मेरी चूत की गर्मी को मेरा भाई दूर किया था रक्षा बंधन के दिन

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मेरा नाम पूर्णिमा है, आज मैं आपको पिछली रक्षा बंधन की कहानी आपको सूना रहा हु, क्यों की सावन आते ही मुझे सब कुछ याद आ गया, वो दिन जब मेरे भाई ने एक शानदार गिफ्ट दिया था. दोस्तों आज मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम को पढ़ रही थी, तो मुझे लगा क्यों ना आज मैं अपनी भी कहानी आपलोगो के सामने पेश करू, दोस्तों आज मैं मूड में हु, तो आशा करती हु, की आपको भी मूड ठीक कर दू. पर सॉरी यार कुछ कर नहीं सकती, अगर कुछ कर सकती थी तो मैं जरूर आपका लंड सहला देती और अगर आप ज्यादा जिद करते तो मुझ में भी ले लेती. पर हां मुझे लंड को मुंह में लेना अच्छा नहीं लगता है. पर आप तो मेरे साथ है नहीं, पर आज आपको मेरे खयालो में ही रहना पड़ेगा, आप मुझे अपनी यादों में रखकर मूठ मार सकते है.

दोस्तों मेरा नाम पूर्णिमा है, मेरी उम्र अभी 22 साल है. मैं दिल्ली में रहती हु, अशोक विहार में, और पढाई कर रही हु, ऐसे मैं कानपूर की रहने बाली हु, मैं पांच फुट छह इंच की हु, मेरा कलर गेहुंआ हैं, मेरे नहीं नक्स कातिल है, भगवान् में मेरे बूब्स को बहुत ही खूबसूरत सेप दिया है, बहुत बड़ी नहीं है, पर छोटी भी नहीं है, मेरी चूचियों को आप एक हाथ में नहीं समेट सकते है. बॉडी परफेक्ट साइज की है. मेरा वजह ५५ किलो है. दोस्तों मेरी चूतड़ मीडियम साइज की है. बहुत चौड़ा भी नहीं है. पर इतना मैं कह सकती हु की ये एक दम फिट है. जाँघे गोल गोल, कमर पतली पर बूब्स के पास चौड़ी है. बड़ी बड़ी बाल है मेरे, हां चूत पे बाल नहीं है. मैं हमेशा अपने चूत की बाल को साफ़ कर देती हु, सबसे सुन्दर जो चीज है. वो है मेरी चूत, सटा हुआ, टाइट, नो हेयर, अंदर पिंक कलर, दोस्तों अगर आपको मेरी चूत को चाटने का मौका मिल जाये तो चोदने से ज्यादा चाटने में मजा आएगा, ये मेरी गरंटी है.

आपको ऊपर लिखे शब्दों से तो पता चल गया होगा की मैं कितनी सेक्सी हु, मेरे तन बदन में बस सेक्स सेक्स सेक्स ही बसता है, पर मुझे मौक़ा नहीं मिला था की मैं अपनी सील तुड़वा सकु, एक था भी बॉयफ्रेंड और सोची भी की आज उससे सील तुड़वाने को. पर वो फेल हो गयाम वो तो मेरा चूत और मेरी बूब्स को देखकर ही हैरान रह गया, और जब वो अपना लंड मेरे चूत में घुसाने लगा तभी उसका वीर्य निकल गयाम मैंने उसको एक लात मारी और अपने वासना को किसी तरह से काबू किया. पर कुछ दिन बाद ही ये हसीन पल आ गया जब मैंने अपने चूत की गर्मी शांत की. कैसे आगे पढ़े:-

रक्षा बंधन की राखी मैंने अपने भाई को भेज दी थी डाक से, और कन्फर्म भी कर लिया था उसको मेरी राखी मिल भी गया था, मैंने उसको एक नोट में ये भी कही थी की भाई इस बार तो नहीं अगले बार मैं अपने हाथों से राखी बांधूंगी, पर मेरे लिए उसने एक सरप्राइज रखा, रखा बंधन के दिन वो सुबह सुबह दिल्ली आ गया, मैं अकेले रहती थी, मुझे तो पहले विस्वास नहीं हुआ था, पर उसको देखकर मैं इतनी खुश हुई दोस्तों आपको बता नहीं सकते, मैंने पूछा तुम्हे तो राखी मिल गया था, फिर भी तू आया है. तो वो कहने लगा पापा मम्मी बोली की इस बार सरप्राइज दो अपने बहन को, तू चला जा दिल्ली, उन्होंने मुझे कन्फर्म टिकट दिल्ली का दे दिया और मैं आ गया. ओह्ह्ह दोस्तों, मैं तुरंत भी बाजार गई, और राखी और मिठाई लाइ और उसको राखी बाँध कर मिठाई खिलाई.

