मैंने अपनी मम्मी को चुदते हुए देखा फूफा से – 2 : सच्ची सेक्स कहानी

आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी जिसमे मेरी माँ फूफा जी से चुदी थी, आज मैं आपको उसी कहानी का दूसरा भाग आपसे शेयर कर रहा हु, अगर पिछली कहानी नहीं पढ़ी तो आप पहले जरूर पढ़े Part One


आपने पढ़ा था पहले की चुदाई के बारे में उसके बाद तो मम्मी सन्डे को ऐसे नार्मल थी जैसे रात कुछ हुआ ही न हो।और किसी को पता ही नही है।ऐसे ही पूरा हफ्ता बीत गया और फिर शनिवार को फिर फूफा आ गया,रात को हम तीनो ने खाना खाया और मै और मम्मी बेडरूम में और वो बैठक में सो गया,हम करीब 10 .15 पर बिस्टर पर चले गए।माँ ने बेडरूम की लाइट बंद कर दी थी।मेरी आंखोंमे नींद नही थी और मै इस इंतजार में जगता रहा की अब क्या होगा,?पिछली बार की तरह भी कुछ होगा क्या? मगर बहुत देर बीत गयी करीब एक घंटा,तभी अन्दर कमरे में मुझे एक परछाई दिखाई दी,जो मम्मी के बिस्तर की तरफ बढ़ गयी,वो मम्मी को हिलाने लगा,मम्मी की बगल में एक खिड़की थी जिससे बहुत ही हल्का प्रकाश अन्दर आ रहा था,,यानि की सिर्फ परछाई ही दिखाई दे रही थी।उसमे और मम्मी में कुछ छीना झपटी और ख़ुसुर फुसुर हुई।
फिर उसने मम्मी को अपने हाथों पर ऐसे उठा लिया जैसे कोई छोटी बच्ची को उठा लेता है।और कमरे से बाहर निकल गया।करीब 5 मिनट बाद जब मेरे से नही रहा गया तो मैं भी दबे पांव उठा और लॉबी में अँधेरे मे खिड़की के पास खड़ा हो गया।अन्दर नाईट बल्ब जल रहा था,वो और मम्मी दोनों निर्वस्त्र थे,वो मम्मी की छातियाँ दबा रहा था और मम्मी के होंठ चूस रहा था, उसके मोटे मोटे भारी चूतड मेरी तरफ थे,मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई ब्लू फिल्म चल रही हो।उसने मम्मी की जांघें फेला राखी थी,और मुझे मम्मी की जांघों के बीच में एक झिर्री सी काटी हुई दिखाई दे रही थी,जहाँ सिर्फ दो हलकी गुलाबी पत्तियां या होंठ बहार की तरफ को निकले हुए थे।उसके आंड ऐसे लटके हुए थे जैसे कोई लम्बा आलू लटका हुआ हो और उसका काला लंड उस समय पूरा ताना हुआ नही था,मम्मी का गोरा नंगा बदन देख कर मेरे शरीर में झुरझुरी सी उठ गयी,मन में यही ख्याल आने लगा की ये आदमी कितना लकी है जो मेरी जवान माँ के बदन से खेल रहा है?
ड्राइंग रूम के एक साइड लॉबी में खिड़की थी और दरवाजे की जगह एक छोटी सी गोल डाट थी,जिस पर पर्दा पड़ा हुआ था,और खिड़की पर भी छोटा सा पर्दा पड़ा हुआ था ,में उन्हें दोनों जगह से आराम से देख सकता था।दोनों कुछ भी नहीं बोल रहे थे,मम्मी की गोरी दुदियाँ बहुत ही मस्त लग रही थी।पर वो साला गंजा उन्हें खूब मसल रहा था और मम्मी के हाथ उसकी कमर को घेरे हुए थे,जब वो मम्मी के गले को चूम रहा था तो मम्मी अपना चेहरा पीछे की तरफ करके आँखें बंद कर लेती थी।मुझे ऐसा लग रहा था की मम्मी भी मजे ले रही है।धीरे से उसने अपनी हथेली चौड़ी करके जैसे ही मम्मी की जांघों के बीच में घुसाई मम्मी ने अपनी जांघें फेला ली,
वो अपने हाथ से मम्मी की फुद्दी को दबाने में लगा हुआ था और मम्मी आँखें बंद करके सी सी…….कर रही थी।जहाँ मुझे सिर्फ झिरी सी दिखाई दे रही थी वहां मुझे अब गुलाबी मांस फटा हुआ सा दिखाई दे रहा था, वो शायद वो हि जगह थी जहाँ से मम्मी पेशाब किया करती थी। वो हिस्सा बिलकुल पकोड़े की तरह फुला हुआ था, उस वक़्त मम्मी के पेरों में पाजेब बहुत ही सुन्दर लग रही थी,जैसे जैसे वो गंजा बूढ़ा फूफा मम्मी की फुद्दी को हाथ से मसल रहा था वेसे वेसे उसका लंड खड़ा हो रहा था,और थोड़ी देर बाद ही वो काले मोटे पाइप की तरह दिखने लगा,सिर्फ उसका आगे का हिस्सा गुलाबी और खुंडा अंडे की तरह चिकना था,

