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मेरी बूर फट गई अंकल जी के लंड से

हां जी ये सच है, ये कोई बनावटी कहानी नहीं है, ये एक रियल कहानी है, आप को आज मैं सुनती हु, की कैसे मेरी छोटी सी बूर को अंकल जी ने फाड़ दिया. पहले मैं आपको अपने बारे में बताती हु, मेरा नाम कोमल है, मैं हु भी बहुत कोमल, पर क्या करें उस कोमलता को बर्वाद कर दिया मेरे अंकल जी ने, मैं 19 की हु, बहुत ही खूबसूरत, चुलबुली सी, प्यारी सी, जवानी अभी अभी चढ़ी है, मस्त हु, बूब्स मेरे बड़े ही गोल गोल बीच में कत्थई कलर का निप्पल, एक दम टाइट टाइट, ये तो रही मेरी बूब्स, मेरे होठ प्योर पिंक, गाल गोरी गोरी, गर्दन लम्बी, मेरे बड़े बड़े बाल है, जो की कमर तक लटकते है, हां कमर की अगर मैं बात करूँ तो कोई भी जवान हो या बूढ़ा हो मेरी चूतड़ की लचक पे ही वो घायल हो जाये,

आप सोच रहे होंगे ये अंकल जी कौन है, अंकल जी 55 साल का इंसान है, वो राइटर है, मैं उनके पास रोज अपने किताब के सिलसिले में जाती हु, क्यों की मैं भी किताब लिखती हु, तो कभी कुछ पूछना होता है तो मैंने उनके पास जाती हु, वो मेरी काफी हेल्प करते है, पर इस हेल्प के बदले उन्होंने सबसे पहले, मुझे एक किश किया, फिर धीरे धीरे वो मेरे पीठ पर हाथ फेरने लगे, है तो वो थोड़े ज्यादा उम्र के पर मेरी ये १९ साल की जवानी को वो मजबूर कर देते है ताकि मैं भी अपने पीठ को सहलाने का एहसास ले सकु,

एक दिन की बात है, मेरी मम्मी कही बहार गई थी पापा जी के साथ, और मुझे एक सब्जेक्ट पूरा करना था, तो मैंने अंकल जी से टाइम मांगी की क्या आप मुझे कल पूरा दिन दे सकते है, ऐसे भी मेरे घर पे कोई नहीं है, मैं चाहती हु की आज मैं एक सब्जेक्ट को खत्म कर लू, तो वो बोले हां हां क्यों नहीं आ जाओ ऐसे भी कल मेरे पास काफी कम काम है, मैंने तुम्हे पूरा टाइम दे सकता हु, और मैं पहुंच गई उनके पास. उस दिन वो बड़े ही रोमांटिक मूड में गाना सुन रहे थे “सुन साथिया बर्षा दे” मैंने जैसे ही अंदर गई वो मुझे मुस्कुरा के देखे, मैं भी मुस्कुरा दी, उनके घर में कोई नहीं रहता है वो अकेले ही रहते है, पूरा घर ऐसा लगता है की लाइब्रेरी हो,

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मैंने जैसे ही अंदर गई, वो बोले हैप्पी बर्थ दे कोमल, ओह्ह्ह्ह माय गॉड उनको पता था मेरा बर्थ डे, और अपना हाथ फैला दिए और में उनसे गले मिल गई, उन्होंने मुझे पांच मिनट तक गले से लगाते रहे, और पीठ को सहलाते रहे तभी मैंने महसूस किया की उनका लैंड मेरे जांघो को टच करने लगा, धीरे धीरे मोटा और लंबा हो रहा था, मैंने कहा की अंकल जी आप क्या कर रहे हो तो वो बोले, मुझे अंकल मत कहो, आज से मैं तुम्हारा दोस्त हु, उम्र थोड़ा बड़ा है तो क्या हुआ, मेरा दिल अभी भी बहुत ही जवान है, मैं इंस किताबों में उलझ गया और मैंने शादी नहीं की देखो मेरे पास महीने का १० लाख का रोएलिटी आती है सिर्फ किताबो से पर मेरे लिए किसी कम का नहीं, मुझे एक दोस्त की जरूरत है.

