे से घूंघट उठाने के लिए मैंने उसकी ठोड़ी को पकड़ते हुए उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाया। उसके घूंघट को उठाकर मैंने उसका चेहरा देखा। उसके गाल पर एक गजब की शाइनिंग दिख रही थी। गालो पर मसकारा लगाकर गालो को लाल लाल किये हुई थी। टमाटर की तरह गाल को किस कर लिया।

मै: क्या बात है जी शादी के मंडप में भी इतनी खूबसूरत नहीं लग रही थी तुम!

पुष्पा: मैं तो हमेशा ही ऐसे ही लगती हूं तुमने कभी ध्यान से देखा ही नहीं होगा

मै: पुष्पा क्या तुम अभी तक पूरी तरह से कुंवारी हो??

पुष्पा: हां मैं अभी पूरी तरह से कुंवारी हूं मैंने एक बार भी अब तक चुदाई नहीं की है

मै: तुम्हें सेक्स के संबंध में कुछ आता है

पुष्पा: हां मैंने ब्लू फिल्में देखकर सब कुछ किया है

मैं: पुष्पा तूने अकेले में सब कैसे कर लिया

पुष्पा: मैंने लंड की जगह मूली गाजर से काम चलाया था

मैं पुष्पा की बातों को सुनकर और भी जोश में आने लगा।

मै: चलो कोई बात नहीं आज तेरे को चुदाई का खेल दिखाता हूँ। तुम बस मेरा साथ देती रहना। फिर बहोत मजा आएगा

पुष्पा: ठीक है जी लेकिन धीरे धीरे करना। मेरी सहेलियां बता रही थी। चुदने में बहोत दर्द होता है

मै: पहले थोड़ा सा होता है लेकिन बाद में बहोत मजा आता है

वो मेरी बात मान गयी। पुष्पा की बातों में बचपना भरी हुई थी। वह अभी चुदाई के ज्ञान से अनजान थी। मैंने सोचा क्यों ना हो पुष्पा को हाथ चुदाई का ज्ञान दे ही डाला जाए। मैंने अपना कुर्ता उतारा और चुदाई करने के लिए तैयार हो गया। पुष्पा के गालो को देखते हुए उसे नीचे तक ताड़ने लगा। पुष्पा के चूचे मेरे को काफी उभरे हुए नजर आ रहे थे। 36 32 34 का गठीला बदन देखकर मेरा मन मचलने लगा। मैं उसके गदराये बदन पर अपना हाथ फेरने लगा। उसकी सांसे तेज होने लगी मैंने उसकी चुन्नी को उसके सर से हटाया। उसके सुनहरे बालों को देख कर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगा।

उसके गालों का तिल बहुत ही रोमांचक लग रहा था गुलाब की पंखुड़ियों की तरह उसके होठों को देखकर मैंने अपना आपा खो दिया। मैंने भी अपना होठ उसके गुलाबी होठों पर टिका दिया। मक्खन की तरह मुलायम उसके होठों पर मेरे होंठ ऊपर नीचे होने लगे। मैंने उसे किस करते हुए उसके होठों को चूसने लगा। कुछ देर तक पुष्पा चुप रहकर अपने होठों को चुसवाती रही। मेरे को उसके सॉफ्ट हॉट को चूसने में बहुत मजा आ रहा था। उसने भी मेरा साथ दे कर मेरा मजा डबल कर दिया। मैं और जोर-जोर से उसके होठों को चूसने लगा उसकी सांसे बहुत तेज हो गई पुष्पा के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी।

वो “……अई… अई….अई……अई ….इसस्स्स्स्…….उ हह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारी निकाल रही थी। होंठ चुसाई ने पुष्पा को बहुत गर्म कर दिया। मैंने भी वक्त जाया ना करते हुए उसकी चोली को खोलने लगा पीछे की डोरियों को खोलते ही वो ब्रा में हो गयी। उसके मम्मी देखने में बहुत ही ज्यादा टाइट लग रहे थे। वह दोनों ब्रा में कैद थे।मैंने उसकी ब्रा को निकाल कर उसके मम्मों को आजाद कर दिया पुष्पा के दूध पर काला निप्पल बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने पहली बार किसी लड़की के इतने गोरे गोरे मम्मे को देखा था। दूध की तरह गोरे उसके मम्मे को देख कर मुंह में पानी आने लगा।

मैंने उसे पीने के लिए अपना मुंह उसके निप्पल पर लगा दिया। भूखे बच्चे की तरह उसके निप्पल को मैं जोर-जोर से खींच खींच कर पीने लगा। पुष्पा ने मेरे बालों को पकड़ कर जोर-जोर से अपने मम्मों में दबाने लगी। उसे ऐसा करते देख मेरा जोश और भी ज्यादा हो गया। मैं और जोर-जोर से उसके मम्मों को दबा दबा कर पीने लगा। जोर से दूध पीते ही कभी-कभी मेरे दांत उसके निप्पल में गड़ जाते थे। पुष्पा “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज निकाल देती थी। कुछ देर तक उसके दूध को पीने के बाद मैंने अपने पजामे का नाड़ा खोला। और अंडरवियर में हो गया मेरा लंड थोड़ा बहुत खड़ा हो चुका था। मैंने अंडरवियर को अपने लंड से अलग किया मेरा लंड देखते ही पुष्पा चौक गई।

पुष्पा: उई माँ कितना भयानक सांप जैसा लग रहा है

मै: जरा हाथ लगा कर देखो और भी अच्छा लगने लगेगा।

पुष्पा मेरा लंड पकड़ कर मुठ मारने लगी मेरा लंड धीरे-धीरे मिसाइल की तरह खड़ा होने लगा, पुष्पा खड़े लंड को देख कर उसकी टोपी पर अपना मुंह लगा दिया। लॉलीपॉप की तरह मेरे टोपे को चूसने लगी। मेरे लंड का टोपा और भी ज्यादा फूल गया। उसने लगभग 5 मिनट तक लगातार मेरे लंड की जबरदस्त चुसाईं की। उसके बाद वह मेरे लंड को हिला हिला कर मजा लेती रही। जोर जोर से हिला हिला कर उसने मेरे लंड से पिचकारी निकलवा दी। मैं उसके चेहरे पर ही झड़ गया। पिचकारी के छूटते ही मेरा उसे चोदने का मन ही नहीं कर रहा था।

मैंने खुद को डाइवर्ट कर दिया। मैंने उसकी घाघरा को निकाल कर उसे पैंटी में कर दिया। वो और भी ज्यादा आकर्षक लगने लगी मैंने उसे सर से लेकर पांव तक किस करना शुरू किया पुष्पा एक बार फिर से गर्म होने लगी। पुष्पा बार-बार अपने गले पर हाथ रख कर खुद को सहला रही थी। मेरे को पता चल गया तो उसका सबसे फेवरेट अंग उसका गला है। कुछ दोस्तों ने मेरे को पहले बताया था। कि अगर लड़की को उसके फेवरेट अंग पर किस करो तो बहुत जल्दी गर्म हो जाती है। मैंने वैसा ही किया मैं उसके पतते से गले पर किस करना शुरू किया वो गर्म होकर अपनी चूत मसलने लगी। पुष्पा भी चुदने के लिए बेकरार हो गई।

मैंने उसकी तदप को और बढ़ा दिया। मैने पुष्पा के गले को किस करना बंद किया। उसकी चूत की तरफ जा कर मैंने उसकी टांगों को फैलाया। उसकी चूत बहुत ही चिकनी और साफ साफ दिखाई दे रही थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैं अपना मुंह उसकी चूत के छेद पर लगाकर चाटने लगा। चूत की दोनों दीवारों के बीच बनी हुई नालियों में मेरा जीभ ऊपर नीचे होकर उसकी चूत चटाई करनी शुरू कर दी। पुष्प मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में धकेलने लगी।

