दिवाली पे मेरा भाई मुझे खूब चोदा : सच्ची कहानी

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मेरा नाम नंदिनी है, मैं २३ साल की हु, बहूत ही खुबसूरत हु, क्यों की मैं अपने कॉलेज की सबसे सुन्दर लड़की हु, बहूत ही हॉट हु, मुझे ब्लू फिल्म देखना बहूत अच्चा लगता है, और मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम की बहूत बड़ी फेन हु, आज मैं आपको अपनी एक कहानी सूना रही हु, आशा करती हु की आपको मेरी ये कहानी बहूत अच्छी लगेगी.

ये दिवाली की चुदाई की कहानी है, और चोदने वाला और कोई नहीं बल्कि मेरा भाई है, वो भी छोटा भाई, पर मैं भी उसके बड़े लंड पर फ़िदा हो गई की मैं खुद अपनी सलवार का नाडा खोल दी और पेंटी उतारने में भी देर नहीं लगे थे, और चूचियां उसके हवाले कर दी, आज जब मैं ये कहानी लिख रही हु, तब भी मेरी चूत में पानी आ रहा है, कोई की अभी २४ घंटे ही हुए है अपने भाई का मोटा लौड़ा अपने बूर में लेते हुए, पर दोस्तों बहूत दर्द भी अभी तक हो रहा है, मेरी बूर भी सूजी हुई है, दिन भर आज चलने फिरने में भी काफी परेशानी हुई ही, अब मैं सीधे अपने चुदाई की कहानी पर आती हु.

दोस्तीं मेरे भाई दिवाली के सुबह ही दिल्ली से आया था, दिवाली मनाने के लिए, वो दिल्ली में रहकर पढाई कर रहा है, वो करीब दो साल से दिल्ली में रह रहा है, अब वो बहूत ही हॉट हो गया है, दाढ़ी रखता है, बड़ा ही सेक्सी लगता है, वो सुबह छह बजे ही आया था, माँ पापा को प्रणाम किया और उन दोनों के गले लगे और फिर बोला नंदिनी दीदी कहा है, माँ बोली ऊपर कमरे में सोई हुई है, तब तक मैं सुन ली, और जल्दी जल्दी उठने लगी, तभी वो दौड़ता हुआ सीधी से ऊपर आ गया और मी कमरे में पहुच गया.

मैं तुरंन्त सो कर ही उठी थी नाईटी ड्रेस में थी, ऊपर के कुछ बटन खुले हुए थे मेरी चूचियां झाँक रही थी बाहर, मेरे बाल खुले हुए थे, वो मुझे देखकर ऐसा लगा की उसे शॉक लग गया हो, वो टुकुर टुकुर मेरी चुचियों को निहारने लगा, और फिर मेरे गुलाबी होठ को, मैं समझ गई की मेरे भाई का इरादा ठीक नहीं है. मैं तुरंत ही अपने बटन लगाने लगी और वो फिर मेरे गले से लग गया, अब मैं समझ नहीं पा रही थी की कैसे रियेक्ट करूँ, आ पहली बार वो मेरे गले लगा था, मेरी बड़ी बड़ी चूचियां उसके छाती से चिपक गया था और वो मेरे पीठ को सहलाने लगा. और बोलने लगा की दीदी, आपको बहूत मिस करता हु दिल्ली में, मैं अपनी प्यारी दीदी को बहूत याद करता हु, आई लव यू दीदी, मैंने भी फिर उसके पीठ को सहलाकर बोली आई लव यू टू माय डिअर बरो,

पर उसके इरादे ठीक नहीं थे क्यों की उसका लौड़ा तन गया था, मैं अपने जांघो में महसूस कर रही थी, तभी माँ जोर से चिल्लाई अरे निचे आ जाओ दोनों, और फिर दोनों निचे चले गए, अब दोनों दिन भर नैन लड़ाते रहे, वो मेरी चुचियों को निहार रहा था बार बार क्यों की इधर एक साल में मेरी चूचियां बहूत बड़ी और गोल गोल हो गई थी, मेरी चूतड भी बड़ी गोल गोल हो गई थी, पर मैं क्या झूठ बोलूं मैं भी फ़िदा थी, उसके नैन नक्स पर, ऊपर वो वो मेरी जांघ पर अपना मोटा लंड का करेंट दे दिया था, शाम हुई पूजा करके, सब लोग दीपक जलाने लगे, मैं रेड कलर का सूट पानी वो भी कुर्ता पजामा, निचे जब दीपक जल गया तो हम दोनों भाई बहन ऊपर के फ्लोर पर आ गए दोनों दीपक जलाने लगे. वो मेरी चुचिओं को निहार रहा था क्यों की मी गला थोड़ा बड़ा था सूट का इसलिए तोड़ा थोड़ा दोनों बूब्स बाहर की और झांक रहा था, मैं महसूस की की उसका लौड़ा भी पजामा में तम्बू बना रहा था.

