जुए में अपनी बेटी को हार गया बाप एक रात के लिए


Juye me haar gaya baap apni beti ko sex story : मेरा बाप मुझे हार गया, एक रात के लिए और उस रात मेरे साथ क्या-क्या हुआ आपको मैं इस कहानी के माध्यम से बताऊंगी। मेरा बाप जुआ खेल भी रहा था तो अपने दोस्त के साथ जिसको मैं हमेशा अंकल कहती थी उसी ने मुझे पूरी रात चोद चोद कर मेरी चूत को सुजा दिया। यह कैसे हो गया जब आप मेरी पूरी कहानी पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा।


मेरा नाम दीप्ति है मैं इक्कीस साल की लड़की हूं। मेरी मां नहीं है कोरोना में उनका देहांत हो गया है। मेरा एक भाई था वह अब हम लोगों के साथ नहीं रहता है वह सगी मासी को लेकर भाग गया। कहा जाता है मौसी या मासी मां समान होती है। पर बेटा नालायक हो और मां बदचलन हो तो वैसी मासी भाग ही जाती है अपने से 10 साल छोटे लड़के के साथ। आपको तो समझ आ गया होगा मेरा परिवार कैसा है मेरा समाज कैसा है मेरे घर के लोग कैसे हैं। मैं बहुत सभ्य और सुशील लड़की बनने की हमेशा सपने देखते रहे। पढ़ाई में भी अच्छी हूं पर पढ़ने का साधन नहीं है। दुनिया में जब वह इंसान ही धोखा दे दे जो सबसे पूज्य हो तो बाकी के लिए क्या भरोसा करना। इसलिए बाप के नाम से मुझे नफरत हो गया।

सीधे कहानी पर आते हो आपका समय में बर्बाद करना नहीं चाहती। दिवाली का दिन था सब लोग अपने घर में मिठाई नए कपड़े पटाखे पूजा का सामान लाने में व्यस्त थे। मैं भी अपने घर को अच्छे से साफ सुथरा करें ताकि शाम को पूजा कर सकूं। मैं पार्ट टाइम जॉब करती हूं जिससे मेरा खर्चा चलता है और घर के छोटे-मोटे सामान भी उसी से ले आती हूं। मेरे पापा एक छोटी कंपनी में काम करते हैं ज्यादा सैलरी तो है नहीं पर शराब वह रोजाना पीते हैं इस वजह से मेरे घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। दिवाली में जो बोनस मिला था उसको वह पहले ही खत्म कर चुके थे।


उन्होंने बोला था कि मैं शाम को आऊंगा और कुछ मैं पैसे लेकर आऊंगा फिर हम दोनों जाकर बाजार से मिठाईयां वगैरह लेकर आएंगे और दिवाली मनाएंगे। पर उनका कोई अता पता रात को 9:00 बजे तक नहीं था। घर में पूजा पाठ करके मैं उन्हें का राह देख रही थी। तभी पापा घर आए शराब से वह फूल थे। मैंने कहा आप पैसे लाए हो उन्होंने कहा नहीं। मैंने पूछा आपने तो कहा था कि शाम को पैसे लेकर आऊंगा और आप आए इतनी रात को अब कहां आप बाजार जाओगे और सामान लाने जाओगे।

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उन्होंने कहा मेरे से एक बहुत बड़ी गलती हो गई। मैं तुम्हें जुए में हार गया हूं। सुबह से मैं जुआ खेल रहा था मैं चाहता नहीं था जुआ खेलने के लिए पर जो मेरा दोस्त है राजीव उसने ही मुझे पूरे दिन तक फसाया रखा और शाम तक बात ही ऐसी हो गई कि मेरे सारे पैसे खत्म हो गए। उसने दारु मुझे पिला दिया और अदाओं पर तुम्हें लगा दिया। मैं हार गया तुम्हें आज रात के लिए। मुझे माफ कर देना मैं एक अच्छा बात नहीं हूं तेरा। मुझे तो गालियां देने का मन बहुत कर रहा था पर क्या करते मुझे लगा कर आस-पड़ोस के लोगों को भी पता चल जाएगा इस वजह से चुप ही रहना मैं बेहतर समझी।