मैंने उसकी चूत के ऊपर उभरी हुई खाल को अपने दांतों से पकड़कर खींच खींच कर मज़े ले रहा था। वो जोर जोर से“..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अ अअअअ….आहा …हा हा हा” की सिस्कारियां भरने लगी। मैं अपना जीभ उसकी गीली चूत में घुसा कर उसके रस का रसपान कर रहा था।

पुष्पा: बस भी करो मेरे राजा चोद लो आज मुझे! और भी ज्यादा न तड़पाओ मेरे को! मेरी चूत में शोले भड़क रहे हैं

मैंने पुष्पा की चूत को पीना बंद कर दिया। उसकी चूत पर अपना मोटा लंड रगड़ने लगा। पुष्पा की चूत बहुत ही गर्म हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत में भड़के हुए शोले को खत्म करने के लिए अपना लंड उसकी चूत के छेद पर सटा दिया। मेरे लंड के ठीक निशाने पर ही उसकी चूत की छेद थी। मैंने जोर से धक्का मार कर अपना आधा से अधिक लंड उसकी चूत में घुसा दिया। पुष्पा के मुंह से चीखें निकल गई। वह बहुत तेज से“……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की आवाज निकालने लगी।

पूरा लंड घुसा कर ही मैंने चैन से सांस ली। मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला मेरा पूरा लंड उसकी चूत से निकले खून से मेरा लंड भीगा हुआ था। पुष्पा मेरे लंड को देखकर डर गई और भी ज्यादा तेजी से चीखने लगी। मैं खून से लथपथ लंड को पुष्पा की चूत में आगे पीछे करने लगा। धीरे-धीरे से उसकी चुदाई कर रहा था। वह भी सिसकारियां धीरे-धीरे से भरने लगी हम दोनों को खूब मजा आ रहा था। पुष्पा का चेहरा खूनी लंड को देखकर लाल-पीला हो रहा था। उसके माथे से ठंडी में भी पसीना छूट रहा था। मैंने भी पुष्पा की चुदाई की स्पीड थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ा रहा था।

मेरे को उसे चोदने के लिए और भी ज्यादा उत्तेजना होने लगी। मैंने अपनी स्पीड को बढ़ा दी। मैं जल्दी-जल्दी अपनी कमर उठा उठा कर उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था। पुष्पा पहली बार संभोग का मजा ले रही थी। उसकी“….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज से पूरा कमरा भरा हुआ था। मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था मेरे नीचे वो भी चित्त लेटी हुई थी। मैं उसे किस करते हुए उसकी चुदाई कर रहा था। वह भी अपनी कमर उठा उठा कर चुदवाने लगी शायद उसे अब इस दर्द में भी मजा आने लगा था।

चुदाई की स्पीड बढ़ते ही हम दोनों को और भी ज्यादा मज़ा आने लगा। मैं अपनी सिलाई मशीन की तरह अपनी कमर को उठा कर उसकी चूत को फाड़ रहा था। पुष्पा की सांस फूलने लगी उसने मेरे को अपने ऊपर से हटाया। मैंने भी उसकी एक टांग उठा दी और अपना लंड उसकी चूत में डालकर चुदाई करने लगा। अब मैं घुसुक घुसुक कर उसकी चुदाई कर रहा था। वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैं उसके फूले हुए मम्मो को दबा कर उस की जोरदार चुदाई कर रहा था। उसकी चूत की आज बाजा बज चुकी थी। अचानक से उसकी चूत से निकलने वाली आवाज बदल गई। पुष्पा झड़ चुकी थी उसकी चूत में गिरे हुए माल में भी और जोर से सम्भोग करने लगा। पुष्पा की चूत ढीली पड़ने लगी।

उसकी ढीली चूत की चुदाई करने में मजा नहीं आ रहा था। मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया। मेरे पूरे लंड पर सफेद रंग की क्रीम लगी हुई थी। मैं अपने क्रीमी लंड से उसकी गांड चुदाई करने के लिए उसे झुका दिया। उसकी गांड की छेद पर अपना लंड सटाकर धक्का मारने लगा। लेकिन उसकी गांड का छेद बहुत टाइट था। मेरा लंड वह आसानी से अंदर ही नहीं ले रही थी। पुष्पा की गांड में लंड को ढकेलते ही वो सी… सी… सी..चीख निकालने लगती थी। फिर भी कई बार की कोशिशों के बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड में घुसा दिया। वो जोर से “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” की चीख निकालने लगी।

मै भी बहोत ही मजे ले ले कर उसकी गांड चुदाई शुरू कर दी। उसकी गांड मेरे पूरे लंड को खा रही थी। मैने उसकी चुदाई को और भी ज्यादा कर दी। उसकी मटकती कमर को पकड़ कर अपना लंड जोर जोर से उसकी चूत में घुसा कर निकालने लगा। मैं अपने लंड को जड़ तक पेल रहा था। वो अपनी गांड को मटका कर “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाजो के साथ चुद रही थी। उसकी टाइट गांड की रगड़ को मेरा लंड भी ज्यादा देर तक बर्दाश्त ना कर सका। वो भी झड़ने की कागार पर पहुच चुका था।

मैंने अपनी पिचकारी उसकी गांड में छोड़ दी। कुछ देर तक तो मैं अपना लंड उसकी चूत में डालकर ही बिस्तर पर पड़ा रहा। मेरा लंड धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा। मेरे लंड के सिकुड़ते ही उसकी गांड से माल बाहर आने लगा। बिस्तर पर पड़े चादर पर माल बिखर गया। उसने चादर पर बिखरे हुए सारे माल को पोंछ कर उस पर लेट गई। उस रात मैंने उसे कई बार चोद कर सुहागरात का भरपूर आनंद लिया। आज भी हर रात मैं उसके साथ सुहागरात मनाता हूं। हम दोनों खूब इंजॉय करते हैं। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।

