ट्यूशन वाले सर ने मेरी चूत चोदी और गांड भी फाड़ के रख दी


हेल्लो दोस्तों, मैं आप सभी का नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मेरा नाम अमृता देशमुख है। मैं पिछले कई सालों से नॉन वेज स्टोरी की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ और मजे नही लेती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।
मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ। इस समय मैं 12th में पढ़ रही हूँ। मेरे मैथ्स के विशाल सर मुझे रोज ही ताड़ा करते थे। मेरे बैच में 20 जवान लड़कियाँ थी पर मैं सबसे जादा हॉट और सेक्सी माल थी। धीरे धीरे विशाल सर मुझे घूर घूर कर देखने लगे। मैं समझ नही पा रही थी की आखिर वो ऐसा क्यूँ कर रहे है। एक दिन बहुत बारिश हो रही थी। ट्यूशन में सिर्फ मैं ही आई थी। बाहर तूफान भी आ गया था। तेज हवाएं चल रही थी। विशाल सर मेरे पास आकर बैठ गये और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और किस कर लिया।
“सर!! ये आप क्या कर रहे है????” मैंने हैरान होकर विशाल सर से पूछा
“अमृता!! तुम मुझे बहुत ही सुंदर और सेक्सी माल लगती हो। जिस दिन से मैंने तुमको देखा है बस मैं तुम्हारे लिए पागल हो गया हूँ। अमृता आई लव यू!!” विशाल सर बोले और मेरे पास आकर उन्होंने मुझे किस करना शुरू कर दिया। पर मुझे ये सब अच्छा नही लग रहा था।
“सर! आप जैसा सोच रहे है मैं उस तरह की लड़की नही हूँ!!” मैंने कहा और मैं तुरंत वहां से घर चली आई। कई दिन तक मैं विशाल सर के पास ट्यूशन पढने नही गयी थी। रात में मुझे बार बार विशाल सर की बात याद आती थी “अमृता तुम बहुत सुंदर हो। धीरे धीरे मुझे विशाल सर अच्छे लगने लगे। एक दिन जब शनिवार था मैंने सर को एक लव लेटर अपनी कॉपी में रखकर दे दिया। जब शाम के 7 बजे सारी लड़कियाँ अपने अपने घर चली गयी मैं विशाल सर के पास रुक गयी।
“अमृता!! कहो तुम्हारे दिल में क्या है?? क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो???” सर बोले
“हाँ सर!! मैं आपसे प्यार करने लगी हूँ” मैंने कहा
उसके बाद हम लोगो की बातचीत बंद हो गयी थी। सर ने मुझे पकड़ लिया और गाल पर किस करने लगे। उन्होंने फोग का परफ्यूम लगा रखा था जो बहुत महक रहा था। धीरे धीरे सर मुझे अच्छे लगने लगे। हम दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया और किस करने लगे। सच तो ये था की आज मैं कसके चुदवा लेना चाहती थी। मेरी रसीली चूत में कई दिन से खुजली हो रही थी। अगर आज विशाल सर मुझे चोद देते तो मुझे बहुत मजा मिल जाता। धीरे धीरे विशाल सर मेरे पास आ गये और मेरे गुलाबी होठों पर उन्होंने अपने गुलाबी होठ रख दिए। फिर वो चूसने लगे। हम दोनों एक दूसरे के लब पीने लगे। धीरे धीरे हम दोनों गर्म होने लगे। फिर विशाल सर ने मुझे पकड़ लिया और सीने से लगा लिया। मैं उसकी गर्लफ्रेंड की तरह उनसे चिपक गयी थी। वो मेरी पीठ सहला रहे थे। धीरे धीरे मैं भी विशाल सर को अपना मान चुकी थी।
