चाचा के ठरकी लड़के ने लंड चुसाकर चुदाई की


हेलो दोस्तों मैं आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालो से इसकी नियमित पाठिका रही हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी सेक्सी स्टोरीज नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी कहानी सूना रही थी। आशा है की ये आपको बहुत पसंद आएगी।
मेरा नाम मरियम हैं। मेरी उम्र अभी 22 साल की है। मै कश्मीर में रहती हूँ। मै बहुत ही हॉट लगती हूँ। मेरी चूंचियां बहुत ही लाजबाब हूँ। लाल लाल मेरे होंठ बहुत ही आकर्षित करते हैं। लड़को का लंड खड़ा करवाने में मुझे एक भी सेकंड नहीं लगता है। मेरी चूंचियां हिलकर खूब धमाल मचाती हैं। मै अब तक कई लड़को को अपनी चूत का दर्शन करा चुकी हूँ। मेरे पीछे अक्सर लड़को की लाइन चोदने को लगी रहती है। मै भी चुदने को हमेशा तैयार रहती हूँ। एक दो बार मैं चुदाई करते पकड़ी भी गई हूँ। लेकिन उन्हें भी अपनी चूत का दर्शन करा के बच गई थीं। मै घर में बहुत ही शरीफ बनकर रहती हूँ। मेरा असली रंग तो बाहर के लड़के ही जानते हैं। जवानी की चुदने की तड़प भी बड़ी अजीब होती है। कितना भी चुद लो लेकिन ये प्यास कभी बुझती ही नहीं। लड़के तो हमेशा मेरी मटकती गांड पर कमेंट करते रहते हैं।
दोस्तों मै बहुत ही गरीब घर की हूँ। लेकिन कोई मुझे देखकर नहीं कह सकता कि मैं ऐसे घर में रहती हूँ। मै किसी परी से कम थोड़ी ना हूँ। स्कूल में जब मैं इंटर में पढ़ती थीं। तभी से मेरी चुदाई की दास्तां बनने लगी। मै पैसे पर भी चुद जाती थी। बड़े बड़े घर के लड़के चोदने के लिए लाइन लगाये रहते थे। मुझे भी चुदाई करवा के मजे के साथ साथ पैसा भी मिल जाता था। किसी तरह से ऐसे तैसे जिंदगी चल रही थी। लेकिन मेरी जवानी के दीवाने मेरे घर के ही लोग हो जायेंगे मैंने कभी सोचा भी नहीं था। पहले भी मुझे मेरे घर में ही चाचा का लड़का मुझे घूरता रहता था। उनका नाम शिशुपाल था।
वह कुछ दिनों के लिए बाहर गया हुआ था। जब वापस घर आया तो मुझे फिर से वैसे ही देखने लगा। हमेशा मेरे पीछे ही पड़ा रहता था। जहां भी मैं जाती वहाँ आ जाता था। मेरा तो बाहर किसी लड़के से मिलना मुश्किल हो गया। बाहर हमेशा मेरे साथ जाया करता था। मैं किसी तरह से चोरी चुपके से लड़को को अपनी चूत का दर्शन करा आती थीं। लेकिन शिशुपाल के आते ही ये काम मुझे मुश्किल लग रहा था। अब मुझे किसी से सेक्स करने में बड़ी समस्या आने लगी।
उसकी आँखे बता रही थी की वो भी मुझे पेलने वाले लड़को की लाइन में लगा है। रोज मेरे लिए कुछ न कुछ लाकर मुझे इम्प्रेस करने की कोशिश करता रहता था। मै उससे चुद जाती लेकिन वो चाचा का लड़का था। रिश्ते में मेरा भाई था। इसी डर के कारण मैं उससे नही करवाना चाहती थी। कभी पीछे से आकर मुझे चिपका लेता तो उसका खड़ा लैंड मेरी गांड में चुभने लगता था। मैं उससे दूर हट जाती थी। पीछे से पकड़ते ही उसका हाथ मेरी चूंचियो के ऊपर ही रहता था। उसे दबा भी देता था। कभी कभी जल्दी में छूकर मेरी चूँची की मुलायमता को महसूस कर लेता था। शिशुपाल लगभग मुझसे तीन साल का बड़ा भी था।
हमारे घर के सभी लोग अभी एक साथ ही रहते हैं। हम लोग साथ ही लेटते थे। मै उसे अक्सर मुठ मारते हुए देख लेती थी। मेरे रूम में जाकर मेरी ब्रा पैंटी से खेलकर मुठ मारता था। मुझे तो पता ही था कि किसी न किसी दिन ये मुझे चोद ही देगा। लेकिन इतनी जल्दी ये नहीं पता था। काफी दिनों से साथ होने पर मेरी भी ठुकाई ढंग से नहीं हो पाती थी। मैं भी बेकरार रहने लगी। मैंने सोचा क्यों न किसी तरह शिशुपाल से अपनी चुदाई की प्यास बुझवा लिया करूं। शिशुपाल हमेशा की तरह आज भी मेरी ब्रा से खेलकर मुठ मार रहा था। मैं चुपके से इस कमरें में पहुच गई। मुझे देखकर वो चौक गया। जल्दी से अपना पैंट की चैन बंद करके खड़ा हो गया। लेकिन मेरी ब्रा को हाथो में ही पकडे रह गया। जब उसने ध्यान दिया की वो अपने हाथ में कुछ लिया हुआ है उसे डरा हुआ देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था। गोरे गोरे गाल डर से लाल लाल हो गए। मैने उससे पूछा- “तुम यहां मेरे कमरे में क्या कर रहे थे। और ये मेरी वो ….”