सुहागरात रात में पति ने दोनों छेद को चोद डाला

हाय फ्रेंड्स, आप लोगो का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में स्वागत है। मैं रोज ही इसकी सेक्सी स्टोरीज पढ़ती हूँ और आनन्द लेती हूँ। आप लोगो को भी यहाँ की सेक्सी और रसीली स्टोरीज पढने को बोलूंगी। मेरा नाम अवन्तिका है। आज फर्स्ट टाइम आप लोगो को अपनी कामुक स्टोरी सुना रही हूँ। कई दिन से मैं लिखने की सोच रही थी। अगर मेरे से कोई गलती हो तो माफ़ कर देना।
मै अभी अभी जवान हुई हूँ। मैं एक अमीर घराने से हूँ। मेरे पापा अमेरिका में डॉक्टर हैं। मै बहुत ही गोरी हूँ। लड़के मुझे देखते ही फ़िदा हो जाते है। मेरा बदन बहुत ही रसीला है। मेरे लिप्स तो एकदम गुलाब है। चूंचिया तो खरबूजे की तरह बड़ी बड़ी है। मेरी चूत भी बहुत लाजबाब है। इसका रस अभी तक बहुत कम ही लोगो को नसीब हुआ है। पूरा रस मैंने अपने होने वाले पति के लिए बचा कर रखा था। मेरी उम्र भी अब शादी की हो चुकी थी। मेरे सैयां जी के साथ सुहागरात का अवसर मुझे मिलने वाला था। मैं बहुत ही खुश थी। वो रात मुझे आज तक नहीं भूली जिस रात सैयां जी ने मेरा पहली बार काम लगाया था।
दोस्तों ये बात 2013 की है। जो की आज के 4 साल पहले की है। मेरे घर वाले मेरी शादी ढूंढ रहे थे। मै भी हर लड़की की तरह ख्वाब को सजा कर रखा था। अपने होंने वाले सैयां जी के साथ। फिर वो समय आया जब मेरी शादी तय हो गई। मेरा होने वाला पति किसी हीरो की तरह खूबसूरत था। उसकी पर्सनालिटी पर तो मै फोटो में ही देख कर फ़िदा हो चुकी थी। मैं तो उसे पाकर फूली नहीं समा रही थी। उसका घराना भी बहुत ऊँचा था। उसके पापा और मेरे पापा दोनों ही लोग अमेरिका में रहते थे।
वही उनकी दोस्ती हुई और रिश्तेदारी में बदल गईं। अब मेरी चूत का रिश्ता रितेश के लंड से हो गया था। हमारी शादी बड़ी धूम धाम से हुई। सुबह मै उनके घर विदा होकर आ गईं। सासू माँ ने और अन्य मेहमानों ने मेरा भव्य स्वागत किया। मै बहुत ही खुश थी। आज मैं चुदने वाली थी। मुझे आज जबरदस्त लंड मिलेगा। मै उसे खाने को बेकरार हो रही थी। फिर वो रात भी आ गयी। जिसका हर चूत को इंतजार होता है। जिस रात बीबी को लंड का दर्शन होता है। मै सज धज के अपने रूम में बैठी थी। मैं सुहागरात की सेज पर परियो सी सजी बैठी थी। अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही थी। रितेश आए और मेरे पास आकर मुझसे ज़माने भर की बात करने लगे। बातो ही बातो में वो रोमांटिक होने लगे। लेकिन मुझे तो इंतजार था कि वो कब अपना लण्ड मुझे दिखाएं। मगर मैं कैसे उनसे कहूँ की मुझे चुदने की बेचैनी हो रही है।
मैंने बहुत देर तक सोचा की क्या करूँ। अचानक मैंने एक आईडिया सोचा और धीरे-धीरे अपने गहने उतारने शुरू किए और अपनी साडी का पल्लू नीचे खिसका कर सीने से हटा दिया। ऐसा करते ही रितेश मेरी तरफ आकर्षित होने लगे। मेरे सफ़ेद बड़े-बड़े खरबूजे देख कर उनकी आँखे फटी की फटी रह गई। बिना पलक झपकाये मेरी चूंचियो को ताड़े जा रहे थे। उन्होंने मुझे बिना कुछ कहे उठा कर अपनी गोद में घसीटा और मेरी होंठो से अपने होंठ को चिपका कर मेरी सारी लिपस्टिक छुड़ा डाली। मेरे होंठो के लिप लाइनर को चूस लिया। अब मेरी देसी लुक उनसे भी देखी नहीं जा रही थी। मै अपना होश खो बैठी थी। मैं भी पागल सी हो गई और अपने हाथ उनके पूरे शरीर पर फिराने लगी। रितेश ने कब एक एक करके सारे कपड़े निकाल दिए मुझे तो पता भी नहीं चला कि उन्होंने कब का मुझे नंगी कर दिया था।
मैं तो उनके होंठों में ही गुम थी कि अचानक से एक ‘चटाक..’ से मेरे गांड में चोट सी महसूस हुई। मै चौंक गई। मैंने सकपका कर उनके होंठ छोड़ दिए और उनकी तरफ बुरी निगाहों से देखा.. तो वो मुस्कुरा रहे थे, बोले- ” क्या करूं अवन्तिका आदत से मजबूर हूँ। मुझे तुम्हारी गांड बहुत ही जबरदस्त लगी तो मार दिया। मुझे सेक्स करते समय कुछ भी होश नहीं रहता। मै क्या कर रहा हूँ। इस बात का मुझे पता ही नहीं चलता। मैंने भी मुस्कुरा दिया और कहा- कोई बात नही। मैं भी तुम्हारी तरह हूँ। मुझे भी कुछ होश नहीं रहता” मेरी गांड में कुछ लंबा मोटा सा महसूस हुआ। मैंने अपने ऊपर ध्यान दिया तो पता चला कि मैं उनके ऊपर नंगी बैठी हूँ। उनका लंड ही मेरी गांड में चुभ रहा था। मै उनकी गर्दन पर अपना हाथ टिका कर बैठी हुई थी।
मैं पूरी नंगी अपने पतिदेव रितेश की गोद में किसी बच्चे की तरह बैठी हुई थी। उन्होंने कुरता पायजामा अभी तक पहन रखा था। उनके कसरती बदन की मजबूती बाहर से ही महसूस हो रही थी। मगर उनका लण्ड देखने की चाहत अभी बरक़रार थी। हम दोनों खूब सेक्सी सेक्सी बाते करने लगे। वो मेरी चूंचियो के निप्पल को पकड़ पकड़ कर खीचते हुए मुझे गर्म कर रहे थे। मै“……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिकरिया भर रही थी। मेरी पेट खींचते ही सिकुड़ जाती। मेरा दिल धक धक कर रहा था। साँसे तेज होने लगी।
मैं उनकी गोद से उतरने ही वाली थी कि उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बोले- “अवन्तिका !! तुम मुझे एकदम देसी गाय की तरह लगती हो। एकदम मासूम सी चाहे जहाँ हाथ लगाओ। कोई विरोध नहीं करती” मैंने भी कहा- “और तुम मुझे देसी साँड़ के जैसे लग रहे हो। पीछे पड़े हो। हर पल मेरे गुप्तांगों को ही छू कर मजा ले रहे हो” रितेश हंस दिए। उन्होंने मुझे कस के जकड लिया। मुझे चिपकाते हुए फिर एक बार होंठो को चूसने लगे। इतना जोश तो मैंने पहले कभी किसी में नही देखा था। जोशीले होकर होंठो को ही काटने लगे। मै तड़पती हुई “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की मदमस्त आवाज निकाल रही थी। धीरे धीरे उनके होंठ मेरी शरीर के नीचे के अंगों की तरफ बढ़ने लगे। वो मेरी चूचियों को पकड़ कर मींजने और सहलाने लगे। उन्होंने अपना मुह मेरी गोरी गोरी चूंचियो के काले काले निप्पल पर लगा दिया। रितेश बछड़े की तरह निप्पल को खींच खींच कर मेरा दूध पी रहे थे। कुछ देर तक पीने के बाद मुझे अपनी गोद से उतार कर बिस्तर पर ही खड़े होकर अपना कुरता उतारने लगे। फिर बनियान और पायजामा उतार कर बोले- “लो जी अब तुम्हारी बारी आ गई”
मैं उनके बड़े से मोटे लंड को देख कर डर गई। मेरा सर उनकी जाँघों के पास था। रितेश अपना लंड चूसने और सहला कर मुठ मारने को कह रहे थे।
मैं बोली- “आज नहीं। ये सब कल से किया जायेगा”
उन्होंने बिना कुछ कहे मेरा सर पकड़ कर अपने लण्ड पर अंडरवियर के ऊपर से ही रगड़ना चालू कर दिया। बहुत ही जोश में दिख रहे थे। मेरे दिमाग में अजीब अजीब हलचल होने लगी। मैं भी मदहोश सी होने लगी। मैंने उनका अंडरवियर पकड़ कर नीचे किया तो मेरे होश उड़ गए। बाप रे इतना मोटा काला लण्ड करीब 5 इंच का था। खड़ा होता तो कितना बड़ा हो जाता यही सोचकर मेरा दिमाग खराब हो रहा था। मेरे शौहर और मेरा दोनों का रंग एकदम गोरा है। मगर पता नहीं क्यूँ उनका लण्ड एकदम भुजंग काला था। मैं उनका लौड़ा देख कर हल्के से चिल्ला पड़ी- हे भगवान् ये क्या है? इतना बड़ा लंड तो किसी का जल्दी खड़ा होने पर भी नहीं होता। रितेश मन ही मन खुश हो रहे थे। वो हंसे मगर बोले कुछ नहीं और मेरा सर पकड़ कर अपने लंड को रगड़ने लगे। मैंने जोर लगाने की कोशिश की मगर वो ज्यादा ताकतवर थे। मेरे होंठ न चाहते हुए भी उनके काले लंड पर घुम रहे थे। कुछ ही देर मे मै विरोध करते करते थक गई थी। फिर मुझे पता नहीं क्यों वो काला साँप जैसा लंड बहुत ही मेरे मन को भाने लगा। कुछ देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा, मैंने भी जोर लगाना बंद कर दिया। तभी रितेश ने मेरे बालो की चोटी को जोर से खींचा तो मेरी मुह से आह निकलते ही मेरा मुँह खुल गया। जैसे ही मेरा मुँह खुला वैसे ही उन्होंने अपना लण्ड अन्दर करके मे चुसाना शुरू कर दिया। मुझे उनका लंड मुह में रख कर बहुत बुरा लग रहा था। मुझे लगने लगा की उलटी हो जायेगी। मेरा पूरा मुँह उनके लंड से भर गया।
तभी रितेश के लण्ड ने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया। उसका साइज़ बढ़ने लगा। मेरी छोटी सी मुह में उनका बड़ा लंड बड़ा होकर मुझे तड़पाने लगा। मुझे लगा कि मेरा मुँह फट जाएगा। मैं छटपटा रही थी। हाथ-पांव पटकने लगी। मगर उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। वो मेरी तरफ ध्यान ही नही दे रहे थे।अब मुझे साफ-साफ महसूस हुआ कि उनका लण्ड मेरे गले से होता हुआ सीने तक चला गया है। मेरी आँखों से आंसुओं नदी बह पड़ी। मैं उनकी जाँघों पर मर रही थी। नाखून गड़ा रही थी। मगर उन पर कोई असर न हुआ। वो बेदर्दी मुझे दर्द देकर मार ही डालेगा। मेरा सांस लेना दुष्वार हो गया। वो मेरा सर दबाये हुए थे। मै कुछ बोल भी नहीं सकती थी। मैंने हाथ जोड़ लिए और उनसे लण्ड निकालने के लिए बड़ी ही नम्रता वाली नजरों से देखा। मेरी आँखों के आगे अब तक अँधेरा छाने लगा था। वो अचानक मुझे छोड़ दिया। बैठ कर उन्होंने मेरी गांड पर जमकर एक तमाचा मारा। मै उछल पड़ी। वो बोले- “क्यों कैसा लगा”
मै रो रही थीं। कहने लगे- “अब मानोगी न मेरी बात”
मैंने अपना सर हिला दिया। मैं बिस्तर पर धड़ाम से गिर पड़ी। मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था, मैं दमे के मरीज की तरह हांफ रही थी। इतने में पति बोले- “अब तू पूरी तरह से गाय लग रही है” वो मेरे दोनों हाथ फैला कर उनके ऊपर घुटने रख कर मेरे सीने पर बैठ गए। कहने लगे इसे अब चाट। जैसे तू गाय अपने बछड़े को चाटती है। चाट साली चाट…. अब मेरा दिमाग कुछ समझने के काबिल हुआ था। तो उनका सांडो वाला लंड देख कर मेरी आँखें चौंधिया गईं। कही मै सपना तो नहीं देख रही। मैंने अपने आँखों को मलते हुए उनका लंड देखा। करीब 10 इंच लंबा और 3 इंच मोटा काला लौकी जैसा लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था। मैं लण्ड देख के मेरी सिट्टी पिट्टी गुल थी। मेरे पति का लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था, मैं इतने बड़े लण्ड को देख कर हैरान थी। मेरे पति बोले- “चाट इसे जल्दी”
मैंने जल्दी से जीभ निकाल कर लण्ड चाटना शुरू कर दिया। वो बोले- “हाँ अब जाकर तू पूरी तरह से गाय बनी है” मैं रोती जा रही थी और लंड चाटती जा रही थी, मेरे दोनों हाथ उनके पैरों के नीचे दबे हुए थे। मेरे गोरे गालों पर उनका भारी लंड मुक्के की तरह पड़ रहा था। लगभग पांच मिनट बाद वो उठे और मुझे उठा कर गोद में बिठा लिया। अपने शेव किये चेहरे से मेरी चूंचियो पर मसाज करने लगे। कही कही की दाढ़ियां मेरी चूंचियो पर चुभ रही थी। उनका लण्ड ठीक मेरी चूत के नीचे था। उन्होंने मेरी दोनों टांगो को खोलकर जोर का झटका मारा। मै उछल पड़ी। जोर जोर से “आआआअ ह्हह् हह …..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उनके लंड का टोपा मेरी चूत में जाकर फंस गया।