शाम को हम दोनों मूवी देखने गए, मैं टाइट जीन्स पहनी और हाफ स्लीव की टॉप, बाल खुल रखी और लाल लिपस्टिक लगाईं. भाई बोल आज तो आप बहुत हॉट लग रही हो, मैंने कहा हां हॉट तो हु ही. पर तुमने मुझे कभी ध्यान से देखा ही नहीं. तो उसने कहा देखा तो बहुत बार हु पर आपको इसके पहले एहसास हुआ नहीं था, मैंने कहा सच? क्या तुम मुझे घूर घूर कर देखते थे क्या, तो उसने कहा दीदी मैंने आपको सब तरह से देखा है. हां दोस्तों पहले मैं ये बताना भूल ही गई थी की वो वो मुझसे एक साल छोटा है. मैं समझ गई. की शायद उसने मुझे नंगा भी देखा होगा, क्यों की कानपूर का बाथरूम का दरवाजा में कई सारे छेद थे, हो सकता है वो वह से अपनी आँखे सकता होगा. और मेरा बात सच निकला क्यों की उसने कहा. आपको तो मैंने कई बार नहाते हुए देखा है. मैं समझ गई. ये भी साला अपने बहन पर ही गया है. मैं लंड का जुगाड़ कर रही हु और ये चूत का जुगाड़ कर रहा है.

उसके बाद दोस्तों मैंने कहा कैसी लगी मैं, उसने कहा, क्या बताऊँ दीदी, मेरा तो लंड टेढ़ा हो गया है. आपकी याद में मूठ मारते मारते, तो मैंने कहा अरे यार बता देते, फिर क्या था दोस्तों हम दोनों तुरंत ही कमरे पे आ गए, खाना बाहर से लेके आये और एक बोतल व्हिस्की भी ले आई थी. क्यों की मेरा भाई पीता है तो मैंने सोचा की वो खुश हो जाएगा. दोस्तों रात को चिकन के साथ वो दारु पिने लगा. जब उससे नशा चढ़ गया तो वो मुझे भी काफी रिक्वेस्ट किया दारु पिने को. और मैंने भी दो पेग लगा ली. फिर तो दोस्तों मैं बहकने लगी थी. और मेरा भाई मेरे हाथ छूने से स्टार्ट किया और मेरे चूच तक पहुंच गया, मैंने भी उसको अपनी आगोश में भर ली. और उसके होठो को किश करने लगी. फिर क्या था दोस्तों, मैंने कहा मेरा राखीं का गिफ्ट तो उसने अपना कपड़ा खोल दिया और अपना लंड मेरे मुंह में डालने लगा.आ आपको तो पता है मुझे मुंह में लंड लेना अच्छा नहीं लगता है. पर उसकी बात को टाल नहीं सकती और थोड़े देर तक ली.

पर ज्यादा बर्दास्त नहीं कर पाई. क्यों की मेरी चूत काफी गरम हो चुकी थी. और उसका गठीला जिम बाला बॉडी देखकर तो मैं पागल हो गई. और फिर मैंने ऊपर से टॉप निकाली और उसने मेरे सारे बच्चे हुए कपडे उतार फेंके. फिर क्या बताऊँ दोस्तों उसने मेरे चूत को चाटना सुरु किया, वो जीभ से लपलपा रहा था. मेरे पुरे शारीर में विजली दौड़ रही थी. मुझे लंड चाहिए था. मैंने कहा भाई अब देर मत कर अपने बहन को इस रक्षा बंधन पे खुश कर दो. और उसने अपने लंड को मेरे चूत पे रखा और जोर से झटका मारा पर लंड छटक कर इधर उधर हो गया. फिर उसने दुबारा तिबारा सेट किया, पर छठे टाइम पे वो मेरी चूत को फाड़ दिया, उसका लंड मेरे चूत के अंदर दाखिल हो गया. आपको तो पता है मैं वर्जिन थी. मेरे चूत से खून निकल रहा था पर किसे परवाह था इस चीज का. वो जोर जोर से चोदने लगा, और मैं भी चुदवा रही थी.

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उसने मुझे कई तरह से चोदना सुरु किया, मैंने पूछा ये सब कहा सीखा तो उसने कहा की मैं कामसूत्र मूवी देख कर ये सब सिखा हु, दोस्तों सच बताती हु आपको मुझे बहुत ही मजा आ रहा था, मेरे मुंह से सिर्फ आह आह आह और चोद यही निकल रहा था. धीरे धीरे तो हम दोनों की रति लीला तो इतनी वाइल्ड हो गई. की पुरे कमरे में आह आह उफ़ उफ़ उफ़ सी सी की आवाज आ रही थी. वो मुझे गालियां दे रहा था, कह रहा था रंडी तू तो बड़ी चुदक्कड़ निकली, मैं भी उसको खूब गाली देते हुए चुदवा रही थी.
दोस्तों वो मुझे रात भर दारु पि पि कर चोदा, मुझे वो तृप्त कर दिया था चोद कर, मुझे तो ऐसा लग रहा था की रेगिस्तान में वारिश हो गई थी. उसके बाद तो हम दोनों का रिश्ता तो काफी प्रगाढ़ हो गया, वो हरे महीने दिल्ली आने लगा, और मुझे वो दो तिन दिन तक तृप्त कर के जाता है.

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