फिर हम दोनों ऊपर छत पर चले गए, फिर मेरा भाई मुझे फिर से गले लगा लिया, वह थोड़ा अंधरा था क्यों की अभी दीपक नहीं जलाई थी, और हैप्पी दिवाली कहने लगा, मैं भी उसको हैप्पी दिवाली बोलकर, अपने सीने से लगा ली, आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं, उसके बाद तो दोस्तों खेला शुरू हो गया, वो मुझे किस करने लगा और धीरे धीरे वो मेरे गांड को सहलाने लगा, उसका लौड़ा बहूत मोटा हो गया था क्यों की वो हौले हौले से सटा रहा था, मैं भी जोश में आ गई, क्यों की वो सुबह से ही मेरा नियत ख़राब कर दिया था, फिर क्या था, मैं भी टूट पड़ी और वो भी टूट पडा, छत पर ही स्टोर रूम था वहीँ चले गए, वहा पर एक सोफा कम बेड था, मैंने लेट गई और फिर अपना सलवार उतार दी, और फिर पेंटी उतार दी, मेरा भाई अपने मोबाइल की रौशनी में मेरी बूर को देखा और एक लम्बी सांस लिया और फिर चाटने लगा, मैं भी कामुक हो गई थी, मैं उसका बाल पकड़ कर अपने बूर में सटाने लगी और वो जीभ से मेरी बूर को चाट रहा था, मैं बोली भाई तुम देर ना करो, अभी एक बार कर लो फिर रात को करेंगे उसने लौड़ा निकाल कर फिर से मोबाइल की लाइट में मेरी बूर के छेद पर सेट किया और घुसाने लगा पर मेरी चूत काफी टाइट थी, उसमे जा नहीं रहा था, फिर उसने अपने लौड़ा में थोड़ा थूक लगाया और जोर से मेरी बूर में अपना मोटा लौड़ा पेल दिया.

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मैं दर्द से करह उठी. वो धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. और फिर जोर जोर से स्टार्ट हो गया, वो फिर मेरी चूची को मसल रहा था और जोर जोर से धक्के दे रहा था, मैं आह अह अह आह कर रही थी और वो मुझे चोदे जा रहा था, करीब वो पन्द्रह मिनट तक चोदा और फिर वो झड गया, सारा माल मेरी चूत में ही डाल दिया, मैं भी शांत हो गई वो भी शांत हो गया, अब फिर दोनों दीपक जलाने लगे, तब तक माँ आ गई बोली बहूत देर हो गया अभी तक तुम लोग दीपक नहीं जला पाए, भला माँ को क्या पता की हम दोनों क्या जला रहे थे या बुझा रहे थे, हम दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्कुराने लगे.,

फिर हम लोगो निचे आये खाना खाया पटाखे चलये, और फिर करीब एक बजे सोने चले गए, माँ पापा पहले ही सो गए थे वो फिर से मेरे कमरे में आ गया और दो से तिन बार मुझे चोदा, वो सुबह के पांच बजे मेरे कमरे से बाहर गया, दोस्तों दिन भर दर्द से परेशां रही, पर आज शाम को वो प्फिर कह रहा था आज भी प्रोग्राम रखंगे, पर मैं दिन में ही बोल दी थी की मैं अब बिना कंडोम के नहीं, क्या बताऊँ दोस्तों जब कहानी लिख रही थी तभी वो बाजार से आया और मुझे बोला तेरा सामान ला दिया हु अब ना नहीं कहना, अब आज रात को जो भी होगा मैं कल के कहानी में बतौंगी, तब तक के लिए आपको बहूत सारा प्य्यार

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