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उसने एक हाथ से अपना लौड़ा पकड़ा और जैसे ही गुलाबी जगह पर टिकाया, मेरा कलेजा मुह को आ गया .,….उसने अपने मोटे चूतड उठा कर हल्का धक्का मारा ,,तभी फक्क्क की आवाज हुई और मम्मी के मुह से अआः …….की आवाज निकल गयी,और उसने मम्मी को बाँहों में कस लिया, मेरी नाजुक मम्मी उसके निचे छिप सी गयी थी,मेरी मम्मी ने अपने हाथ उसके भरी चूतडों पर टिका दिए थे।मुझे उन दोनों का मिलन स्थल अच्छी तरह दिख रहा था,
शायद सुरु में अगर औरत का छेद टाइट हो तो जब मोटा लंड अपनी जगह बनाता है तो हलकी सी फटन महसूस होती होगी।बस इसके बाद वो गंजा फूफा मम्मी के बदन में अपना काला मोटा लण्ड घुसेड़ने लगा,और मेरे देखते ही देखते उसने करीब 5 इचंह अन्दर घुसेड दिया,मम्मी ने अपने दोनों पैर घुटनों पर से मोड़ कर थोड़े से उपर उठा लिए,अब फूफा मम्मी को चोदने लगा था और मम्मी के मुह से वेसी ही आवाजें जो कुछ अजीब सी थी और सिर्फ पिछली बार ही निकली थी,निकलने लगी,उसके धक्के पड़ते ही मम्मी आह ..आह… आह… आह…करके टसअकने लगी, फूफा ने अपने चूतड पूरी तरह से चौड़े कर लिए थे, और निचे से पूरी ताकत से साला धक्के मार रहा था,वो अपने पंजों, घुटनों और चूतड़ो का भरपूर इस्तेमाल कर रहा था,मैं थोड़ीदेर तो खिड़की से उनका निचे का हिस्सा देखता था और थोड़ी देर डाट से धड़ वाला हिस्सा देखता था,मम्मी बार बार मुह खोल रही थी और फूफा ने जिस हिसाब से मम्मी को जकड रखा था,मम्मी किसी भी तरह उसके निचे से निकल नही सकती थी,मम्मी के पास चुदने के आलावा कोई चारा नही था,करीब 8-9 मिनट तक चोदने के बाद वो मेढ़क की तरह मम्मी की जांघों के बीच में उकडू बैठ गया, उसने अपने चूतड़ ऊपर किये और फिर से मम्मी की चूत में अपना लंड पेल दिया ,अब वो उठ उठ कर के मम्मी को चोदने लगा , मम्मी की चूत से झाग बाहर आने लग गया ,
मम्मी के छेद से फक्क ….फक्क्क …..पुच्छ…….पुच्छ……की आवाजें आने लग गयी .अब मुझे कमरे में मम्मी की आहें ,पेरो में पाजेब की आवाजें और चूत से आती हुई बहुत अच्छी लग रही थी ,उसने मम्मी के पैर उसके सर की तरफ कस कर पकड़ लिए थे इससे मम्मी की गोरी गांड मेरे सामने ऐसे आ गयी थी जैसे कोई दो तरबूज बिलकुल कर रख दिए हों .जब गंजा जोर मारता था तो मम्मी की गांड थोडा सा बाहर को आ जाती थी। और मुझे मम्मी का पीछे वाला छेद थोडा सा स्याह रंग का ,जिसमे झुर्रियां पड़ी हुई थी नजर आने लगता था,10करीब -12 मिनट की चुदाई के बाद मम्मी की गांड के छेद तक झाग बह कर आ चूका था,
अब वो थोडा उठ कर अपने भरी चूतड़ों से मम्मी की दब कर चुदाई कर रहा था,मेरी कोमल नाजुक मम्मी उसके निचे पड़ी तड़फ रही थी,पर वो बिलकुल भि दया नही कर रहा था। मम्मी ने पूरी चादर अपनी मुट्ठियों में कस ली थी।मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें फ़ेल कर ऊपर उठा ली थी,जब जब वो धक्के मरता था तो मम्मी चीख सि पड़ती थी।
मम्मी के महू से सी….सी……सी…..की आवाजें आ रही थी। मेरी मम्मी ने अपने हाथ फूफ की कमर पर रख दिए थे,मम्मी के पेरों की पाजेब की आवाज मुझे बहुत अच्छी लग रही थी।वो मम्मी को जम कर रगड़ रहा था। अचानक उसके भारी चूतड़ तेजी से मचलने लगे। माँ की आँखे लगभग बंद होने लगी। फिर माँ ने एक जोर से सिटी सी मारी और फूफा के दोनों आंड मम्मी के गांड के छेद पर टिक गए। 2- 3 मिनट बाद गंजा उतर गया और मम्मी की बगल में लेट गया। मम्मी के गुलाबि छेद से मांड जैसा सफ़ेद गाढ़ा पदार्थ बहर आ रहा था,मम्मी ने उसे अपने पेटीकोट से साफ़ कर दिया और तब मम्मी ने फूफा के छाती पर 4-5 बार चुम्मियां ली।
मै सोचने लग गया की क्या यह मेरी मम्मी ही है जो इतना मोटा लंड लेकर इतना दर्द झेलती रही?तभी फूफा ने उसे पुछा की तेरा मर्द भी इतना ही मजा देता है ? मम्मी ने कहा ,तुम बहुत गंदे हो?मेरी अच्छी तरह से ले ली।और पूरी भर दी ,अब ये बताओ कि दुबारा कब आओगे?बस इसके बसद मम्मी कपडे पहनने लगी और मै तजी से अपने बेड पर आकर लेट गया…..