शिशुपाल- “मरियम मै वो…. तुम्हारे रूम में कुछ लेने आया था तुम्हारी ब्रा गिरी पड़ी थी तो मैं उसे उठा कर टांगने जा रहा था” मैंने उसके हाथों से अपनी ब्रा छुड़ाकर ले ली। वो शरमा कर चला गया। मैंने देखा तो मेरी ब्रा गीली गीली लग रही थी। मुझे पता हो गया माल गिरा कर गया है अपना। माल भी उसका बहुत गाढ़ा था। मैंने उसे सूंघकर चाट लिया। पहले शिशुपाल मुझे बहुत घूर घूर कर देखता था लेकिन अब पता नहीं क्या हो गया। वो डर के मारे मेरी तरफ देख ही नहीं रहा था। मैं भी अब उसके माल का रसपान करना चाहती थी। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा।
अब वो भी मुझसे आँख मिलाने लगा। लेकिन कुछ कह नहीं पा रहा था। कुत्ते की पूंछ की तरह था। फिर से जैसा पहले जैसा ही हो गया। मेरी चूंचियो को पकड़कर दबा देता था। मैं भी उसका कोई विरोध नही करती थी। जब तक चाहता था मेरी बूब्स के ऊपर हाथ रख कर पकडे रहता था। घर वाले यही समझते थे बहुत प्यार है दोंनो में। ये उनको नहीं पता था कि मुझसे नहीं मेरी चूत से प्यार करना चाहता था। एक दिन मेरे घर कुछ मेहमान आये हुए थे। मम्मी के साथ ही उनमें से एक लोग लेटना चाहती थी। मम्मी के साथ ही मैं लेटती थी। लेकिन मैं मना भी नहीं कर पाई। मैंने सोचा क्यों न आज शिशुपाल भाई के साथ उनके बिस्तर पर रात बिताऊं। उसका कमरा घर से बाहर था। एक रूम घर से बाहर बना हुआ था। वहाँ पर सिर्फ शिशुपाल ही रहता था।
मैं- “मम्मी आज मैं शिशुपाल भाई के पास उनके रूम में लेट जाती हूँ। आप लोग यही लेट जाओ”
मम्मी- “ठीक है बेटा पहले पता तो कर लो शिशुपाल अपने रूम में तुझे लिटायेगा भी”
मै- “हाँ लिटा लेगा”
मैंने ऐसा बिना सोचे समझे ही बोल दिया। मुझे भी पता था ऐसा मौका कोई नहीं छोड़ता है। रात का खाना खाने के बाद उसके रूम में मै लेटने चली गई। लेकिन उसे रूम में न देखकर मेरी बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी। उसके बिस्तर पर मुझे कहाँ नींद अकेले आने वाली। उसके साथ तो आज पूरी रात जागने का इरादा था। कुछ देर बाद शिशुपाल अपने रूम में आया। तब तक घर का दरवाजा बंद हो गया था।
शिशुपाल- “तुम यहां क्या कर रही हो”
मै- “घर में मम्मी के साथ जो आई है वो लेट गई हैं। तो मै यहां चली आयी हूँ”
उसने कुछ नहीं बोला। चुपचाप बिस्तर पर आकर लेट गया। उसके कमरे में टीवी भी लगी थी। उसने ऑन किया। जिस चैनल पर सबसे हॉट हॉट लड़कियों का दृश्य देखने को मिलता लगा कर थोड़ी देर देख कर काट देता था। रात के 11 बज गये।


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हम दोनों को नींद नहीं आ रही थी। मै झूठ मूठ का सोने का नाटक करने लगी। क्योंकि मुझे पता था मुझे सोता समझकर कुछ ना कुछ तो करेगा। कुछ ऐसा ही हुआ। दो तीन बार मुझे जगाया। लेकिन जब मैंने कुछ नही बोला तो उसे लगा की मैं सो गई। शिशुपाल अपनी पैन ड्राइव लगाकर ब्लू फिल्म देखने लगा। आज तो मैं भी उसके पास थी। उसने चादर ओढ़कर अपना पैंट निकाल दिया। उसका लंड मै अपनी आँखों को थोड़ा सा खोलकर देख रही थी। मैं भी ब्लू फिल्म देखकर गर्म हो रही थी। कुछ देर बाद नंगे ही उठकर उसने दरवाजा बंद किया। बाप रे उसका इतना बड़ा लंड होगा मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था। लगभग 12 इंच का लंड हिलाते हुए अपने बिस्तर पर आकर लेट गया।