हां एक खुशखबरी है तुम्हारे लिए, तुम चाहो तो एक साहित्य सम्मेलन है, मैंने तुम्हारा भी नाम लिखवा दिया है, मुझे लगा की मैंने अपनी ज़िंदगी संवार सकती हु इनका सहारा लेके, मैं एक सब सोच ही रही थी तो वो बोले, पर मुझे इसके बदले कुछ चाहिए, मैंने समझ रही थी की इनको क्या चाहिए पर मैंने भी सोच लिया था की कोई बात नहीं अगर ये सेक्स की डिमांड करेगा तो मैं मान जाउंगी, ऐसे भी क्या लड़को से ठुकवाने से ज्यादा बढ़िया है की किसी ऐसे से ठुकवाओ जिससे ज़िंदगी भी बने.

फिर मैंने पूछा हां बताइये आपको क्या चाहिए ऐसे मेरे पास देने को क्या है, तो वो बोले तू हुस्न की परी है कोमल, तुम चाहो तो जितना पैसा चाहती है मैं देने के लिए तैयार हु, पर तुम्हे एक बार पाना चाहता हु, मैंने कहा ठीक है, पर ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए, दोनों में पक्का हो गया और फिर वो मेरे होठो को चूसने लगे, मैंने उनके बाहों की आगोश में समाते चली गई, और वो मुझे बेड पर लिटा दिए, मुझे ऊपर से निचे तक चूमने लगे, धीरे धीरे वो मेरे टी शर्ट को उतार दिए और मेरी चूचियों को पुरजोर तरीके से दबाने लगे, फिर वो मेरा ब्रा खोल दिए और मेरी चूचियों को पिने लगे, मैं काफी सेक्सी हो चुकी थी, उनकी पकड़ काफी अच्छी थी, मुझे ऐसे भी ज्यादा उम्र बालों को ही पसंद करती थी, फिर उन्होंने मेरे जीन्स उतार दिया, और मेरी पेंटी को सूंघने लगे.

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सूंघते हुए बोले ओह्ह्ह्ह वाव क्या बात है, ऐसा लग रहा है की मैं स्वर्ग में हु, और उन्होंने हौले हौले से मेरी पेंटी को उतार दिया, और मेरे चूत को जीभ से चाटने लगे. मैं पानी पानी हो गई थी, मैं अब चुदना चाहती थी, मैंने कहा अंकल जी अब बर्दास्त नहीं हो रहा है, आप मुझे चोद दो, और वो अपना मोटा हथौड़ा सा लौड़ा निकाल के मेरे सामने हिलाते हुए, मेरे चूत के छेद पर रख दिया और जोर से धक्का लगाया, भला वो मोटा लौड़ा मेरे चूत के अंदर कैसे जाता, मैं दर्द से कराह उठी, मेरी चूत काफी छोटी थी, फिर उन्होंने वेसलिन लगाया अपने लंड पर और फिर से कोशिस किया और इस बार मेरे चूत में अपना लंड पेल दिया.

मैंने परेशान हो गई, वो मुझे चोदने लगे, वो मेरी छोटी सी चूत के छेद को फाड़ दिया, पर दस मिनट बाद मुझे अभी अच्छा लगने लगा और मैंने भी उनसे चुदवाने लगी, सच बताऊँ दोस्तों मुझे काफी अच्छा लगा उनसे चुदवाना, मैं भरपूर अपनी चुदाई का मजा ली थी अंकल जी से, मजा आ गया था. अभी वो कही बाहर गए है वो दो तीन दिन में आयेगे, क्यों की अब उनके लंड की याद आ रही है, वो चुदाई के बारे में सोच कर मेरे चूत से पानी निकलने लगता है और मेरी साँसे तेज हो जाती है.