वो और भी धक्का मार मार कर मेरी चूत में डाल डाल कर निकालने लगे। मै दर्द से तड़प रही थी। लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो मेरी चूत की फडाई में लगे हुए थे। मुझे लग रहा था। किसी ने लोहे का मोटा रॉड गर्म करके मेरी चूत में डाल दिया हो। मै भी चूत की दर्द को भूल कर चुदाई करवा रही थी। अचानक उनका मोटा काला लंड मेरी चूत में हलचल मचाने लगा। वो मुझे किसी कुत्ते की तरह जल्दी जल्दी चोदने लगे। सैयां जी की ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी। वो ब्रेक मारने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनकी स्पीड की रगड़ से मै बहुत परेशान हो गई थी। मैं दर्द से “उ उ उ उ उ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ… सी सी सी सी….. ऊँ— ऊँ… ऊँ….” की आवाज के साथ अपनी चूत फड़वा रही थी। मेरी गाड़ पर मार मार कर मुझे भी जोश दिला रहे थे। मेरी चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। मै उसे महसूस करने लगी।
अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा। मै भी अपनी चूत को उठा कर चुदवाने लगी। वो एंह…एंह करके मेरी चूत में अपना लंड हचक हचक कर पेल रहे थे। इतनी जोर की चुदाई ने तो मेरी जान ही निकाल दी। मुझे उसका लंड अब अच्छा लगने लगा। मैं उस लंड को खाकर मन ही मन खुश होने लगी। उसने अपने बल का प्रयोग करके मुझे अपने गोद में उठाकर चोदने लगा। मै भी उसका गला पकड कर उछल उछल कर चुदवा रही थी। वो मेरी गांड पर हाथ मार मार कर मुझे उछाल उछाल कर चोद रहे थे। कुछ देर बाद लंड की रगड़ मेरी चूत न सह सकी और अपना सफ़ेद मलाई निकाल दिया। मै झड़ गई। वो मेरी चूत को मलाई के साथ ही चोदने लगे। कुछ देर में उन्होंने मुझसे मेरी गांड चोदने को कहा। मै डर से हाँ करके बैठ गई। उन्होंने मुझे अपने खड़े लंड को गांड में डालकर उसपर ऊपर नीचे होने को कहा। मैं जैसा वो बोले करने लगी। उनका मोटा घोड़े जैसा काला लंड अपनी गांड में घुसाकर ऊपर नीचे होने लगी। जोर जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ मैं अपनी गांड खुद ही चुदवा रही थी। मैंने भी स्पीड बढ़ाई लेकिन इस बार वो भी जबाब दे गए। उनका लंड माल निकालने वाला था।
सारा माल रितेश ने मेरी गांड में ही डाल दिया। मै थक गई थी। मै बिस्तर पर गिर पड़ी। वो हसते हुए मेरे ऊपर पैर रख कर चूंचियो को दबाने लगे। उस दिन की चुदाई ने तो सब यादगार बना दिया। मै आज भी उस लंड से खूब खेलती हूँ। मेरी चूत का अब तक भोषणा बन चुका है। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए नॉन वेजस्टोरी डॉट कॉम पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।

