दिल्ली के एक पॉश इलाके में मेरा फ्लैट था, जहाँ मैं, राघव, 28 साल का जवान और सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अकेला रहता था। मेरे घर में काम करने आती थी लक्ष्मी, हमारी पुरानी कामवाली, जो पिछले दस साल से हमारे घर काम कर रही थी। लेकिन इस कहानी की असली हीरोइन थी उसकी 20 साल की बेटी, काजल। काजल का जिस्म ऐसा था कि गली के सारे लड़के उसकी एक झलक के लिए तरसते थे। उसकी टाइट कुर्ती में उभरे रसीले बूब्स, पतली कमर और जीन्स में ढली गोल नितंब किसी के भी लंड को तड़पाने के लिए काफी थे। उसकी भूरी आँखें और गुलाबी होंठ जैसे चूमने की दावत दे रहे हों।
लक्ष्मी बीमार पड़ गई थी, और पिछले कुछ दिनों से काजल उसकी जगह काम करने आ रही थी। हर सुबह जब वह झाड़ू लगाती, उसकी कमर का लचकना और बूब्स का उछलना मेरे लंड में आग लगा देता था। मैंने कई बार नोटिस किया कि काजल भी मुझे चोर नजरों से देखती थी, और जब मैं उसे घूरता, तो वह शरारती मुस्कान देती। मेरे मन में उसकी टाइट चूत को चोदने की ख्वाहिश पलने लगी थी, और मुझे लगता था कि काजल की चूत भी मेरे मोटे लंड की भूखी थी।
एक रात का नशा
वो एक नवंबर की ठंडी रात थी। दिल्ली में हल्की बारिश हो रही थी, और मेरा फ्लैट मंद रोशनी और गर्म माहौल से भरा था। मैंने काजल को फोन किया और कहा, “काजल, आज रात कुछ एक्स्ट्रा काम है। क्या तुम आ सकती हो?” मैंने ये बहाना बनाया था, क्योंकि मेरे मन में कुछ और ही चल रहा था। काजल ने हँसते हुए कहा, “राघव भैया, रात को काम? ठीक है, मैं आती हूँ।” उसकी आवाज में एक शरारत थी, जो मेरे लंड को ताठ कर गई।
रात के 9 बजे काजल मेरे फ्लैट पर आई। उसने एक टाइट लाल टॉप और काली जीन्स पहनी थी, जो उसके जिस्म को और उभार रही थी। उसके बूब्स टॉप में कैद थे, और उसकी जीन्स में उसकी टाइट चूत की शेप साफ़ दिख रही थी। “राघव भैया, क्या काम है?” उसने मादक अंदाज में पूछा, और अपनी जीभ अपने होंठों पर फिराई। मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा, “काजल, काम तो बहाना था। तेरी इस जवानी को चखने की ख्वाहिश है।”
काजल ने हँसते हुए कहा, “तो देर किस बात की, भैया? मेरी चूत तुम्हारे मोटे लंड की वाट देख रही है।” उसकी बात सुनकर मेरा लंड मेरी पैंट में तन गया। मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया और उसके रसीले होंठों को अपने होंठों से चूस लिया। वो चुंबन इतना गहरा और गर्म था कि मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ गई।
बेडरूम में वासना का खेल
मैंने काजल को अपने बेडरूम में ले गया, जहाँ मखमली चादरें और मंद रोशनी माहौल को और कामुक बना रही थीं। काजल ने अपना टॉप उतार दिया, और उसकी काली लेस ब्रा में उसके रसीले बूब्स जैसे बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने उसकी ब्रा खोल दी, और उसके बूब्स मेरे सामने थे, गोल और रसीले। “काजल, तेरे बूब्स मुझे पागल कर रहे हैं,” मैंने कहा, और उसके निप्पल्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। काजल की सिसकारियाँ कमरे में गूँज उठीं। “हाँ, राघव भैया… और जोर से चूसो… मेरे बूब्स को दबाओ,” उसने चिल्लाते हुए कहा।
मैंने उसकी जीन्स और पैंटी उतार दी, और उसकी टाइट चूत मेरे सामने थी, गीली और गुलाबी, जैसे कोई नशीला फूल। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर फिराई, और काजल की चीखें कमरे में गूँज उठीं। “और तेज, भैया… मेरी चूत को चाटो,” उसने चिल्लाया, और अपनी टाँगें और चौड़ी कर दीं। मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराइयों में डाला, और उसकी कमर उछलने लगी।