फिर से चादर ओढ़कर उसका तंबू बना दिया। चादर के अंदर कुछ हलचल मची हुई थी। मैं अपना मुह घुमाकर लेट गई। उसने भी अपना लंड मेरी चूत में लगा कर मुठ मारना शुरू कर दिया। मुझे भी अब रहा नहीं जा रहा था। लेकिन फिर भी किसी तरह से मै खुद को रोक रही थी। मैंने अपना मुह उसकी तरफ घुमाकर पैर को उसके ऊपर लाद दिया। मेरी टांगो के बीच का छेद मेरी चूत उसके लंड के निशाने पर आ गई। धीरे धीरे हिलकर वो मुझे चोदने लगा। कुछ देर बाद उसने अपने होंठ को मेरे होंठ से चिपका कर किस करने लगा। मैंने अपनी आँखे खोल दी। उसने तुरंत ही चादर ओढ़कर अपना 12 इंच का लंड ढक लिया। वो जान गया मैंने देख लिया है।
शिशुपाल- “मरियम वो वो मै कुछ नहीं कर रहा था। चींटी ने काट लिया था। तो खुजली हो रही थी”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- “खुजली चींटी के काटने से हुई है। या किसी और चीज से ही रही है”
शिशुपाल- “मै कुछ समझा नहीं”
मैं- “मुझे चूतिया न बनाओ। मैंने सब कुछ देखा है। तुम क्या करना चाहते हो मेरे साथ”
शिशुपाल- “कुछ नहीं वो तो मैं वैसे ही कर रहा था। मैं सच बोल रहा हूँ”
मैंने उसे डराया की सबको घर में बता दूँगी। इतना कहते ही वो मुझे चिपका कर कहने लगा- “तुम क्या बताओगी मुझे? अगर मैंने तुम्हारे बारे में सबको बता दिया। तो तुम्हारा क्या होगा”
मै- “क्या कह रहे हो तुम? मैंने क्या किया है”
शिशुपाल- “मै जब से आया हूँ। तुम्हारे ही पीछे लगा हूँ। वो पास वाले घर में जो लड़का है उसके घर में क्या करने गई थी तुम”
मै कुछ न बोल सकी। मैंने अपना सर नीचे कर लिया। अभी तक मैं उसे ब्लैकमेल करने के चक्कर में थी। लेकिन उलटा मै ही फंस गईं।
उसने कहा- “इतना सबको मजा देती हो थोड़ा सा हमे भी दे दो। मै किसी से कहूंगा नहीं”
मैंने भी सोचा भाई जिसमें खुश उसी में मै भी खुश। मैंने भी हाँ बोल दिया। मै कभी कभी रात में गर्म हो जाती थी। तो सोचा यही आकार ठंडी हो लिया करूंगी। शिशुपाल ने अपना होंठ फिर से लगाकर होंठ चुसाई करने लगा। कुछ देर तक तो मैं चुप रही। लेकिन बाद में मुझे भी मजबूर होकर चूसना पड़ा। मेरी गुलाबी नाजुक पंखुड़ियों जैसे होंठो को चूस चूस कर भौरे की तरह उसका रस निकाल कर पी रहा था। मै तो हल्का सा सहारा पाकर ही गर्म हो जाती हूँ। मैं खूब मजे लेकर चूस रही थी।

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उसने मेरे गले को किस करके चूसने लगा। पहली बार मुझे कोई इस तरह करके गर्म कर रहा था। मेरी चूत में खुजली होने लगी। मैंने अपना एक हाथ डालकर चूत खुजाने लगी। शिशुपाल भाई मुझे तड़पा रहे थे। मैंने उस दिन लाल रंग का टी शर्ट और नीले रंग की हॉफ बरमूडा पहना हुआ था। मेरी आधी टांगो को किस करता हुआ। मेरी चूत की तरफ बढ़ रहा था। चूत पर पहुचते ही कुछ देर किस किया। उसके बाद मेरी टी शर्ट को निकाल दिया। मेरे दोनों गोरे गोरे ख़रगोश जैसे मम्मे दिखने लगे। काले रंग की ब्रा में मम्मे बहुत ही आकर्षक दिख रहे थे। शिशुपाल उनकी बड़ी तारीफ़ कर रहा था। ब्रा को निकाल कर दोनों बूब्स को आजाद कर दिया। उसे खूब दबाकर पिया। चूंचियो को काट काट कर पीते ही मैं जोर से “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की आवाज के साथ आहे भरने लगती थी।