सुहागरात पर जम कर चूदी पर चूत का सत्यानाश करवा लिया मैं

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम कशिश हे और मैं उत्तर प्रदेश से हु। मैं इस समय २५ साल की हूँ। ये चुदाई की कहानी आज हिंदी में आप के लिए ले के आई हो वो चार साल पहले की बात हे। तब मेरी शादी हुई थी। मेरा बदन तब एक फुल की पंखडी के जैसा कच्चा और कशिश था। मेरा फिगर तब ३२ २८ ३४ था। मेरे पति का नाम सुनील हैं जिसका बदन शादी के समय से ही भारी था।
मैं शादी के दिन के बाद काफी थक गई थी तो इसलिए मेरी आँख जल्दी लग गई और मैं नींद की आगोश में चली गई। और नींद में ही मुझे अचानक कुछ महसूस हुआ। मैं जब चौंक कर उठी तो मेरे पति मेरे पास बैठे थे और उसका हाथ मेरी पीठ को सहला रहा था। उनकी आँखों में देखने की मेरी हिम्मत नहीं थी। मुझे बहुत ही शर्म आ रही थी। और शायद वो भी मेरी हालत को समझ रहे थे।

अब उन्होंने मेरी थुड़ी को अपनी उँगलियों से पकड़ा और ऊपर उठाया और वो मेरी आँखों म देखने लगे। मैंने भी हिम्मत कर के उनकी आँखों म देखा तो उन्होंने एक पल वेस्ट किये बिना अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा दिया। वो मेरे गुलाबी और रस से भरे हुए होंठो को चूसने लगे।

उनकी किस में कुछ ज्यादा ही दम था। वो मुझे ऐसे चूस रह थे जैसे आज वो सब रस को चूस चूस के खाली कर देंगे। तभी वो किस करते करते मेरे ऊपर आने लगे तो मैं भी अपनी बाहों को खोल के उनके गले में दाल की उन्हें खिंच बैठी। मैं मस्तिया के उनका साथ देने लगी थी।

कुछ ही पलों में वो मेरे ऊपर थे और मैं उनके निचे चित्त लेटी हुई थी। अब मेरे पति ने एक हाथ से मेरे पल्लू को साइड में कर दिया और अगले ही पल मेरी एक चुन्ची को दबा दिया। मैं तो जैसे सिसक उठी। मुझे एकदम से अजीब सा मजा आने लगा और देखते ही देखते मेरी चुन्ची ब्लाउस के ऊपर से ही पति के हाथ में समा गई और वो जोर जोर से मुझे किस करते हुए बूब्स को मसलने लगे।

तभी मैंने किस तोडा और शर्माते हुए बोली, धीरे कीजिए न प्लीज़ मुझे दर्द हो रहा हे!

वो भी धीमी आवाज से बोले, मेरी जान दर्द का अपना अलग ही मजा होता हे सेक्स के अंदर।

ये कह के वो हलके से मुस्कुराए और अगले ही पल उन्होंने मेरा ब्लाउज और ब्रा को मेरी छाती से अलग कर दिया और मेरी छोटी छोटी चुन्चियों को देख के उनके चहरे पर किल्ला फतह करने वाली स्माइल आ गई।

मैं तो जैसे शर्म से लाल हो गई और मैंने साइड से चद्दर उठा कर अपने ऊपर ओढ़नी चाहि पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ। मेरे पति ने एक ही झटके में चद्दर दूर फेंक दी और मरी चुन्ची को अपनी उंगलियों में फंसा कर नोंच लिया।

उनके ऐसा करते ही मुझे एक झटका लगा और मैं उनकी छाती से लिपट गई। पति ने मुझे अपने सिने से अलग किया और वो नीची खिसक के मेरी एक चुन्ची को मुह में लेकर चूसने लगे और दूसरी को अपनी उँगलियों से नोंचने लगे।

मुझे एक तरफ मजा भी आ रहा था और दूसरी तरफ दर्द भी हो रहा था। पर पति को बचे की तरह मेरी चुंचियां चूसते हुए देख के मेरे अन्दर की गर्मी बढ़ रही थी और मेरे निपल्स अपनेआप ही हार्ड होते जा रहे थे।

सुनील के मुह से अपनी निपल्स को महसूस कर के मैं सिसक रही थी। और इसी गर्मागर्मी में मैंने सुनील की पेंट पार हाथ डाल दिया। एक ही झटके में मैंने उनकी पेंट खोल दी। सुनील ने भी मेरी चुन्ची चूसते चूसते पेंट निकाल फेंकी और अगले ही पल जब मैंने उनके अंडरवेर में हाथ डाला तो मैं दंग रह गई और अपना हाथ मैंने बहार खिंच लिया।

सुनील ने जैसे ही मेरी इस हरकत को देखा तो वो तुरंत अपने घुटनों की बल आ गए और उन्होंने अपनी चड्डी को नीचे खिसका दिया। ऐसा करते ही उनका लगभग ९ इंच का लम्बा लंड मेरी आँखों के सामने आ गया। उनका लंड लम्बा तो था ही पर वो थोडा टेढ़ा भी था जिसके कारण वो बहुत ही डरावना सा लग रहा था।

तभी सुनील ने मेरा एक हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रख दिया। और उसे आगे पीछे करने लगे। थोड़ी ही देर में मैं खुद ही पूरी तेजी के साथ उनके लंड की चमड़ी को पकड़ के आगे पीछे करने लगी थी।

अब सुनील ने मुझे लंड मुह में लेने का इशारा किया। पर मैंने ब्लोव्जोब के लिए मना कर दिया। और फिर एक मिनिट मी जब वही इशारा फिर से हुआ तो मैं मना नहीं कर सकी और मैंने उनके बड़े लंड को अपने मुहं में भर लिया।

उनके लंड से एक अलग ही सुगंध सी आ रही थी। और ये सुगंध मुझे उतावला सा कर रही थी। मैं अच्छे से उनके लंड को चूस रही थी। उनका लंड वैसे तो आधा ही मेरे मुहं में आ रहा था पर फिर भी वो बिच बिच में मेरा सर पकड के मेरे मुहं की चुदाई करने लगते और उनका आधे से ज्यादा लंड मेरे मुहं मी चला जाता था।

मुझे इसमें बहुत मजा आने लगा था। पर तभी उन्होंने मुझे पीछे किया और एक ही झटके में मेरी साडी, पेटीकोट और पेंटी मेरे बदन से अलग कर दी और मेरी टांगो को खोल के मेरी चूत के दर्शन करने लगे।

मुझे बहोत ही शर्म आ रही थी पर तभी उन्होंने अपनी एक ऊँगली को मेरी चूत में घुसा दी और मैं तो जैसे तिलमिला उठी। तभी उन्होंने मेरी चूत चाटना शरु कर दिया और मेरा मजा चार गुना हो गया।