हम दोनों फिर से किस करने लगे थे। सर के हाथ मेरे 36” के बूब्स पर चले गये। दोस्तों मैं 22 साल की एक जवान और बेहद खूबसूरत लड़की थी। मैं बहुत गोरी और सुंदर लड़की थी। मेरा बदन बहुत गोरा, भरा हुआ और सुडौल था। मेरा फिगर कमाल का था। मैं बहुत सेक्सी और हॉट माल लगती थी। 36, 30, 34 का फिगर था मेरा। छरहरा और बिलकुल फिट। मेरे घर के आसपास के लकड़े मुझे माल, सामान, आईटम बुलाते थे। जब मैं घर से बाहर निकलती थी तो वो चौराहे पर खड़े रहते थे। मेरा ही इन्तजार करते रहते थे। मुझे बार बार पलट पलट कर देखते थे। मैं अच्छी तरह से जानती हूँ की वो मुझे बहुत पसंद करते है, मेरे मस्त मस्त मम्मे वो पीना चाहते है और मेरी रसीली बुर वो चोदना चाहते है। मेरी एक एक मुस्कान पर कितने लड़कों का क़त्ल हो जाता है और उनका दिल उछलकर बाहर आ जाता है। सब मुझसे बात करना चाहते है और बस मिलने का कोई बहाना ढूँढना चाहते है। वो मुझसे बार बार मेरा फोन और व्हाट्सअप नॉ मांगते थे, पर मैं मना कर देती थी। सभी मुझे बस एक बार जी भर के चोदना और खाना चाहते है। ये बात मुझे मालुम थी।
इसलिए कुल मिलाकर मैं बहुत ही झक्कास लड़की थी। विशाल सर तो मेरे पीछे बहुत दिनों से पागल थे। आज वो मेरी चुद्दी [चूत] मारने वाले थे। धीरे धीरे सर के हाथ मेरी 36” की चूचियों पर जाने लगे। वो मेरे रसीले बूब्स दबाने लगे। मुझे भी अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद विशाल सर ने मेरे दुपट्टे को खीच कर मेरे लगे से निकाल दिया और किनारे मेज पर रख दिया। मैं गुलाबी रंग का बहुत खूबसूरत सलवार कमीज पहन रखा था। सर मेरे मम्मे दबाने लगे। मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की आवाज निकालने लगी। दोस्तों आज मेरा भी चुदने का मन कर रहा था इसलिए मैं सर को नही रोका। मैंने उनको मना नही किया। फिर विशाल सर ने मुझे एक लम्बी बेंच पर लिटा दिया। इसी बेंच पर बैठ कर सब बच्चे पढ़ते थे। सर मेरे उपर लेट गये। मेरे बूब्स हाथ से दबाने लगे और मेरे रसीले होठ फिर से चूसने लगे। दोस्तों अब मुझे बहुत हॉट और सेक्सी फील हो रहा था। पता नही क्यों मैं विशाल सर को कुछ बोल ही नही पा रही थी। जो जो वो मेरे साथ कर रहे थे मैं उनको करने दे रही थी। इसी तरह से विशाल सर पूरे 20 मिनट तक मेरे साथ चुम्मा चाटी करते रहे। मेरी चूत गीली हो चुकी थी। मैं सर से चुदना चाहती थी।
“सर!!! क्या आज आप मेरी चूत में लौड़ा देंगे???” मैंने बड़े प्यार से पूछा
“अमृता!! मेरी जान, आज तक मैंने इस लौड़े से 5 लौंडियों को चोदा है। आज मैं इससे मोटे मूसल जैसे लौड़े से तुम्हारी मुलायम चूत को फाड़ दूंगा” विशाल सर बोले
उसके बाद उन्होंने मेरा सलवार का नारा खोल दिया और सलवार निकाल दी। मेरी कमीज, ब्रा और पेंटी भी सर से खोल दी। जब वो एक एक करके अपने शर्ट की बटन खोलने लग गये तो मेरा दिल धक धक कर रहा था। मैं डरी हुई थी। आखिर में विशाल सर ने अपना कच्चा बनियान भी निकाल दिया। उनका लौड़ा 8” मोटा था। उसे देखकर मैं भयभीत हो गयी थी। विशाल सर मेरे उपर आकर लेट गये और मुझे बाहों में भर लिया। दोस्तों मैं पूरी तरह से नंगी थी। विशाल सर मेरे गले, गाल, चेहरे, आँखों, कन्धो, मेरे जिस्म के हर अंग को चूम रहे थे। मुझे भी अच्छा लग रहा था। धीरे धीरे मैं सर की पीठ को अपने हाथ से सहलाने लगी। फिर विशाल सर ने मेरे 36” के बूब्स पर हाथ रख दिया। मैं सिसक गयी। सर मेरे खूबसूरत दूध को दबाने लगे। मैं “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की आवाज निकालने लगी।