उसके बाद सारे कपडे बरमूडा पैंटी एक एक करके निकाल कर मुझे नंगा कर दिया। मेरी गोरी चिकनी चूत पर मुह लगाकर खूब चूम चूम कर चुसाई की। मेरी मुह से “अई…..अई…. अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” की सिसकारियां निकलने लगी। मै चुदने को तड़पने लगी। उसने अपना लंड मुझसे खूब चुसवाया। मुझे उसका लंड चूस कर बहुत मजा आया। मेरी टांगो को फैलाकर मेरी चूत पर अपना लंड रख कर खूब जोर से रगड़ने लगा। मेरी चूत गर्म होकर लाल लाल हो गई। उसने धक्का मार कर अपने लंड का सुपारा मेरी चूत में डाल दिया। मै जोर जोर से “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की आवाज की चीख निकालने लगी।


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उसने मेरा मुह पकड़ कर दबा लिया। धक्के पर धक्का मार कर अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मै दर्द से सिमट रही थी। वो अपने 12 इंच के लंड को पूरा घुसाकर खूब अच्छे से चुदाई कर रहा था। पहले तो मुझे बहुत दर्द हो रहा था। लेकिन इस दर्द से कुछ ही पलों में छुटकारा मिल गया। मई भी अपनी चूत को उठा उठा कर चुदवाने लगी। अब चीख की आवाज जोशीली आवाज में बदल गई। मै अब “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ उसका साथ दे रही थी। आज वो भी अपनी इस चुडक्कड़ बहन के साथ चुदाई करके बहुत खुश हो रहा था। मुझे उसका लंड बेहद पसंद आ गया। उसने मेरे टांगो को उठा कर खूब चुदाई की। बाप रे उसका लंड अब भी।मेरी चूत को उसी तरह से फाडने के कार्य को जारी किये हुए था। मैंने आज तक इस तरह से नहीं चुदवाया हुआ था। उसने मुझे झुकाकर मेरी चूत को फाडने में लगा रहा। जोर जोर की चुदाई से मेरी चूत दुप दुपाने लगी। घच घच की आवाज से पूरा कमरा भर गया। ये आवाज धीरे धीरे तेज होने लगी। मै झड़ने वाली हो गई।
कुछ देर में मै “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज के साथ झड़ गई। मेरी चूत से टप टप करके बूंदे गिरने लगी। शिशुपाल एक एक बूँद को चाट लिया। उसने चूत का कचरा करके। मेरी गांड को अब अपना शिकार बना रहा था। गांड के छेद पर अपना लंड लगाकर जोर का झटका मार कर घुसा दिया। मै फिर एक बार जोर जोर से “आआआअ ह्हह्हह…..ईईईईईईई…. ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” की आवाज की चीख निकाल दी। वो मेरी गांड चुदाई में मस्त था। मेरी गांड रहे या फटे उसे कोई फर्क नहीं पड रहा था। मेरी गांड को भी फाड़कर उसने खूब मजा लिया। मै भी अब मजे ले लेकर गांड चुदाई करवा रही थी। लेकिन ये मजा अब वो ज्यादा देर तक नहीं दे सका। कुछ ही देर में उसका लंड भी जबाब देने लगा।

उसकी चोदने की रफ़्तार बढ़ गई। मै जोर जोर से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज निकाल रही थी। आखिर कर अपना सारा माल मेरी गांड में ही गिरा दिया। गरमा गरम माल मेरी गांड में बहुत ही अच्छा लग रहा था। रात भर उसने मुझे सोने नहीं दिया। जब भी लंड खड़ा होता। मुझे चोद कर गिरा लेता। इतने दिनों की प्यास को उसने मुझे चोद कर बुझा ली। अब तो हर दिन मुझे चोदता है। मुझे भी उसके लंड से चुदवाने में बहुत मजा आता है। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।