देखते ही देखते वो मजे लेकर मेरी चूत चाटने लगे और उनका मजा मेरे मजे से डबल हो गया था। मैं बेड पर मस्ती से सिसक रही थी और चद्दर को नोंच रही थी और वो मेरी चूत के छेद से बहता हुआ पानी लगातार चाट रहे थे।

मैं मस्ती में आह आह बड़ा मजा आ रहा हे, आह आः ओह ओह ऐसे आवाज निकाल रही थी। और मैं साथ ही में उन्हें चूत को अन्दर तक चाटने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही थी। सुनील को चूत चाटने का सही ढंग पता था।

अब वो थोडा पीछे हटे और अपनी बाहों में किसी गुडिया की तरह मुझे उठा लिया। मैंने भी अपनी दोनों टांगो को उनके बदन की चारोतरफ लोक कर दिया। उन्होंने मुझे निचे बेड पर डाला और मेरे ऊपर आ गए। उनके वो टेढ़े लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के ढक्कन के एकदम सामने था और उसे टच हो रहा था।

इस से पहले की मैं कुक करती उन्होने निचे से एक धक्का लगाया और फ्क्कक्क्क से उनका आधा लंड मरी कशिश प्यारी चूत के अन्दर दरवाजे को तोड़ता हुआ घुस आया। मैं तो तिलमिला उठी — आह्ह्ह्ह हाई भग्वान्न्न्नन्न्न्न अआः मेरी माया सुनील आःह्ह्ह मर गई बाप रे, कितना दर्द हूऊऊओ रह्ह्ह्हह्ह हे, प्लीज़ निकल्लल्ल्ल्ल लो इसे।

सुनील बोले, मेरी रानी ये दर्द तो थोड़ी देर का हे तेरी सिल टूटी हे इसलिए और अब तुझे असली मजा आएगा मेरी जान।

मुझे इतना दर्द हो रहा था की मैंने सुनील की गोद से उतरने की कोशिश की और मैं उछल पड़ी। पर मेरी नाकामी मुझे बहोत महंगी पड़ी। मेरी पकड़ ढीली हो गई और मैं फिर से सुनील की गोदी में ही गिर पड़ी अब उनका पूरा लंड मेरी चूत में घुस चूका था। अं तो जैसे बेहोश ही हो गई।

अगले ही पल सुनील ने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी एक टांग अपने कंधे पर रख कर लंड एकदम टोपे तक बहार निकाला और एक जोरदार धक्के के साथ अन्दर घुसा दिया। मेरी तो मानो चूत फट ही गई इस धक्के से। मैं दर्द से तिलमिला उठी आह्ह्ह्ह मर गेई बाप रीईईईईई अह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊउ ईईईईइ, प्लीज़ धीरे से सुनील आआआअ दर्द हो रहा हे।

पर सुनील एक बेदर्द की तरह मेरी चूत धनाधन बजने लगे और फच फच फच की साउंड के साथ चुदाई करते गए। मेरी चीेखे जैसे कमरे की दीवारों इ समा रही थी।

मेरा दर्द भी ज्यादा देर तक नहीं टिका और सुनील के दर्द भरे धक्के कब मुझे मजा देने लगे पता ही नहीं चला। और अब मैं उन्हें पूरा सपोर्ट कर रही थी और जोर जोर से चुदवाने के लिए अपनी गांड को हिला रही थी। अब मैं उनका पूरा लंड चूत में घुस्वाना चाहती थी।

मुझे सपोर्ट करते हुए देख के सुनील का जोश भी डबल हो गया और वो पूरी तेजी से मेरी चूत बजाने लगे और चुदाई की आवाजें कमरे में एक मजेदार माहोल बनाने लगी।

मैं सिसक सिसक कर अपनी चूत मरवा रही थी और सुनील का लंड कभी अन्दर तो कभी बहार हो रहा था। ये मजा मुझे आज से पहले कभी नहीं मिला था इस से पहले मेरे दो बॉयफ्रेंड रह चुके थे पर ये ऐसा मुझे किसी ने नहीं चोदा था।

तभी मेरी चूत में पानी बहना शरु हो गया और सुनील सिसकियाँ लेते हुए मेरी चूत में ही झड़ गए। उनके लंड से निकल रही गरम गरम कामरस की पिचकारियाँ मुझे साफ़ महसूस हो रही थी।

सुनील ने मेरे अन्दर अपना बिज गिरा दिया और उसके बाद भी वो अगले मिनिट तक मुझे चोदते गए। और बाद में जब वो मेरे ऊपर से हेट तो मेरी चूत खून से सनी हुई थी। मैं वर्जिन तो नहीं थी पर फिर भी सुनील के मुसल लंड ने मेरी चूत का बाजा बजा दिया था।

सुहागरात में टूटी बीबी की सील

हेल्लो दोस्तों मैं आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करता हूँ। मैं पिछले कई सालों से इसका नियमित पाठक रहा हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ता हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी जिन्दगी की सच्ची घटना है।

मेरा नाम पुष्कर है। मैं मध्य प्रदेश में रहता हूँ। मेरा कद 5 फ़ीट 10 इंच है। मेरा लौड़ा भी 8 इंच का है। जो की मेरी तरहही गोरा गोरा है। मेरा लौड़ा बहुत ही तेजी से खड़ा होकर लड़कियों की चुदाई करता है। मैने अब तक कई भाभियों के साथ सेक्स करके उन्हें उसका आनन्द दिया है। भाभियों को चोदने में कुछ ज्यादा ही आता है। मैने अब तक भभियो जैसी चुदाई अपने गर्लफ्रेंड के साथ भी नहीं किया है। भाभियो को उनके घर पर चोदने में कोई डर ही नहीं रहता। गर्ल फ्रेंड को घर पर चोदने में कोई आ न जाये यही डर लगा रहता हैं। और दोस्तों जहां डर हो जाता है वहाँ सेक्स ठीक से नहीं हो पाता है। दोस्तों मैं अब अपनी कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों मेरी शादी इसी साल हुई है। मेरी दुल्हनिया विदा होकर घर आई। मम्मी ने अपनी बहू का अच्छे ढंग से स्वागत किया। बारात 12 बजे तक वापस आ गई थी। पूरा दिन मैंने सोया था। रात भर का जगा था। मुझे घर पर आते ही नींद लग गयी। मै सो गया। शाम को मैं सो रहा था। तो सभी लोग आकर  मुझसे कहने लगे। सो लो बेटा आज रात फिर से जागनी पड़ेगा। सभी लोग ऐसा कहकर मजा ले रहे थे। इतना कह कर सब लोग हंस पड़े। मै तो सोच में पड़ गया आखिर बात क्या है भाई सब लोग कह कर हंस क्यों रहे है। मैंने भी कुछ नहीं बोला चुप चाप वही लेटा रहा।

रात को मैं उठा। बॉथरूम में जाकर नहाया। फ्रेश होकर मै सबके  साथ खाना खाने बैठा। सभी लोग मेरी तरफ देख देख कर हँस रहे थे। मै अकेला चुप चाप बैठा खाना खाकर उठ गया। मैंने अपने रूम में ना जाकर मम्मी के रूम में जाकर सोने लगा। मम्मी डांटने लगी। मै बाहर बरामदे में सोने लगा। मम्मी ने मुझे वहाँ से भगा मेरे रूम के बाहर दरवाजे के पास ले आई। मम्मी कहने लगी तुम्हारा अंदर कोई इन्तजार कर रहा है। और तुम यहाँ वहाँ सोते फिर रहे हो। मम्मी ने मुझे डांटकर अंदर कमरे में करके दरवाजा बन्द कर दिया। मै कुछ देर तक दरवाजा खट खटाया लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। मुझे ये शादी मंजूर नहीं थी। लेकिन घरवालों के प्रेसर से मुझे ये शादी करनी पड़ी। मै और क्या कर सकता था। मैंने भी हाँ बोल के शादी कर ली।