आधे घंटे में ही राजीव अंकल मेरे घर पर आ गए। उन्होंने आते ही मुझसे कहा तुम्हें तो पता ही चल गया होगा कि आज रात तो मेरे साथ रहेगी। मैंने कहा अंकल आपको मैं बाप के समान मानते थे हमेशा इज्जत देते थे पर आपने तो ऐसा क्यों कर दिया पापा के साथ। आपकी बेटी भी तो मेरे उम्र के हैं आपको तो कम से कम ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा ज्ञान की बातें मत कर बिजनेस बिजनेस होता है जुआ जुआ होता है। तुम्हारा बाप हार गया जुए में तो मैं क्या करूं। यह तो तुम अपने बाप से पूछो। मैंने अपने पापा की तरफ मुंह उठाकर देखा तो वह अपना दोनों हाथ जोड़कर गिरना रहे थे कि मेरे से गलती हो गई।

मैंने कहा ठीक है जब यह हार गए हैं एक रात के लिए तो मैं तैयार हूं पर आज दिवाली है आज मैं नहीं जाऊंगी। किसी तरीके से मैं उस दिन के लिए मना कर दी। और अंकल भी मान गए चलो ठीक है आज दिवाली है इसलिए मैं छोड़ देता हूं ऐसे में किसी को छोड़ता नहीं हूं 10 साल से मैं किसी ना किसी को ऐसे ही जुए में हर आता हूं और उसकी बीवी को या उसकी बेटी को एक रात के लिए रखता हूं। पर आज तक कभी ऐसा मौका नहीं आया था कि मैंने किसी को छोड़ दिया हूं पर मैं आज तुम्हें छोड़ रहा हूं कल तुम 8:00 बजे रात को मेरे खेत वाले बंगले पर आ जाना।


आपको समझ में आ गया होगा दोस्तों मेरे दिवाली कैसी बीती होगी। पूरी रात में सोचती रही कि अगर आज मां जिंदा होती तो मेरे साथ यह सब कुछ नहीं होता। पर जो विधाता ने लिख रखा है उसको कौन मिटा सकता है। मुझे जाना ही पड़ेगा यही सोच कर मैंने भी अपने कलेजे पर पत्थर रखकर सोच ली कि जो होगा देखा जाएगा। दूसरे दिन 8:00 बजे मुझे जाना था। पापा घर आए नहीं थे पर अंकल अपना गाड़ी लेकर आ गए। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा लग रहा था कि हो सकता है तुम ना आओगे इसलिए मैं तुम्हें लेने के लिए आ गया हूं। मैं बोली पापा को आने तो दो एक बार बात कर लेंगे उसके बाद हम चलेंगे। उन्होंने कहा मैंने तुम्हारे पापा से बात कर लिया है तू चल मेरे साथ।


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मैं उनके साथ उनके खेत वाले बंगले पर पहुंच गई। वहां पहुंचकर मुझे डर सा लग रहा था। क्योंकि बड़ा सा बंगला था कोई था नहीं उनके घर में दो बड़े-बड़े कुत्ते थे। रईस लोग हैं पापा की दोस्ती तो बस इसलिए थी ताकि वह मेरी मम्मी के साथ सो सके। नहीं तो इतना बड़ा इंसान पापा का दोस्त नहीं होता। और आज अगर दोस्ती है भी तो शायद वह मेरे चलते हैं उनके मन में जरूर कुछ ना कुछ चल रहा होगा इसी वजह से वह मुझे आज इस हालात पर पहुंचा दी है।