काजल ने मेरी पैंट खोल दी और मेरा मोटा लंड बाहर निकाला। “ये लंड तो मेरी चूत को फाड़ देगा,” उसने शरारत से कहा, और मेरे लंड को अपने मुँह में लिया। उसकी जीभ मेरे मोटे लंड पर लपलपाती रही, और मेरी सिसकारियाँ तेज हो गईं। “काजल, तेरा मुँह मेरे लंड को पागल कर रहा है,” मैंने सिसकते हुए कहा, और उसके बालों को कसकर पकड़ लिया।
पूरी रात की चुदाई
मैंने काजल को बेड पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाकर अपने मोटे लंड को उसकी टाइट चूत में डाला। काजल चीख पड़ी, “राघव भैया, तेरा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है!” मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और उसकी सिसकारियाँ और तेज हो गईं। “और जोर से, भैया… मेरी चूत को फाड़ दे,” उसने चीखते हुए कहा। मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई, और हर धक्के के साथ उसके बूब्स उछल रहे थे। मैंने उसके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया, उन्हें चूसते और काटते हुए, और काजल की चीखें और तेज हो गईं।
मैंने उसे पलट दिया और डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। मेरा मोटा लंड उसकी टाइट चूत में इतनी गहराई तक जा रहा था कि हमारे जिस्म एक-दूसरे में पूरी तरह घुल गए। “हाँ, भैया… और गहरा… मेरी चूत को रगड़ दे,” काजल चिल्ला रही थी। मैंने उसके नितंबों को थपथपाया, और उसकी चीखें और तेज हो गईं।
पूरी रात, हमने एक-दूसरे के जिस्म को चखा। मैंने काजल को बेड के हर कोने में चोदा—कभी उसकी चूत को, कभी उसके बूब्स को चूसते हुए, और कभी उसके नितंबों को सहलाते हुए। काजल ने मेरे मोटे लंड को बार-बार अपने मुँह में लिया, और उसकी जीभ ने मुझे पागल कर दिया। “तेरा लंड मेरी चूत का राजा है, राघव भैया,” उसने सिसकारी भरे लहजे में कहा, और मुझे और जोर से चोदने के लिए उकसाया।
रात के दो बजे, जब हम थककर बेड पर लेटे, काजल ने मेरे लंड को फिर से अपने हाथ में लिया। “ये अभी भी तना हुआ है,” उसने शरारत से कहा, और उसे फिर से चूसने लगी। मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और उसे फिर से चोदना शुरू किया। इस बार, काजल ऊपर थी, और उसकी कमर हर धक्के के साथ लय में हिल रही थी। “तेरी टाइट चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है, काजल,” मैंने कहा, और उसने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी।
भोर की चमक
जब भोर की पहली किरण खिड़की से झाँकी, मैं और काजल नंगे एक-दूसरे की बाहों में लिपटे थे। उसने मेरे सीने पर सिर रखा और फुसफुसाया, “राघव भैया, तूने मेरी चूत को पूरी रात चोदकर रंगीन कर दिया। ये चुदाई मेरे जिस्म में हमेशा रहेगी।” मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा, “काजल, तेरी टाइट चूत मेरे मोटे लंड की गुलाम बन गई है।”
काजल ने मेरे होंठों पर एक गहरा चुंबन लिया, अपनी जीन्स और टॉप पहना, और एक मादक मुस्कान के साथ बोली, “मम्मी की तबीयत ठीक होने तक मैं रोज आऊँगी। मेरी चूत तेरा इंतज़ार करेगी।” मैंने उसकी कमर पकड़ी और कहा, “तो मेरा मोटा लंड हर रात हाजिर रहेगा।”
जैसे ही काजल फ्लैट से बाहर निकली, उसने पलटकर देखा और एक शरारती पलक झपकी। “ये रात हमारी थी, राघव भैया। लेकिन ये खेल अभी खत्म नहीं हुआ।” मैं जानता था, काजल की टाइट चूत की आग मेरे मोटे लंड में हमेशा सुलगती रहेगी।