तो मैंने भी कुछ नहीं कहा। मैंने अभी तक लड़की भी नहीं देखी थी। जयमाल के समय मैंने एक पल के लिए देखा था। लेकिन मैंने उसे गौर से नहीं देखा था। मैंने सोचा मेकअप में तो हर कोई अच्छा लगता है। शायद ये भी उसी तरह की हो। मेरी बीबी का नाम रूचि था। बिस्तर पर बैठी मेरा इंतज़ार कर रही थी। बिल्कुल फिल्मो की तरह। मैंने उसे न देखते हुए उसके बगल में जाकर लेट गया। मैंने अपना मुह घुमा लिया। रात के करीब 11 बजे थे। कुछ देर बाद रूचि मुझसे पूंछने लगी।

रुचि- “क्या बात है। आप मुझसे बोल क्यों नहीं रहे”
मैं- “चुप चाप लेट जाओ। मुझे कोई बात नहीं करनी”

रूचि- “मै अगर तुमको नहीं पसंद थी। तो शादी ही क्यों की मुझसे। तुम्हे ना बोल देना चाहिए था”
मै- “मुझे बोलने ही किसने दिया। किसी ने मेरी मर्जी भी नहीं पूँछी। मै क्या चाहता हूँ। बस यही बात बोल रहे थे सब। लड़की बहुत अच्छी है”
रुचि- “हाँ वो तो मै हूँ ही”

इतना कह कर रूचि भी मेरे बगल में लेट गयी। मै चुपचाप लेटा रहा। रूचि कुछ देर बाद सो गई। मैंने अपना मुँह उसकी तरफ किया। रुचि तो वास्तव में बहुत ही सुंदर लग रही थी। मैंने जैसा सोचा था वैसा कुछ भी नहीं था। रुचि का फेसकटिंग बहुत ही जबरदस्त थी। रूचि की नाक और उस पर पहनी नथ बहुत ही जबरदस्त लग रही थी। मैने उसको बहुत ही गौर से देखा। रूचि की चूंचियां ब्लाउज में उभरी उभरी लग रही थी। वो प्यारी और सुंदर दिख रही थी। मुझे रुचि को देख कर प्यार आने लगा। रूचि की चूंचियो को मैंने छूने के लिए अपना हाथ बढ़ाया। मैंने धीऱे से उसकी चूंची को दबाया। रूचि की चूंचिया बहुत ही सॉफ्ट थी। वो शादी के जोड़े में बहुत ही अच्छी लग रही थी। मै रूचि से चिपक कर करीब जाकर उसे देखने लगा। उसकी आँख कुछ देर बाद खुली तो मुझे खुद को देखते हुए बहुत ही खुश हो रही थी। मैं कुछ न बोल कर सिर्फ उसे देखता रहा। उसने मुझे देखता देख कर कहा- “क्या बात है अब बड़ा प्यार आ रहा है”

मै- “हाँ आ तो रहा है”

मैंने भी बात बनाई। मैंने कहा- “अब तो जिंदगी साथ गुजारनी है तुम्हारे साथ तो प्यार तो करना ही पडेगा। मैं इतना कह कर चुप चाप हो गया। रूचि भी मुझे देखने लगी। देखते ही देखते सुहागरात का माहौल बनने लगा। हम एक दूसरे की तरफ देखने लगे। मैं थोड़ा सा रूचि की तरफ खिसक कर चला गया। पूरा कमरा खूब अच्छे से सजाया गया था। बिस्तर पर गुलाब के फूल बिखरे पड़े थे। मुझे ये सब देख कर बहुत अच्छा लग रगा था। मुझे तो उसी पल प्यार हो गया जैसे ही मैंने उसे देखा था। मैंने रूचि को अपने सामने कर लिया और देखता रहा।

मैंने अपनी बीबी को बाहों में भर लिया। इससे पहले वो कुछ बोलती मैंने उसे सॉरी बोल दिया। रूचि का खुला मुह तुरंत बंद हो गया।
रुचि- “सच में आप मुझे प्यार करने लगे हो”

मै- “लेकिन मुझे नहीं पता था। मेरे घरवालों  मेरे लिए तेरी जैसी लड़की से मेरी शादी कर देंगे। मैंने तुम्हे पहले देखा होता तो शायद इतना कुछ हुआ ही ना होता” इतना कह कर मैंने उसे कस कर दबा लिया। उसने भी मुझे देख कर चिपक कर दबा लिया। उसका चिपकना बता रहा था उसने मुझे माफ़ कर दिया। मैंने अब तक उसे ना देखा  होता तो शायद उसकी पहली रात यानि सुहागरात का कोई आनंद न ले पाता। उसका चेहरा अपने सामने करके उसके होंठो को देखने लगा। क्या मस्त लग रही थी। मुझसे कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। मै किस करने को बेचैन होने लगा। उसने अपनी आँखे बंद कर ली। उसकी आँखों का काजल बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसके होंठ पर लगी लिप्स्टिक बहुत ही जबरदस्त लग रही थी।

मैंने उसके होंठो को देखा। लिप्स्टिक के साथ साथ रूचि के होंठो पर लगा लिप लाइनर बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने बिना कुछ सोचे समझे ही उसके होंठ पर अपना होंठ रख दिया। चूमने में बहुत ही अच्छा लग रहा था। चूमते ही उसके होंठ की कुछ लिप्स्टिक मेरे होंठ पर भी लग गई। मैं चूसने लगा। रूचि मेरा गला पकड़ कर अपने होंठो को चुसा रही थी। मैने  चूस चूस कर सारी लिपस्टिक छुडा दी। मैंने उसे अच्छे से किस करना सीखा दिया। किस करने से लग रहा था कि रूचि अभी तक इन सबसे अनजान थी। वो अपनी आँखे बंद करके मुझे किस कर रही थी। बहुत ही चुदासी होने लगी। रूचि की गर्म गर्म साँसे बहुत ही जोश दिला रही थीं। उसकी साँसों को महसूस करके मैंने रुचि की तरफ देखा। उसने शर्म के मारे अपनी आँखे झुका ली। मैंने उसकी आँखों में शर्म देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था। वो मुझे देखकर हँसने लगी.