उन्होंने मुझे बैठाया और पूछा खाओगे पियोगे। मैंने कहा नहीं नहीं मुझे भूख नहीं है मुझे प्यास नहीं है। फिर भी उन्होंने मुझे चिकन और रुमाली रोटी खाने के लिए दिया मुझे लगा कर अब जो होना है हो ही जाएगा तो डरना किस बात का। जिंदगी चाहे जैसे जीने का रास्ता बनाए उसी को अपनाना होता है। और मैं तुम्हारी रोटी और चिकन खाने लगी। उन्होंने भी चिकन अपने थाली में रखा रोटी लिया और वह भी खाने लगे। इसके साथ-साथ वह शराब भी पीने लगे उन्होंने मुझसे भी पूछा कि तुम शराब कभी पी हो मैंने कहा नहीं कभी नहीं पी हूं। मैं बोली मैं इतनी बड़ी रहीस नहीं हूं कि मैं शराब पी लूंगी। रईस जो लड़कियां होती है जो बड़े घर की लड़कियां होती हैं वही शराब और दारू का मजा लेती है। मैं तो गरीब घर की लड़की हूं मेरा बाप जुआ खेलकर आज हार गया और आज मैं आपके साथ यहां पर बैठी हूं।


उन्होंने कहा देखो दीप्ति तुम मुझे गलत समझ रहे हो मैं यहां पर तुम्हें कुछ करने के लिए नहीं बुलाया हूं। मैं तुम्हारे बाप को सबक सिखाना चाहता था। मैं चाहता था कि क्योंकि तेरी मम्मी मुझे हॉस्पिटल में बोल कर गई थी कि आप मेरी बेटी का ध्यान रखिएगा। पर तेरा बाप इतना बड़ा दारूबाज है तुम्हें कहीं भी बेच देगा जब वह मुझे हार गया तो तुम्हें कहीं और भी हार जाएगा। बेशक में तुम को जीतकर यहां पर लाया हूं पर मैं तुम्हारे बाप को सबक सिखाने के मकसद से यह सब नाटक मुझे करना पड़ा।

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क्योंकि उसने कसम खाया अब के बाद से मैं कभी शराब नहीं पियूंगा कभी जुबा नहीं खेलूंगा। तो तुम यहां पर इज्जत के साथ आज रात रहो और हां मैंने जो उस रात बोला था कि मैं किसी को नहीं छोड़ता हूं हर 1 साल ऐसा करता हूं वह बात गलत है मैं एक अच्छा इंसान हूं मैं भी एक लड़की का बाप हूं और मैं जानता हूं कि लड़की की इज्जत क्या होती है। रही बात तुम्हें यहां तक बुलाने के लिए और तुम्हें वह सब बातें बोलने के लिए मैं तुमसे माफी मांगता हूं तुम मुझे माफ कर दो आज के बाद तुम्हें किसी चीज की कमी होगी तो मैं तुम्हारे लिए हमेशा खड़ा रहूंगा।

मैं वहीं पर रोने लगी। उन्होंने मुझे इज्जत के साथ खाना खिलाया बाद में कॉफी पिलाया और सोने के लिए मुझे यह कमरा खोल दिया मैं रात भर वही आराम से सोए सुबह उठकर में उन्हीं के साथ जब अपने घर आई तो मेरे पापा रोते हुए बोले कि बेटी जो हो गया तुम्हारे साथ हो गया आज के बाद मैं कभी शराब नहीं पियूंगा कभी मैं जुआ नहीं खेलूंगा। मैंने कहा ठीक है पापा आज के बाद तुम मेरा ख्याल रखना आपसे मैं भी तुम्हें ख्याल रखूंगी।

उस दिन के बाद से मेरे पापा ना तो शराब पीते हैं ना जुआ खेलते हैं मेरी ध्यान बहुत अच्छे से रखते हैं और अंकल भी आते जाते रहते हैं। अब हमें किसी तरीके की कोई दिक्कत नहीं है। आशा करती हूं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर यह कहानी आपको पसंद आई होगी।