आज जिन्दगी में पहली बार कोई मर्द रसीली चूची को पी रहा था। मुझे तो बहुत सुख मिल रहा था। विशाल सर मेरे मम्मो को तेज तेज हाथ से दबाकर भरपूर मजा ले रहे थे। मेरे मम्मे बहुत ही गुलाबी और गोल मटोल थे। विशाल सर ने आजतक कई लौंडिया चोदी थी पर किसी के बूब्स मेरे इतने बड़े नही थे। आधे घंटे तक सर मेरे बूब्स को दबाते रहे और पीते रहे। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। धीरे धीरे मेरे जिस्म में चुदाई की आग जल चुकी थी। आज मैं कसके चुदवाना चाहती थी। सर का मोटा बेरहम लंड अपनी छोटी सी चूत में खाना चाहती थी। धीरे धीरे विशाल सर और तेज तेज मेरे बूब्स दबाने लगे। मैं “…..ही ही ही ही ही…….अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” की आवाज निकाल रही थी।
“अमृता!! मेरी जान। सच में तुम बहुत सेक्सी माल हो” सर बोले
दोस्तों मेरी चूचियों की निपल्स उपर की तरफ उठी हुई थी जो बेहद सेक्सी लग रही थी। मेरी चूची के चारो तरह काले रंग के बड़े बड़े छल्ले थे जो बहुत सेक्सी लग रहे थे। मेरी जवानी, रूप रंग और यौवन को देखकर मेरे मैथ्स के टीचर विशाल सर पूरी तरह से पागल हो गये थे। वो तो बस मेरी चूची चूसते ही जा रहे थे। एक सेकंड को भी रुकने का नाम नही ले रहे थे। कुछ देर बाद मैं इतनी गर्म हो गयी की खुद ही मैं अपनी चूत में ऊँगली करने लगी।
“ओह्ह विशाल सर…..मेरी जान, अब मुझे और मत तड़पाओ और जल्दी से मेरी गर्म चूत में अपना लौड़ा डाल दो!!” मैं कह दिया
उसके बाद विशाल सर ने मेरी चूचियों को चुसना बंद कर दिया। मेरे पैर उन्होंने खोल दिए और मेरी चूत में अपना मोटा 8” का लंड डाल दिया और जल्दी जल्दी चोदने लगे। दोस्तों सर का लंड तो मेरी चूत को कसके चोदने लगा। मैं जोर जोर से मराने लगी। मैंने खुद अपनी टाँगे खोल दी जिससे विशाल सर का लंड अंदर गहराई तक मेरी चूत में चला जाए। धीरे धीरे विशाल का लंड पूरा का पूरा 8” अंदर मेरी चुद्दी में घुस गया था। मुझे बहुत जोर का दर्द भी हो रहा था। पर साथ ही अच्छा भी लग रहा था। मेरा लगा सुख रहा था। सर तो जल्दी जल्दी मेरी चूत मार रहे थे। धीरे धीरे उनके धक्के तेज और जादा तेज होने लगे। जिस बेंच पर मैं चुदा रही थी वो हिलने लगे। मुझे डर लगा की कहीं मैं नीचे ना गिर जाए। विशाल सर ने अपने दोनों हाथ मेरे शानदार खूबसूरत 36” के बूब्स पर रख दिया और सहलाने लगे। मुझे एक नशा सा हो गया था। आज तो मैंने सारी हद पार कर दी थी। अपने सर का मोटा लंड मैं ट्यूशन में खा रही थी। धीरे धीरे विशाल सर को और जादा सेक्स का नशा चढ़ रहा था। वासना अब उनके दिमाग में बैठ गयी थी। वो मुझे और जादा समय तक लेना चाहते थे।
इसी बीच सर के ताबड़तोड़ धक्के से फिर से मेज हिलने लगे। विशाल सर ने मेरी चिकनी चूचियों को और तेज तेज दबाना शुरू कर दिया। मैं “आई…..आई….आई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” की आवाज निकाल रही थी। आज मैं अपने सर से मराकर एक रंडी बन गयी थी। मेरे जिस्म में वासना की आग जल उठी थी। हाँ आज मैं सारी रात चुदाना चाहती थी। विशाल सर तो बस जल्दी जल्दी अपनी कमर घुमा रहे थे और मेरी रसीली चूत को फाड़ रहे थे। जैसे मैं कोई आवारा छिनाल थी। सर ने मेरी कमर और पेट को सहलाना शुरू कर दिया और जल्दी जल्दी मुझे पेलने लगे। मैं अपनी कमर और गांड हवा में उपर उठाने लगी। क्यूंकि मुझे बहुत जादा उत्तेजना महसूस हो रही थी। इस तरह विशाल सर ने मुझे 25 चोदा। अब तो जैसे मेरी चूत से आग की गर्म गर्म लपते निकल रही थी। मैं जानती थी ये मेरी कामवासना की अग्नि की धधकती लपटे थी।
“ओह्ह गॉड!… ओह्ह गॉड!….फक मी हार्डर!….कमाँन फक मी हार्डर!…फक माई पुसी!!” मैं बड़बड़ाने लगी
