दशहरा (दुर्गा पूजा) में ट्रैन में चुद गई मामा से माँ के सामने

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कभी कभी रावण भी राम लगने लगता है जब वो रावण सुख दे, चुदाई की प्यासी बेलगाम लड़की 18 साल की चुदने को आतुर पर वैसा मौक़ा नहीं मिला की अपनी चूत की गर्मी को शांत कर सकूँ, पर मुझे ख़ुशी है की मैं चुदी वो भी अपने रिश्तेदार से ही और वो भी मामा जी से ट्रैन में अपने माँ के सामने। आज मैं आपको पूरी कहानी बताने जा रही है ट्रैन में कैसे मेरे चूत की गर्मी शांत हुई.

मैं पटना जा रही थी। ट्रैन में टिकट नहीं मिल रहा था हम लोग दिल्ली में रहते हैं। मैं मां और मामाजी तीनो ट्रैन में थे ऐसी थ्री टियर में। मां और म म मामा जी के पास टिकट थे पर मेरे पास नहीं क्यों की मैं जानेवाली नहीं थी और एकदम से प्लान बन गया। वेटिंग टिकट ले ली और सोची की एडजस्ट कर के चली जाउंगी।

साइड वाला सीट था और एक लोअर तो माँ लोअर में चली गई और मैं और मामा जी दोनों साइड वाले साइट पर दोनों पैर फैला कर बैठ गए। रात का खाना आया और तीनो खाना खा लिए माँ सो गई क्यों की उनकी तबियत ठीक नहीं थी इसलिए मैं उनको तंग नहीं कर रही थी और एक ही सीट पर मामा और भांजी एडजस्ट करने वाले थे।

पर धीरे धीरे उनके पैर मेरी जांघ से सटने लगा, पहले तो थोड़ा अलग लग रहा था फिर मैं नार्मल हो गई और लेट गई अब उनके पैर की ऊँगली मेरे चूत के पास सटने लगा मैं भी हिल हिल कर मजे लेने लगी और वो फिर पुश कर कर के। दोनों मजे ले दे रहे थे। ट्रैन सरपट भागी जा रही थी अब दोनों कांबले के निचे मैं सो रही थी वो बैठे थे पर्दा लगा हुआ था साइड से मैंने पिन लगा दी थी ताकि कोई देखे नहीं।

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अब बात और आगे बढ़ गई वो मेरे पैरों को सहलाने लगे। मैं भी ढीली हो गई और आराम से लेट गई सीधी हो कर अब वो मेरे दोनों पैरों के बिच में मेरे चूत में आराम से अपने पैर लगा कर महसूस करने लगे मेरे बर्दाश्त के बाहर हो रही थी बात मेरी चूचियां मचल रही थी मैं अपने चूची को दबाने लगी। मैं सोची जो होगा देखा जाएगा और मैं उनको ऑफर कर दी। ले लो आराम से।

ले लो आराम से वो सुनते हि लेट गए मेरे साथ और मेरे होठ को चूमने लगी मेरी चूचियों को दबाने लगे। मैं अपना गांड उनके तरफ कर के सो गई। वो मेरे पेंट को निचे कर दिए मेरी पेंटी भी निचे कर दी। और अपना लंड भी निकाल लिए और मेरी जवान चौड़ी गांड में सटाने लगे. मैं रगड़ रही थी वो भी जोश में आ गए थे। वो लौड़े में थूक लगा लिए और पीछे से ही मेरे चुत में डालने लगे। पर सही से नहीं जा रहा था मैं अपने पेण्ट को उतार दी और जांघिया एक ही पैर में रहने दी। अब मैं निचे से खुली ही नंगी थी। वैसे ही लेटी रही और एक पेअर को ऊपर करके उनके ऊपर रख दी अब मेरी चूत आराम से लंड डालने के लिए तैयार थी।

मामा जी का मोटा लंड फनफना रहा था वो मेरे चूत के बीचो बिच लौड़ा लगाए और धक्के देने लगे। मुझे दर्द भी हो रहा था पर वो दर्द में मजे भी भी इसके पहले भी मैं एक दो बार चुद चुकी थी तो सील टूटी हुई थी। अब मामा जी का पूरा लौड़ा मेरे चूत में समा गया था ट्रैन सरपट भाग रही थी शायद लखनऊ क्रॉस हो रही थी और मैं चुद रही थी जोर जोर से वो लंड को पेल रहे थे और मैं आह आह आह कर के मजे ले रही थी।

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दोस्तों वो मेरी चूचियों को कस के दबा रहे थे और फिर मेरे गर्दन को गाल को होठ को चूस रहे थे। डर लग रहा था कही दांत का निशान ना पड़ जाये मेरे जिस्म पर। गोल गांड और उभरे हुए चूतड़ झप झप की आवाज कर रही थी ज्यों ज्यों तेज गति से चुदाई होती चाप चाप की आवाज आती और मेरे मुँह आह आह की आवाज निकल जाती। दोस्तों तभी मेरी माँ जग गई शायद मेरी आह आह की आवाज उनको सुनाई दे दी थी। मुझे तो लगा वो समझ गई है मैंने मामा जी को बोला की माँ जाग गई है तो वो बोले कोई बात नहीं प्लान तो हम भाई बहन का था चुदाई करने का आज ट्रैन में पर तू आ गई और ये हो रहा है।

तो मैं मामा जी से पूछी की क्या आप और माँ दोनों सेक्स करते हैं। तो वो बोले हां हम दोनों करीब दस साल से एक दूसरे के जिस्म को ठंढा करते आ रहा हैं जब जिस्म गरम हो जाता है।

मैं बोली बहनचोद अब तो भांजी पर भी हाथ फेर लिए। और हम दोनों हसने लगे। दोस्तों अभी तो नहीं पता फिर कब चुदाई होगी। मैं तो घर आकर ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिख रही हूँ। फिर हम दोनों का रिस्ता कैसा रहता है बाद में बताउंगी पर हां ट्रैन में मेरी चुदाई बहुत ही हॉट तरीके से हुई थी और यादगार है।

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