मैंने रूचि से पूंछा क्यों हँस रही हो। वह मेरे होंठ पर लगी लिप्स्टिक को देखकर हँस रही थी। उसको हंसता देख कर लगरहा था कोई परी आ गई हो नीचे। उसकी हंसी बहुत ही किलर लग रही थी। उसकी चूंचियो की तरफ देखकर अपने हाथों से पकड़ लिया। वह अब भी शरमा रही थी। मैंने हाथों में लेकर खेलने लगा। उसके बूब्स बहुत ही मुलायम लग रहे थे।  उसकी चूंची को मैंने देखने के लिए ब्लाउज को निकाल दिया। उसकी ब्लाउज का हुक खोलते ही उसकी ब्रा दिखने लगीं। लाल रंग की ब्लाउज के नीचे लाल रंग का ब्रा बहुत ही रोमांचक लग रहा था। उसकी ब्लाउज को निकाल कर बिस्तर पर रख दिया। रूचि तो बहुत ही हॉट लगने लगी। उसके हॉट सेक्सी रूप को देख कर मेरा लौड़ा बेकाबू होता जा रहा था। उसकी चूंचियो को ब्रा ने कस कर दबा रखा था। उसकी चूंचियो को मैंने ब्रा से आजाद करने के लिए  अपना हाथ बढ़ाया। उसकी चूंचियो के ऊपर ब्रा की पट्टियां गोरे बदन पर बहुत ही अच्छी लग रही थी। मैंने उसकी ब्रा की पट्टियो पर हाथ चलाकर पीछे से रूचि की ब्रा का हुक खोलकर उसकी ब्रा को निकाल दिया। उसकी ब्रा को निकालते ही उसकी गोरी गोरी चूंचियां दिखने लगी। दोनों चूंचियां जैसे किसी गाडी के हेडलाइट लग रहे थे। गोरी चूंचियों पर काले कलर का निप्पल बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी हेडलाइट को दबा दिया।

मैंने रूचि के निप्पल को अपने मुह में भर लिया। वह सुसुक सुसुक कर “आई….आई.. .आई….अहह्ह्ह्हह. ..सी सी सी सी…हा हा हा…” करने लगी। मै जब भी उसकी चूंचियो को पीता था वह सिसकने लगती। बहुत मजा आ रहा था। रूचि पिलाने में आनंद ले रही थी। काफी देर तक पीने के बाद मैंने उसकी साडी निकालने के लिए उसको खड़ा  कर दिया। वह खड़ी हो गई। मैंने उसकी साडी को निकाल दिया। उसको सिर्फ पेटीकोट में कर दिया। उसे पेटीकोट में देखना अच्छा नहीं लग रहा था। मैंने रूचि की पेटीकोट को भी निकाल दिया। वो अब अपने सारे गहने को निकालने लगी। तब तक मैं उसकी गांड़ को पैंटी के ऊपर से ही सहला रहा था। उसने बिस्तर के बगल टेबल पर अपने गहने रख दिये। मैंउसे चोदने को बेकरार होने लगा। उसकी हेडलाइट दबाने जे बाद मेरे अंदर करंट दौड़ने लगा।

मैंने भी अपना पैंट निकाला। मेरे पैंट को निकलते ही मेरा लौड़ा कच्छा फाड कर बाहर आने को तैयार था। वो मेरे लौड़े का क्रिया कलाप देख कर डर रही थी। उसको मैंने लौंडा दिखाने के लिए अपना कच्छा निकाला।  निकलते ही मेरा लौड़ा खड़ा होकर उसके सामने प्रस्तुत हो गया। उसने लौड़ा बहुत ही गौर से देखना शुरू किया। मैंने हाथों में पकड़ा दिया। उसने डरते हुये पकड़ लिया। मैंने उसका डर छुड़ाते हुए अपना हाथ उसकी हाथ पर रख कर अपना लौड़ा आगे पीछे करवाने लगा। उसका डर ख़त्म हुआ।

उसने मुठ मार मार कर मेरा लौड़ा बड़ा कर मोटा कर दिया। मैंने रुचि को लौड़ा चूसने को कहा। उसने चूसने से मना कर दिया। मैंने उसको बिस्तर पर लिटाकर उसकी पैंटी को निकाला। मैंने उसे अपने नाक में लगा कर सूंघा। उसकी पैंटी से बड़ी मादक खुशबू आ रही थी। उसकी चूत को देखने को मैं बेकरार था। उसकी दोनों टांगों को फैला दिया। टांगोंके बीच में छुपी चूत दिखने लगी। उसकी चूत पर बहुत गजब की चमक थी। देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया। उसने एक दो दिन में ही अपनी चूत के बालों को हटाया था। मुझे साफ़ चिकनी चूत को देख कर मुह में पानी आ जाता है। मैंने तुरंत ही उसकी चूत में अपना मुह लगा कर  चाटने लगा। मुझे चाटने में बहुत ही मजा आ रहा था। मैने उसकी चूत के दोनों टुकड़ो के बीच की दरार में अपनी जीभ नीचे से ऊपर करके चाटने लगा। मेरे ऐसा करने पर रूचि की चूत ने अपना गर्म गर्म ताजा माल निकाल दी। मैंने उसके चूत के रस का रसपान किया। बहुत ही मीठा स्वाद लग रहा था। मैंने साऱा माल चाट लिया। मै उसकी चूत के दाने को पकड़ कर खींच कर अपने दांतों से काट कर चूस रहा था।

रूचि मेरा सर पकड़ कर दबा देती और“ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्हआआआअह्हह्हह… अई…अई….अ… उ उ उ उ उ..” की आवाज निकाल रही थी। वह चुदवाने को तड़प रही थी। उसकी तड़प मुझसे देखी नहीं गई। मैंने अपना लौड़ा उसके चूत के छेद पर रख कर रगड़ने लगा। उसकी चूत गर्म होकर लाल हो गई। उसकी छेद में अपना लौड़ा डालने को मैं भी बेकरार होने लगा। रूचि की चूत में अपना लौड़ा घुसाने की कोशिश करने लगा। मेऱा लंड उसकी चूत में घुस ही नहीं रहा था। मैंने बहुत धक्का मारा लेकिन हर बार मेरा लंड बाहर आ जाता था। मैंने गुस्से में आकर खूब तेज धक्का मारा। मेरे लौडा टोपा सहित थोड़ा सा  अंदर घुस गया। रूचि जोर से“….मम्मी…मम्मी…सी सी सी सी…हा हाहा ….ऊऊऊ …ऊँ…ऊँ. .ऊँ…उनहूँ उनहूँ…”की चीख निकालने लगी। मैंने सोचा यही दर्द पर और दर्द दे दूं नहीं तो बाद में और चिल्लयेगी। मैंने अपना लौड़ा धक्का मार कर पूरा अंदर कर दिया।

उसके दर्द के कारण मैं धीऱे धीऱे चुदाई करने लगा। उसने चिल्ला चिल्ला कर पूरा कमरा भर दिया। हर तरफ बस उसी की आवाज गूँज रही थी। कुछ देर बाद उसे उसकी चूत के  दर्द से छुटकारा मिल रहा था। मैंने लौड़े पर कुछ गीला गीला लगा महसूस किया।  मैंने  उसकी चूत से लौड़ा निकाला। पूरा लाल लाल हो गया था। उसकी सील टूटने से निकला खून मेरे लौड़े को रंग दिया। सारा खून बिस्तर पर लगता उससे पहले मैंने पास में रखे पेपर को रूचि की चूत के नीचे लगा दिया। उसको मैंने बिस्तर से नीचे उतार कर टेबल के सहारे खड़ा किया। रूचि टेबल पकडे खड़ी थी। मैं उसके पीछे खड़ा हो गया, उसकी चूत में अपना लौड़ा डाल कर जोर जोर से चुदाई करने लगा। वह भी“ हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ …ऊँ… ऊँ… ऊँ  सी सी सी सी… हा हा हा… ओ हो हो…” की आवाज के साथ चुदवा रही थी।

मैंने उसको टेबल पर लिटा कर उसकी कमर को पकड़ कर जबरदस्त  चुदाई करने लगा। उसकी तेज चुदाई से मेरा लौड़ा जल्दी ही स्खलित होने वाला हो गया। मैंने अपना लौड़ा रूचि की चूत से बाहर निकाल कर उसकी चूत पर ही झड़ दिया। हमने एक दूसरे को साफ किया। दोनो लोग खूब थक गए थे। हम लोग नंगे ही लेटे रहे। मैंने कुछ देर बाद उठ कर एक बार फिर से चुदाई की। उसके बाद मैंने उसकी गांड़ मारी। हम दोनों रात भर खूब चुदाई करते हैं। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।

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