विशाल सर अब समझ गये थे की मैं पूरी तरह से चुदासी हो चुकी हूँ। इसलिए उन्होंने मेरी कमर को दोनों हाथ से कसके पकड़ लिया और तेज तेज धक्के मेरी रसीली चूत में मारने लगे। वो मेरी बुर बेरहमी से फाड़ रहे थे। मैं बार बार अपना मुंह किसी मछली की तरह खोल दे रही थी। क्यूंकि मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी और सेक्स टेंशन हो रही थी। मैं बार बार मुंह से गर्म हवा छोड़ रही थी। मैं चाहती थी की विशाल सर मेरी चूत को आज पूरी तरह से फाड़ दे की मेरा एक महीने का कोटा पूरा हो जाए। और मैं उनसे रोज रोज चोदने न ना बोलू। दोस्तों विशाल सर ने 45 मिनट नॉन स्टॉप मेरी चूत में लंड दिया, फिर झड गये। मेरी गुलाबी चुद्दी में उन्होंने अपना पानी निकाल दिया।
वो मेरे उपर लेट गये थे। उसका चेहरा बता रहा था की वो बहुत थक गये थे। मुझे भी चुदवाने में काफी मेहनत खर्च करनी पड़ी थी। मैं भी थक गयी थी। मैंने विशाल सर को बाहों में भर लिया और किस करने लगे। मैं उसकी आँखों, गाल, होठो, गले पर किस कर रही थी। करीब आधा घंटे तक हम दोनों इसी तरह नंगे नंगे एक दूसरे के उपर लेटे रहे। आज मैं अपने मैथ्स के सर से चुद चुकी थी। आज मैंने उनके 8” के मोटे लंड से अपनी बुर फड़वा ली थी। हम दोनों काफी देर तक बाते करते रहे।
“क्यों अमृता जान….बोलो चुदाई में मजा आया की नही???” सर ने पूछा
“सर!! मजा तो मुझे बहुत आया” मैंने कहा
उसके बाद हम फिर से प्यार करने लगे। अब विशाल सर मेरी गांड चोदना चाहते थे। उन्होंने ट्यूशन वाली बेंच पर ही मुझे कुतिया बना दिया। और मेरे खूबसूरत पुट्ठो को चूमने लगे। दोस्तों मेरे पुट्ठे बहुत ही सेक्सी थे। फिर उन्होंने हाथ से मेरे पुट्ठों को खोल दिया और मेरी गांड चाटने लगे। मुझे गुदगुदी होने लगी। मैं “उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की आवाज निकाल रही थी। मुझे बड़ा अजीब लग रहा था। आजतक मैंने किसी मर्द से अपनी गांड नही चटाई थी। साथ ही मुझे बड़ा गर्म लग रहा था। विशाल सर तो बहुत बड़े गांडू थे। मेरी गांड को चाटने और पीने में उनको पता नही कौन सा मजा मिल रहा था। वो जल्दी जल्दी मेरी कुवारी गांड को पी रहे थे। इधर मेरी चूत गीली हुई जा रही थी।
आज वो मेरी गांड कसके चोदने वाले थे। मैं भी तैयार थी। फिर विशाल सर ने मेरी कुवारी गांड में थूक दिया और अपना मोटा अंगूठा उसमे डाल दिया। “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” बोलकर मैं उछल पड़ी थी। क्यूंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था। विशाल सर की आँखों में सिर्फ और सिर्फ वासना की भूख थी। वो मेरी गांड चोदने के प्यासे थे। आज कसके वो मेरी गांड मारना चाहते थे। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। उन्होंने फिर से मेरी गांड में थूक दिया जिससे छेद चिकना हो गया। वो जल्दी जल्दी अपना अंगूठा चलाने लगे। मैं सिसक रही थी, कराह रही थी। मेरी आँखों में आंसू आ गया था। फिर उन्होंने मेरी गांड में लंड डालकर जोर से धक्का मारा जिससे उनका लंड भीतर घुस गया। दोस्तों उसके बाद तो मेरे विशाल सर ने करीब 30 मिनट कुतिया बनाकर मेरी गांड चोदी। ट्यूशन में जिस बेंच पर बैठ कर मैं रोज पढ़ती थी उसी पर आज मैं चुद गयी थी। उसी बेंच पर मैंने आज गांड मरा ली थी। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।



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